Aligarh लिफ्ट हादसा: अपार्टमेंट में दर्दनाक मौत के बाद मचा हड़कंप, 600 गज में बने 13 फ्लैटों पर उठे सवाल, जांच के घेरे में बिल्डर और सुरक्षा व्यवस्था












Aligarh Lift Accident ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। रामघाट रोड स्थित रसिक अपार्टमेंट में हुए दर्दनाक हादसे में एक प्रॉपर्टी डीलर की लिफ्ट के नीचे दबकर मौत हो गई। घटना के बाद जहां मृतक के परिवार में मातम पसरा हुआ है, वहीं अपार्टमेंट में रहने वाले लोगों के बीच डर और असुरक्षा का माहौल बन गया है। हादसे के बाद प्रशासन ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दे दिए हैं और अब अपार्टमेंट की निर्माण प्रक्रिया, सुरक्षा मानकों तथा लिफ्ट के रखरखाव की गहन जांच की जाएगी।
यह घटना केवल एक दुर्घटना भर नहीं मानी जा रही, बल्कि इसने शहर में मौजूद कई पुराने अपार्टमेंट्स की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोग अब यह जानना चाहते हैं कि आखिर ऐसी स्थिति क्यों पैदा हुई और क्या इस हादसे को रोका जा सकता था।
रामघाट रोड स्थित रसिक अपार्टमेंट बना जांच का केंद्र
हादसे के बाद सबसे अधिक चर्चा रसिक अपार्टमेंट की निर्माण व्यवस्था और सुरक्षा मानकों को लेकर हो रही है। स्थानीय निवासियों के अनुसार यह अपार्टमेंट लगभग 600 गज के भूखंड पर निर्मित है। इमारत में तीन मंजिलें हैं और प्रत्येक मंजिल पर चार-चार फ्लैट बनाए गए हैं। इस प्रकार कुल 12 फ्लैटों की व्यवस्था की गई है।
स्थानीय लोगों का दावा है कि पार्किंग क्षेत्र में भी एक अतिरिक्त फ्लैट बनाया गया है, जिससे कुल फ्लैटों की संख्या 13 हो जाती है। पड़ोसियों का कहना है कि यदि पार्किंग क्षेत्र का उपयोग आवासीय उद्देश्य के लिए किया गया है तो यह सुरक्षा और सुविधाओं के दृष्टिकोण से गंभीर विषय हो सकता है।
अब जांच समिति इस बात की भी पड़ताल करेगी कि निर्माण उस समय लागू नियमों के अनुरूप हुआ था या नहीं तथा पार्किंग क्षेत्र में बनाए गए फ्लैट की स्वीकृति किस आधार पर प्रदान की गई थी।
लिफ्ट हादसे के बाद निवासियों में दहशत, सीढ़ियों का सहारा लेने लगे लोग
Aligarh Lift Accident के बाद अपार्टमेंट के निवासियों में भय का वातावरण साफ दिखाई दे रहा है। कई परिवारों ने एहतियात के तौर पर लिफ्ट का इस्तेमाल बंद कर दिया है। लोगों का कहना है कि हादसे ने उन्हें मानसिक रूप से झकझोर दिया है।
पड़ोस में रहने वाले नीरज वर्मा ने बताया कि उनकी बेटी भी इसी अपार्टमेंट में रहती है। घटना के बाद उन्होंने अपनी बेटी को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जब तक सुरक्षा की पूरी पुष्टि नहीं हो जाती, तब तक वह लिफ्ट का उपयोग न करे और केवल सीढ़ियों से ही आवागमन करे।
निवासियों का कहना है कि हादसे के बाद बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों में विशेष चिंता का माहौल है। कई लोगों का मानना है कि नियमित निरीक्षण और समय पर रखरखाव होता तो शायद ऐसी दुखद स्थिति से बचा जा सकता था।
मेंटेनेंस शुल्क पर उठे सवाल, आरडब्ल्यूए नहीं होने से बढ़ी बहस
हादसे के बाद अपार्टमेंट के प्रबंधन को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। स्थानीय निवासियों के अनुसार अपार्टमेंट में कोई रेजिडेंशियल वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) नहीं है। इसके बावजूद प्रत्येक परिवार से लगभग 2000 रुपये प्रतिमाह रखरखाव शुल्क लिया जाता है।
कुछ निवासियों का कहना है कि जब नियमित शुल्क लिया जा रहा था तो सुरक्षा उपकरणों और लिफ्ट की तकनीकी स्थिति पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए था। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि रखरखाव की जिम्मेदारी को लेकर स्पष्ट व्यवस्था न होने के कारण ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न होती हैं।
