Middle East War का असर: क्रूड ऑयल 100 डॉलर के पार, हॉर्मुज मार्ग बंद होने से वैश्विक संकट, भारत सरकार बोली—पेट्रोल-डीजल महंगे नहीं होंगे
Crude Oil Price 100 Dollar का स्तर पार करते ही वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल मच गई है। Middle East War में अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर देखने को मिल रहा है। रविवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत अचानक तेज उछाल के साथ 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई, जो पिछले साढ़े तीन वर्षों का सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है।
इससे पहले वर्ष 2022 में वैश्विक परिस्थितियों के कारण कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर के पार पहुंची थीं। लेकिन वर्तमान हालात में मिडल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष ने फिर से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार को अस्थिर कर दिया है।
अचानक 16.5% की उछाल, 108 डॉलर तक पहुंचा ब्रेंट क्रूड
Crude Oil Price 100 Dollar पार होने के बाद बाजार में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला। शिकागो मर्केंटाइल एक्सचेंज में ट्रेडिंग शुरू होते ही ब्रेंट क्रूड की कीमत में 16.5 प्रतिशत की तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई।
जहां शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड लगभग 93 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ था, वहीं रविवार को बाजार खुलते ही इसकी कीमत 108 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। इतनी तेज उछाल ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ा दी है।
ऊर्जा विश्लेषकों का मानना है कि यदि मिडल ईस्ट में तनाव लंबे समय तक जारी रहता है तो तेल की कीमतों में और भी तेजी देखने को मिल सकती है।
10 दिनों में करीब 48% महंगा हुआ कच्चा तेल
मिडल ईस्ट में युद्ध जैसी स्थिति बनने के बाद तेल बाजार में अस्थिरता लगातार बढ़ रही है। Crude Oil Price 100 Dollar का आंकड़ा पार करने से पहले ही पिछले 10 दिनों के दौरान कच्चा तेल लगभग 48 प्रतिशत तक महंगा हो चुका है।
ऊर्जा बाजार के विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक आपूर्ति बाधित होने की आशंका के कारण निवेशकों और ट्रेडर्स ने तेल खरीदना तेज कर दिया है। इससे कीमतों में अचानक उछाल देखने को मिला।
कई देशों की अर्थव्यवस्था के लिए यह स्थिति चिंता का विषय बन गई है, क्योंकि कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर पेट्रोल-डीजल और परिवहन लागत पर पड़ता है।
हॉर्मुज जल मार्ग बंद होने से बढ़ा वैश्विक संकट
तेल की कीमतों में तेजी का सबसे बड़ा कारण स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज का प्रभावी रूप से बंद हो जाना बताया जा रहा है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्गों में से एक है।
दुनिया के कुल तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। खाड़ी देशों से निकलने वाला तेल इसी रास्ते से एशिया, यूरोप और अमेरिका के कई देशों तक पहुंचता है।
ईरान के साथ बढ़ते संघर्ष के कारण यह समुद्री मार्ग प्रभावित हो गया है, जिससे तेल की आपूर्ति में बाधा आ रही है। परिणामस्वरूप वैश्विक बाजार में तेल की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गई है।
खाड़ी देशों की सप्लाई प्रभावित
Crude Oil Price 100 Dollar पार होने की एक बड़ी वजह यह भी है कि कई खाड़ी देशों से तेल की सप्लाई प्रभावित होने लगी है।
यूएई और कुवैत जैसे बड़े तेल उत्पादक देशों ने अपना उत्पादन कम करना शुरू कर दिया है। इसका कारण यह है कि जब प्रमुख समुद्री मार्ग बंद हो जाते हैं तो तेल का निर्यात करना मुश्किल हो जाता है।
सप्लाई चेन बाधित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की उपलब्धता घट जाती है और कीमतें तेजी से बढ़ने लगती हैं।
भारत सरकार का दावा: देश में तेल की कमी नहीं होगी
