Bareilly-जम्मू तवी- कानपुर एक्सप्रेस में यात्रियों के बीच मारपीट, पुलिस सुरक्षा की खुली पोल
Bareilly उत्तर प्रदेश: हाल ही में दिल्ली-बरेली रेलवे रूट पर एक ऐसी घटना हुई, जिसने न केवल यात्रियों के बीच असुरक्षा का माहौल पैदा किया, बल्कि रेलवे सुरक्षा की पूरी प्रणाली पर भी सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। जम्मू तवी से कानपुर सेंट्रल जाने वाली 12470 एक्सप्रेस ट्रेन में यात्री सीट को लेकर भिड़ गए, और मामला इतना बढ़ गया कि ट्रेन में जमकर मारपीट और तोड़फोड़ हुई। इस दौरान मुरादाबाद से बरेली तक जीआरपी और आरपीएफ की सुरक्षा व्यवस्था नदारद रही, जो यात्री सुरक्षा के लिए जिम्मेदार थीं।
घटना का विवरण
जम्मू तवी- कानपुर एक्सप्रेस के जनरल कोच में दो गुटों के बीच सीट को लेकर विवाद शुरू हुआ। यह घटना मुरादाबाद रेलवे स्टेशन के पास हुई, जहां एक गुट ने ट्रेन में अपने साथियों को बुलाया और हंगामा शुरू कर दिया। मुरादाबाद के जीआरपी और आरपीएफ को तुरंत सूचित किया गया, लेकिन उन्होंने मामले को गंभीरता से नहीं लिया और कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। नतीजा यह हुआ कि जैसे-जैसे ट्रेन बरेली की ओर बढ़ी, दोनों गुटों के बीच झगड़ा और हिंसा बढ़ती चली गई।
बरेली में गुंडागर्दी की हदें पार
बरेली रेलवे स्टेशन पर जब ट्रेन रुकी, तो गुटों ने स्टेशन पर उतरकर ट्रेन के अंदर तोड़फोड़ की और बेल्ट से एक-दूसरे पर हमला किया। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि यात्री भयभीत हो गए और उनकी सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे। बरेली जीआरपी ने इस पूरी घटना के बाद तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया, लेकिन लगभग आधा दर्जन गुंडे मौके से फरार हो गए। इन फरार आरोपियों की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है।
जीआरपी और आरपीएफ की निष्क्रियता पर सवाल
मुरादाबाद से लेकर बरेली तक घटनाएं होती रही, लेकिन जीआरपी और आरपीएफ की टीमों ने कोई कार्रवाई नहीं की। सोशल मीडिया पर इस घटना के वीडियो वायरल होने के बाद यात्रियों और आम लोगों के बीच गुस्से की लहर दौड़ गई। कई लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि जब मामले की सूचना पहले ही मुरादाबाद जीआरपी और आरपीएफ को दी गई थी, तो फिर उनकी टीम ने सुरक्षा को लेकर कोई कदम क्यों नहीं उठाए। आखिरकार, जब ट्रेन में झगड़े और हिंसा हो रही थी, उस समय जीआरपी और आरपीएफ के सुरक्षा अधिकारी कहां थे?
सुरक्षा की गंभीर चूक
यह मामला रेलवे सुरक्षा की गंभीर चूक को उजागर करता है। सवाल यह है कि जब पूरी ट्रेन में बवाल मच रहा था, तब सुरक्षा अधिकारी कहां थे? क्या उनकी मौजूदगी सिर्फ कागजों तक सीमित है, या फिर वे भी ट्रेन के भीतर हो रही घटनाओं से अनजान थे? यह घटना रेलवे सुरक्षा बल की कमजोरियों को उजागर करती है और यात्रियों की सुरक्षा के प्रति रेलवे प्रशासन की लापरवाही को सामने लाती है।
आगे क्या कदम उठाए जाने चाहिए?
इस घटना से सीख लेते हुए, रेलवे को अपनी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना होगा। सबसे पहली और अहम जरूरत यह है कि हर ट्रेन में एक प्रभावी सुरक्षा तंत्र होना चाहिए, ताकि किसी भी तरह की आपातकालीन स्थिति में त्वरित कार्रवाई की जा सके। साथ ही, रेल सुरक्षा बलों को घटनाओं के प्रति संवेदनशील और जिम्मेदार बनाना होगा। मुरादाबाद से बरेली तक सुरक्षा बलों का लापरवाह रवैया साफ तौर पर इस घटना का मुख्य कारण बना।
यात्रियों की सुरक्षा पर सवाल
बरेली में हुई इस घटना ने यात्रियों के बीच असुरक्षा की भावना को जन्म दिया है। सवाल यह उठता है कि क्या रेलवे में बैठे यात्रियों को अपनी जान की सुरक्षा के लिए खुद ही जिम्मेदार ठहराया जाएगा? क्या उन्हें भरोसा दिलाया जाएगा कि आने वाले दिनों में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होगी? इन सभी सवालों के जवाब रेलवे प्रशासन को देने होंगे।
बरेली जीआरपी की कार्रवाई
बरेली जीआरपी ने तीन गुंडों को गिरफ्तार किया, जिनकी पहचान मुनीश, साहिल, और हरपाल के रूप में हुई। इन तीनों आरोपियों को रंगे हाथों पकड़ा गया, लेकिन उनके अन्य साथी फरार हो गए। बरेली जीआरपी ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लिया है और फरार आरोपियों की तलाश जारी है। इस घटना के बाद रेलवे सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं, जो अब तक अनुत्तरित हैं।
बरेली में हुई यह घटना न केवल यात्री सुरक्षा के लिए एक चेतावनी है, बल्कि यह रेलवे प्रशासन के लिए भी एक बड़े पैमाने पर सुधार की आवश्यकता को दर्शाती है। यदि रेलवे अपनी सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त नहीं करता, तो भविष्य में ऐसी घटनाएं और भी अधिक गंभीर रूप ले सकती हैं। अब देखना होगा कि रेलवे प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और क्या इस घटना से सुरक्षा व्यवस्था में सुधार आता है या नहीं।
यात्रियों की सुरक्षा और रेलवे सुरक्षा व्यवस्था के मुद्दे पर गंभीर चिंताएं उठनी चाहिए। बरेली की घटना को लेकर अब रेल प्रशासन को कदम उठाने होंगे ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।

