फिल्मी चक्कर

Rajkummar Rao की ‘भूल चूक माफ’ बनी टाइम लूप में फंसी फ्लॉप? जानें वर्ल्डवाइड कलेक्शन और विवादों से जुड़ी पूरी कहानी!

Rajkummar Rao और वामिका गब्बी स्टारर ‘भूल चूक माफ’ ने 23 मई को सिनेमाघरों में दस्तक दी, लेकिन जिस उम्मीद के साथ यह फिल्म आई थी, उस पर खरी नहीं उतर सकी। करण शर्मा के निर्देशन में बनी यह फिल्म एक अनोखी टाइम-लूप कॉमेडी है, जो अपने अनोखे कॉन्सेप्ट के चलते सुर्खियों में रही। लेकिन रिलीज के पहले दिन से ही फिल्म की परफॉर्मेंस बॉक्स ऑफिस पर धीमी नजर आई।


ओपनिंग डे से ही धीमी रफ्तार में दौड़ी फिल्म

फिल्म ने पहले दिन भारत में लगभग 7 करोड़ रुपये की कमाई की। ये आंकड़ा राजकुमार राव की पिछली फिल्म ‘विक्की विद्या का वो वाला वीडियो’ से बेहतर है, जिसने सिर्फ 5.5 करोड़ की ओपनिंग की थी। लेकिन अगर इस कलेक्शन की तुलना राजकुमार की सुपरहिट फिल्म ‘स्त्री 2’ से की जाए, तो ‘भूल चूक माफ’ कहीं भी टिकती नहीं दिखती। ‘स्त्री 2’ ने ओपनिंग डे पर ही 51.8 करोड़ रुपये का धमाकेदार कलेक्शन किया था।


अबतक का कलेक्शन – उम्मीद से कम, निराशा ज्यादा

‘भूल चूक माफ’ ने अब तक भारत में कुल 16.11 करोड़ रुपये की कमाई की है, वहीं वर्ल्डवाइड आंकड़ा करीब 20 करोड़ रुपये तक ही पहुंच पाया है। जिस तरीके से फिल्म को प्रमोट किया गया था और स्टारकास्ट को देखते हुए उम्मीदें काफी ऊंची थीं, मगर यह फिल्म उन पर खरी नहीं उतर सकी।


फिल्म की अनोखी कहानी – टाइम ट्रैवल का तड़का

फिल्म की कहानी एक ऐसे युवक के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसकी शादी तय हो चुकी होती है। लेकिन जब हल्दी समारोह होता है, तो वह एक अजीब से टाइम लूप में फंस जाता है और बार-बार वही दिन जीता है।

यह कॉन्सेप्ट भारतीय सिनेमा के लिए काफी नया था और दर्शकों को इससे कुछ अलग देखने की उम्मीद थी। कॉमेडी, रोमांस और सस्पेंस से भरी इस फिल्म की थीम ने कुछ दर्शकों को आकर्षित किया, लेकिन अधिकांश दर्शकों के लिए यह कहानी उतनी गहराई नहीं छोड़ पाई जितनी की उम्मीद की गई थी।


विवादों में घिरी फिल्म – रिलीज की तारीख बनी बड़ा मुद्दा

‘भूल चूक माफ’ की रिलीज से पहले ही विवादों का सिलसिला शुरू हो गया था। पहले फिल्म को 9 मई को रिलीज किया जाना था, लेकिन ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के चलते इसे सुरक्षा कारणों से टाल दिया गया। इसके बाद मेकर्स ने घोषणा की कि फिल्म को 16 मई को OTT प्लेटफॉर्म प्राइम वीडियो पर रिलीज किया जाएगा।

लेकिन तभी थिएटर मालिकों और फिल्म मेकर्स के बीच हुए कानूनी विवाद ने एक नया मोड़ ले लिया। इसके चलते फिल्म को एक बार फिर से टालना पड़ा और अंततः यह 23 मई को सिनेमाघरों में रिलीज की गई। इस देरी ने फिल्म की मार्केटिंग पर भी असर डाला और दर्शकों की रुचि में गिरावट देखी गई।


क्या मार्केटिंग में रही कोई कमी?

फिल्म के प्रमोशन को लेकर भी कई सवाल उठे। राजकुमार राव और वामिका गब्बी ने विभिन्न टीवी शोज़ और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए फिल्म का प्रमोशन किया, लेकिन टाइम लूप की जटिल कहानी को आम दर्शक तक प्रभावी तरीके से नहीं पहुंचाया गया।

वहीं, ट्रेलर के रिलीज के समय भी दर्शकों को क्लियर नहीं हो सका कि फिल्म किस शैली में है – कॉमेडी, ड्रामा या मिस्ट्री। यह अस्पष्टता भी दर्शकों की कन्फ्यूजन का कारण बनी।


फिल्म के लिए आगे क्या है? OTT पर मिलेगी राहत?

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि ‘भूल चूक माफ’ को OTT प्लेटफॉर्म पर कैसी प्रतिक्रिया मिलती है। अक्सर देखा गया है कि कुछ फिल्में थिएटर में फ्लॉप होने के बावजूद ओटीटी पर अच्छी परफॉर्मेंस देती हैं, क्योंकि वहां उन्हें ज्यादा व्यापक दर्शक वर्ग मिलता है।

हालांकि, यह बात भी ध्यान देने योग्य है कि फिल्म पहले ही OTT रिलीज को लेकर चर्चा में आ चुकी है और अगर वहां भी इसकी परफॉर्मेंस कमजोर रही, तो इसे राजकुमार राव के करियर की एक और औसत फिल्म के तौर पर देखा जाएगा।


क्या वामिका गब्बी और राजकुमार राव की जोड़ी दर्शकों को पसंद आई?

इस फिल्म में वामिका गब्बी को राजकुमार राव के साथ पहली बार बड़े पर्दे पर देखा गया। दोनों की केमिस्ट्री पर दर्शकों की मिली-जुली प्रतिक्रिया रही। कुछ ने उनकी जोड़ी को फ्रेश बताया, तो कुछ को स्क्रिप्ट की कमजोरी के कारण वह असर देखने को नहीं मिला जिसकी जरूरत थी।


फिल्म के मुकाबले कौनसी फिल्में रहीं सफल?

इसी समय रिलीज हुई कुछ अन्य फिल्मों जैसे ‘इमरजेंसी’, ‘आदित्य 24×7’ आदि ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया है। यह दिखाता है कि कंटेंट की गहराई और प्रस्तुति में पारदर्शिता होना आज के दर्शकों के लिए कितना जरूरी है।


क्या सीख सकती है बॉलीवुड इस अनुभव से?

‘भूल चूक माफ’ एक अहम उदाहरण है कि बॉक्स ऑफिस पर सफल होने के लिए सिर्फ स्टार कास्ट या यूनिक कॉन्सेप्ट ही काफी नहीं होता, बल्कि जरूरी है स्क्रिप्ट की पकड़, प्रमोशन की सटीकता और समय पर रिलीज।


‘भूल चूक माफ’ एक बेहतरीन आइडिया पर बनी फिल्म है जो तकनीकी रूप से मजबूत है, लेकिन असमंजस भरे प्रमोशन और टाइमिंग के कारण अपनी पूरी चमक नहीं दिखा सकी। दर्शकों को समय यात्रा की इस कहानी में गहराई तो दिखी, लेकिन वह जुड़ाव नहीं बन पाया जिसकी दरकार थी। अब उम्मीद सिर्फ ओटीटी पर नई जान फूंकने की है।

 

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