वैश्विक

कश्मीर से एयरलिफ्ट करने के लिए गया वायु सेना का सी-17 विमान

सी-17 ग्लोबमास्टर विमान

रवानगी का सिलसिला जारी शुक्रवार को घाटी में जारी की गई एडवाइजरी के बाद से ही अमरनाथ यात्रियों, पर्यटकों और कश्मीर में पढ़ रहे बाहरी छात्र-छात्राओं को यहां से रवाना करने का सिलसिला जारी है। शनिवार तड़के एनआईटी श्रीनगर से करीब 800 छात्र-छात्राओं को बस के जरिये श्रीनगर से जम्मू भेजा जा रहा है। इसके साथ ही श्रीनगर में मौजूद अमरनाथ यात्री और पर्यटकों को भी बसों के जरिये घाटी से जम्मू भेजा जा रहा है। पहलगाम बेस कैंप से सभी यात्रियों को वापस भेज दिया गया है, वहीं सोनमर्ग, गुलमर्ग और श्रीनगर से लगातार यात्रियों की घाटी से रवानगी जारी है।

जम्मू में भगवती नगर बेस कैंप पूरी तरह से खाली करा दिया गया है। सभी यात्रियों को उनके मूल निवास जाने के लिए कहा गया है। इससे पहले शुक्रवार को राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा कि किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान न दें। अमरनाथ यात्रियों को तत्काल घाटी छोड़ने की सलाह से उत्पन्न अफरातफरी के बीच घाटी में तेजी से राजनीतिक समीकरण भी बदले। सभी दलों ने एकजुटता प्रदर्शित करने की कोशिश की।

नेशनल कॉन्फ्रेंस को छोड़कर सभी दलों के नेताओं ने शुक्रवार की रात राजभवन पहुंचकर सरकारी आदेशों को लेकर उत्पन्न अफरातफरी के माहौल तथा लोगों की चिंताओं की जानकारी दी। राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने नेताओं को आश्वस्त किया कि वे शांति बनाए रखें। अफवाहों पर बिल्कुल ध्यान न दें।

पहले से थी वायु सेना अलर्ट पर

भारत सरकार ने घाटी के मौजूदा हालातों को देखते हुए भारतीय सेना व वायु सेना को बुधवार को ही हाई अलर्ट पर रहने को कहा था। वहीं 28 हजार अतिरिक्त जवान घाटी में तैनात किए जा रहे हैं। वहीं भारी संख्या में जवानों की तैनाती को देखते हुए वायु सेना ने अपने सी-17 विमान को घाटी में तैनात करने की जा रही है। अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती पर गृह मंत्रालय ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में अर्द्धसैन्य बलों की तैनाती आंतरिक सुरक्षा स्थिति के आकलन और प्रशिक्षण की आवश्यकताओं के आधार पर की गई है। जम्मू-कश्मीर में 10 हजार सुरक्षाबलों की तैनाती के हफ्ते भर के अंदर ही केंद्र सरकार द्वारा 28 हजार और जवानों को जम्मू-कश्मीर भेजा जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक जवान गुरुवार सुबह से घाटी में पहुंचने लगे हैं। राज्य के अलग-अलग इलाकों में उन्हें तैनाती दी जा रही है।

मौजूदा परिस्थितियों के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अगले हफ्ते कश्मीर का दौरा करेंगे। उनका यह दौरा बहुत अहम माना जा रहा है। जैसे ही यह खबर मीडिया में आई, विपक्षी दलों के नेता सकते में आ गए हैं। हालांकि अभी अधिकारिक तौर पर यह पुष्टि नहीं हो पाई है कि अमित शाह का दौरा कितने दिन का होगा, लेकिन माना जा रहा है कि वे दो दिन के लिए वहां पर ठहरेंगे। इस दौरान उच्चाधिकारियों से बातचीत के अलावा केंद्रीय गृहमंत्री स्थानीय जन प्रतिनिधियों से भी बातचीत करेंगे। कश्मीर में अतिरिक्त सैन्य बलों की उपस्थिति, अमरनाथ यात्रा को रोकना और सैलानियों व दूसरे राज्यों के नागरिकों को वापस आने की एडवायजरी के बीच अमित शाह के दौरे ने राजनीतिक दलों में जबरदस्त हलचल मचा दी है।

बता दें कि केंद्र सरकार इस बार कश्मीर में आतंकवाद की समस्या को जड़ से खत्म करने का मन बना चुकी है। इसके लिए सरकार ने एक खास रणनीति बनाई है, लेकिन सुरक्षा कारणों से उसका खुलासा नहीं किया गया है। पाकिस्तान भी कहीं न कहीं यह बात समझ चुका है कि भारत अब अपने तरीके से कश्मीर में फैले आतंकवाद को खत्म कर देगा। इसके चलते पाकिस्तान के विदेश मंत्री कई दिनों से अमेरिकी मध्यस्थता का राग अलाप रहे हैं। दो सप्ताह पहले रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कश्मीर समस्या पर बड़ा बयान दिया था। 

बॉर्डर रोड आर्गेनाइजेशन द्वारा बनाए गए एक पुल का उद्घाटन करने पहुंचे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि कश्मीर की समस्या तो अब हल होकर रहेगी। भारत इसे अपने तरीके से हल करेगा। दुनिया की कोई भी ताकत हमें ऐसा करने से रोक नहीं सकती। रक्षामंत्री ने कहा, अगर कोई बातचीत के रास्ते से कश्मीर की समस्या का समाधान नहीं होने देना चाहता है, तो हमें अच्छी तरह से पता है कि इसका हल कैसे निकाला जा सकता है। गृहमंत्री अमित शाह इससे पहले भी कश्मीर का दो दिवसीय दौरा कर चुके हैं। उसके बाद से ही यह लगने लगा था कि कश्मीर में अब सरकार कोई बड़ा कदम उठाने जा रही है।

News Desk

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