उत्तर प्रदेश

साइबर ठगों का गैंग: झारखंड के जामताड़ा से Bareilly तक फैली ठगी की साजिश

झारखंड के जामताड़ा में बैठे साइबर ठगों ने देशभर में फैलकर लाखों-करोड़ों की ठगी की योजना को अंजाम दिया। इस मामले में एक मुख्य आरोपी विक्की साहू, जो Bareilly के सीबीगंज का निवासी है, गिरफ्तार हो चुका है, लेकिन उसके चार साथी अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, विक्की और उसके साथियों का पूरा गैंग अब नेपाल भाग चुका है, जहां उनकी तलाश में पुलिस ने दबिश देना शुरू कर दिया है।

विक्की साहू का गिरफ्तार होना: ठगी की एक कड़ी टूटने का संकेत

विक्की साहू की गिरफ्तारी के साथ ही पुलिस को ठगी के इस संगठित नेटवर्क के बारे में कई अहम जानकारी मिली है। साइबर ठगों का यह गैंग बरेली में खातों और मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल करता था, जिनसे देश के विभिन्न राज्यों में साइबर अपराधों को अंजाम दिया जाता था। खासकर पश्चिम बंगाल, बिहार और हरियाणा जैसे राज्यों में इन ठगों ने लोगों को ठगा था।

बरेली साइबर क्राइम थाना पुलिस ने तीन दिन पहले विक्की साहू को गिरफ्तार किया, जब उन्होंने साइबर ठगों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे खाते और मोबाइल नंबरों का पता लगाया। जानकारी के अनुसार, विक्की साहू का मुख्य काम जामताड़ा में बैठे ठगों को खाते उपलब्ध कराना था। इन खातों से जुड़े मोबाइल नंबरों के जरिए साइबर ठग ठगी करते थे, जिससे उनका पूरा नेटवर्क काम कर पाता था।

पुलिस की तलाश: नेपाल में छिपे ठगों का सुराग

विक्की साहू की गिरफ्तारी के बाद, पुलिस के लिए अगला टारगेट उसके साथी थे, जो अब नेपाल में छिपे हुए हैं। ये चार आरोपी भी विक्की के साथ मिलकर साइबर ठगी के मामलों को अंजाम देते थे। विक्की के साथी इस गिरोह के अहम सदस्य थे, क्योंकि वे ठगों को खाते उपलब्ध कराते थे और इन खातों का संचालन ठग अपने हाथों में लेते थे। इसके बाद, ठग अलग-अलग राज्यों में अपने ठगी के तरीके अपनाते हुए लोगों के खातों में पैसा डालते थे और फिर उसे निकाल लेते थे।

बरेली पुलिस के अनुसार, जब उन्हें इस बात का शक हुआ कि विक्की साहू और उसके साथियों का गैंग एक बड़े साइबर ठगी नेटवर्क का हिस्सा है, तो उन्होंने खातों की छानबीन शुरू की। छानबीन में यह बात सामने आई कि विक्की और उसके गैंग के सदस्य पूरे देश में विभिन्न जगहों पर साइबर ठगी के लिए सक्रिय थे।

साइबर ठगी का तरीका: कैसे काम करता था गिरोह?

साइबर ठगों का यह गिरोह कई महीनों से विभिन्न राज्यों में सक्रिय था। ठगों का तरीका बड़ा ही सटीक था। सबसे पहले वे बरेली के खाते और मोबाइल नंबरों को ठगों को उपलब्ध कराते थे। फिर इन नंबरों का इस्तेमाल करके ठग बैंकिंग और अन्य वित्तीय धोखाधड़ी करते थे। यह पूरा खेल बरेली से लेकर जामताड़ा तक फैला हुआ था, जिसमें एक ठग दूसरे के खाते का उपयोग करता था।

पुलिस ने जब खातों की जांच की, तो उन्होंने पाया कि विक्की और उसके साथियों के द्वारा दिए गए खातों से लाखों रुपए ठगों द्वारा निकाले गए थे। इसके अलावा, जब पुलिस ने विक्की से पूछताछ की, तो उन्होंने बताया कि उसके साथी जामताड़ा के ठगों को इन खातों से लिंक मोबाइल नंबर उपलब्ध कराते थे, ताकि ठगी की प्रक्रिया को और भी सटीक तरीके से अंजाम दिया जा सके।

साइबर क्राइम पुलिस की कार्रवाई और आगे की योजना

साइबर क्राइम पुलिस के लिए यह एक बड़ी सफलता थी। विक्की साहू और उसके गैंग के खिलाफ कार्रवाई ने ठगी के इस बड़े नेटवर्क को उजागर किया है। अब पुलिस ने नेपाल भाग चुके चार आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है।

विक्की की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस का ध्यान उसकी जमानत और पूछताछ पर केंद्रित है। पुलिस को उम्मीद है कि विक्की से पूछताछ के बाद ठगों के बाकी साथियों के बारे में अहम जानकारी मिलेगी, जिससे वे नेपाल में छिपे ठगों को पकड़ सकेंगे। इसके साथ ही, पुलिस ने विक्की के करीबी रिश्तेदारों और दोस्तों के नंबर सर्विलांस पर लगाए हैं ताकि उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जा सके।

साइबर ठगों के लिए चेतावनी: बढ़ती सख्ती

यह घटना साइबर ठगी के बढ़ते मामलों के लिए एक चेतावनी के रूप में सामने आई है। पिछले कुछ वर्षों में साइबर ठगी के मामले तेजी से बढ़े हैं, और यह घटनाएं यह दर्शाती हैं कि ठग अब आधुनिक तकनीकी तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। बरेली पुलिस और साइबर क्राइम टीम के कड़े कदमों ने इस गिरोह के एक हिस्से को पकड़ने में सफलता हासिल की है, लेकिन अब भी कई ठग बचे हुए हैं जो अपनी अपराध की गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं।

साइबर क्राइम पुलिस का कहना है कि जल्द ही इस गिरोह के बाकी आरोपियों को भी पकड़ा जाएगा और इसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

समाप्ति: साइबर अपराध पर सख्त नियंत्रण की आवश्यकता

साइबर ठगों के इस गिरोह की गिरफ्तारी से यह स्पष्ट हो गया है कि साइबर अपराध अब हमारे समाज के लिए एक गंभीर खतरा बन गया है। इन ठगों के नेटवर्क की गिरफ्तारी के बाद पुलिस को यह समझने का मौका मिला है कि ठगों का नेटवर्क कितना बड़ा और संगठित था। अब जरूरत है कि साइबर अपराध से निपटने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं। इसके लिए न केवल पुलिस को सक्रिय रहना होगा, बल्कि नागरिकों को भी इस प्रकार के धोखाधड़ी से बचने के उपायों के बारे में जागरूक किया जाना चाहिए।

साइबर ठगी की बढ़ती घटनाओं से निपटने के लिए पुलिस और आम नागरिकों को मिलकर काम करने की आवश्यकता है। अगर हम सब इस समस्या को गंभीरता से लें, तो ही हम साइबर अपराध पर सख्त नियंत्रण पा सकते हैं।

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