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नेपाल के पांच जिलों की करीब 74 हेक्टेयर भूमि पर चीनी कब्जा

नेपाल के पांच जिलों की करीब 74 हेक्टेयर भूमि और गोरखा और दारचूला के एक-एक गांव पर चीन ने अतिक्रमण किया है। इतने समय बाद भी नेपाल सरकार इस विवाद को सुलझा नहीं सकी है।

नेपाली मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने नेपाल के दोलखा जिले के उत्तरी क्षेत्र में पांच हेक्टेयर से अधिक, हुम्ला, सिंधुपाल्चोक, संखुवासभा और रसुवाका में 64 हेक्टेयर जमीन पर कब्जा किया हुआ है।

गोरखा और दारचूला के जिन गांवों पर चीन का कब्जा है, वहां की पैमाइश अभी तक नहीं पाई है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2005 के बाद से चीन के साथ नेपाल की सीमा वार्ता नहीं हुई है। दोनों देशों के बीच 2012 में सीमा विवाद को लेकर वार्ता होनी थी, लेकिन इसे अचानक स्थगित कर दिया गया। 

अधिकारियों की मानें तो दौलत जिले के बिगु गांव पालिका के कुर्ला क्षेत्र में 57 नंबर पिलर को पूर्व निर्धारित स्थान से 1500 मीटर नेपाल की ओर रखे जाने के कारण पांच हेक्टेयर जमीन चीन के पास चली गई। 57 पिलर चीन के पास जाने के बाद दोनों देशों के बीच सीमा विवाद सुलझाने को लेकर चौथे प्रोटोकॉल को लेकर अब तक हस्ताक्षर नहीं हो पाए हैं।

नेपाल में चीनी घुसपैठ और एक बड़े भूभाग पर कब्जा किए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। नेपाली कांग्रेस ने इसे बेहद गंभीर मामला करार देते हुए सरकार पर सवाल उठाया है कि वह भारत के साथ कालापानी, लिपुलेख सीमा विवाद में उलझी है और दूसरी तरफ चीन उसके एक बड़े हिस्से पर कब्जा कर चुका है।

नेपाली कांग्रेस का आरोप है कि अपने देश के अहम मसलों, सरकार की नाकामियों और भ्रष्टाचार के तमाम मामलों पर पर्दा डालने के लिए नेपाल सरकार लगातार राष्ट्रवाद और भारत पर सीमाई इलाकों पर कब्जे का मसला उठा रही है।

नेपाली कांग्रेस के नेता बिमलेन्द्र कुमार निधि ने कहा है कि हिमालयी क्षेत्रों में चीन की खतरनाक गतिविधियों की खबरें आ रही हैं, चीन ने हुमला, रसुवा, संखुवासभा और सिंधुपल चौक जिलों की 33 हेक्टेयर नेपाली जमीन पर कब्जा कर लिया है, साथ ही गोरखाओं के रुई गांव पर भी चीन का कब्जा हो चुका है।

 सरकार खामोश है और कोई कदम नहीं उठा रही है। 1962 से पहले तक रुई गांव गोरखाओं का गांव होता था, लेकिन धीरे धीरे उसपर चीन ने कब्जा जमा लिया और अब वह उसका हिस्सा हो गया।   

उधर हिमालयन टाइम्स को गोरखा लैंड रेवेन्यू दफ्तर के एक कर्मचारी ने बताया है कि गांव के लोग 1962 तक लगातार सरकार को इसका राजस्व देते रहे थे और इसके रिकॉर्ड तक मौजूद हैं। इस बारे में अखबार की तफ्तीश से पता चला है कि चीन ने इस पर कब्जा कर रखा है और अब नेपाल सरकार इसके खिलाफ आवाज़ तक नहीं उठा पाती।

नेपाली कांग्रेस के उपाध्यक्ष बिमलेन्द्र निधि ने ये मुद्दा प्रमुखता से उठाया है और सोशल मीडिया पर इस बारे में सरकार से जवाब मांगा है। उनका कहना है कि सरकार ने इस बारे में आखिर चुप्पी क्यों साध रखी है।

निधि ने कहा कि पिछले साल नेपाली सरकार ने चीन से एक समझौता किया था, जिसके तहत चीन के कुछ हजार टीचर नेपाली स्कूलों में बच्चों को चीनी भाषा पढ़ाने आने वाले हैं। ये सीधे तौर पर नेपाली स्कूलों के तय पाठ्यक्रमों में छेड़छाड़ है जो कतई सही नहीं ठहराया जा सकता।

News-Desk

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