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बावजूद भारत सरकार ने नागरिकों को राहत देने वाली जानकारी दी है। सरकार का कहना है कि देश में कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का पर्याप्त भंडार मौजूद है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारत के पास इस समय 25 करोड़ बैरल से अधिक कच्चे तेल और रिफाइंड पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का स्टॉक मौजूद है। यह मात्रा लगभग 4,000 करोड़ लीटर के बराबर मानी जा रही है।
सरकार का कहना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय सप्लाई कुछ समय के लिए बाधित भी हो जाए, तो भी देश में तेल की उपलब्धता बनी रहेगी।
7 से 8 हफ्ते तक चल सकता है भारत का तेल भंडार
ऊर्जा मंत्रालय से जुड़ी रिपोर्ट के अनुसार, भारत के पास मौजूद तेल भंडार इतना पर्याप्त है कि अगर सप्लाई पूरी तरह रुक भी जाए, तो देश की पूरी सप्लाई चेन 7 से 8 हफ्तों तक बिना किसी परेशानी के चल सकती है।
यानी आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल या अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की कमी की आशंका नहीं है। सरकार का यह भी कहना है कि मौजूदा हालात में आम उपभोक्ताओं को घबराने की जरूरत नहीं है।
सरकार ने कहा: पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़ेंगे
तेल बाजार में उथल-पुथल के बीच भारत सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी नहीं की जाएगी।
सरकार का मानना है कि पर्याप्त भंडार और वैकल्पिक आयात स्रोतों के कारण घरेलू बाजार में कीमतों को स्थिर रखा जा सकता है।
इस बयान से आम लोगों और परिवहन क्षेत्र को राहत मिली है, क्योंकि तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर महंगाई पर पड़ता है।
रूस से कच्चा तेल खरीदेगा भारत
ऊर्जा आपूर्ति को सुनिश्चित करने के लिए भारत ने वैकल्पिक रणनीति भी अपनाई है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने भारतीय रिफाइनरियों को 30 दिन का विशेष लाइसेंस जारी किया है।
यह लाइसेंस 3 अप्रैल तक वैध रहेगा, जिससे भारत रूस से कच्चा तेल खरीद सकता है। इससे भारत के ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों का मानना है कि रूस से तेल आयात जारी रहने से भारत को वैश्विक संकट के बावजूद आपूर्ति बनाए रखने में सहायता मिलेगी।
भारत में चार साल से स्थिर हैं पेट्रोल-डीजल की कीमतें
पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के आंकड़ों के अनुसार, भारत में पिछले चार वर्षों के दौरान पेट्रोल और डीजल की कीमतें अपेक्षाकृत स्थिर बनी हुई हैं।
फरवरी 2022 से फरवरी 2026 के बीच दिल्ली में पेट्रोल की कीमतों में 0.67 प्रतिशत की मामूली गिरावट दर्ज की गई है।
इसके विपरीत कई देशों में पेट्रोल की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी हुई है। उदाहरण के लिए इसी अवधि में पाकिस्तान में पेट्रोल 55 प्रतिशत और जर्मनी में 22 प्रतिशत तक महंगा हो चुका है।
घरेलू गैस सिलेंडर के दाम में बढ़ोतरी
हालांकि पेट्रोल-डीजल की कीमतें फिलहाल स्थिर रखी गई हैं, लेकिन घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में हाल ही में बढ़ोतरी की गई है।
सरकार ने 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की वृद्धि की है। दिल्ली में अब यह सिलेंडर 913 रुपये में उपलब्ध है, जबकि पहले इसकी कीमत 853 रुपये थी।
इसके अलावा 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में भी 115 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। अब इसकी कीमत 1883 रुपये हो गई है।
नई कीमतें 7 मार्च से लागू कर दी गई हैं।
वैश्विक ऊर्जा बाजार पर बनी रहेगी नजर
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मिडल ईस्ट में जारी संघर्ष लंबा चलता है तो तेल बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। दुनिया की कई अर्थव्यवस्थाएं तेल आयात पर निर्भर हैं, इसलिए कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
इस स्थिति में भारत सहित कई देश अपनी ऊर्जा सुरक्षा रणनीतियों को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं।