हालांकि इस विषय पर अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगा।
बिल्डर ने दी सफाई, कहा- लिफ्ट पूरी तरह सुरक्षित थी
मामले में उठ रहे सवालों के बीच रसिक अपार्टमेंट के बिल्डर बांके बिहारी बंसल ने अपना पक्ष भी रखा है। उनका कहना है कि अपार्टमेंट की लिफ्ट पूरी तरह कार्यशील और सुरक्षित थी। उनके अनुसार मृतक ने हादसे से पहले स्वयं लिफ्ट का चैनल खोल दिया था, जिसके बाद यह दुर्घटना हुई।
बिल्डर ने यह भी कहा कि अपार्टमेंट का नक्शा उस समय लागू नियमों के अनुसार स्वीकृत कराया गया था। उन्होंने पार्किंग क्षेत्र में बने फ्लैट को भी अधिकृत बताते हुए कहा कि यह निर्माण स्वीकृत नक्शे का हिस्सा है।
मेंटेनेंस शुल्क को लेकर उठ रहे सवालों पर उन्होंने स्पष्ट किया कि यह राशि केवल लिफ्ट के लिए नहीं बल्कि पूरे अपार्टमेंट के रखरखाव, सफाई और अन्य सुविधाओं के लिए ली जाती है। उनका यह भी कहना है कि उन्होंने कई बार निवासियों से सोसायटी बनाकर प्रबंधन अपने हाथ में लेने का अनुरोध किया, लेकिन कोई आगे नहीं आया।
प्रशासन ने लिया स्वतः संज्ञान, गठित हुई जांच समिति
Aligarh Lift Accident की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई शुरू कर दी है। अलीगढ़ विकास प्राधिकरण (एडीए) के सचिव राहुल विश्वकर्मा ने बताया कि अपार्टमेंट का निर्माण वर्ष 2010-11 के आसपास हुआ था। इसलिए उस समय लागू भवन नियमों और स्वीकृतियों के आधार पर पूरे मामले की समीक्षा की जाएगी।
उन्होंने कहा कि प्राधिकरण ने स्वतः संज्ञान लेते हुए जांच का निर्णय लिया है। समिति निर्माण मानकों, सुरक्षा व्यवस्था, लिफ्ट संचालन और अन्य तकनीकी पहलुओं की विस्तृत जांच करेगी। यदि किसी स्तर पर अनियमितता या लापरवाही सामने आती है तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
डीएम के निर्देश पर तकनीकी जांच भी होगी
जिलाधिकारी अविनाश कुमार ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए एक उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की है। इस समिति में अलीगढ़ विकास प्राधिकरण के सचिव और विद्युत सुरक्षा विभाग के सहायक निदेशक को शामिल किया गया है।
समिति का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना होगा कि हादसे का वास्तविक कारण क्या था। क्या यह तकनीकी खराबी थी, रखरखाव में कमी थी या कोई अन्य कारण जिम्मेदार था। जांच रिपोर्ट तैयार होने के बाद इसे जिलाधिकारी को सौंपा जाएगा, जिसके आधार पर आगे की प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।
परिवार की शिकायत पर दर्ज हो सकता है मुकदमा
एडीएम सिटी किंशुक श्रीवास्तव ने बताया कि जांच रिपोर्ट आने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि मृतक के परिजन लिखित शिकायत या तहरीर देते हैं तो संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर विधिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सकता है।
प्रशासन का कहना है कि पूरे मामले में निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाएगी और तथ्यों के आधार पर निर्णय लिया जाएगा। किसी भी पक्ष को बिना जांच के दोषी नहीं ठहराया जाएगा।
पुरानी इमारतों और लिफ्ट सुरक्षा पर फिर शुरू हुई बहस
इस हादसे के बाद शहर में पुरानी इमारतों और अपार्टमेंट्स में लगी लिफ्टों की सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि बहुमंजिला भवनों में नियमित तकनीकी निरीक्षण और समय-समय पर सुरक्षा ऑडिट अत्यंत आवश्यक है।
कई आवासीय परिसरों में वर्षों पुरानी लिफ्टें बिना व्यापक तकनीकी परीक्षण के संचालित होती रहती हैं। ऐसे मामलों में छोटी सी लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार लिफ्ट की मशीनरी, ब्रेकिंग सिस्टम, केबिन लॉकिंग व्यवस्था और आपातकालीन सुरक्षा उपकरणों की नियमित जांच अनिवार्य होनी चाहिए।









