आरटीआई के तहत सूचना मांगने पर जिलापूर्ति अधिकारी ने खोया आपा, आरटीआई मांगने वाले युवक पर जाति सूचक शब्दों का किया इस्तेमाल
मुजफ्फरनगर। भ्रष्टाचार को उजागर करने वाला हथियार सूचना का अधिकार अब आरटीआई के तहत सूचना मांगने वालों पर ही अपमान, गाली गलौच और धमकी की वजह बनता जा रहा है।
वैसे तो संविधान के मुताबिक हर एक व्यक्ति को समान अधिकार है। सबका साथ सबका विकास के नारे पर वोट बटोरने वाली सरकार के राज में कानून की कोई अहमियत नहीं रह गई
अधिकारों की बात करने पर अभद्रता और जाति-सूचक शब्दों का इस्तेमाल किया जा रहा है।मामला मुजफ्फरनगर के जिलापूर्ति कार्यालय का है जहां सूचना के अधिकार आरटीआई के तहत सूचना मांगने पर जिलापूर्ति अधिकारी ब्रिजेश शुक्ला ने जानकारी मांगने वाले युवक पर आरटीआई वापिस लेने का दबाव बनाया
जब युवक नहीं माना तो डीएसओ इस कदर नाराज हो गए कि गाली-गलौच पर उतारु हो गए, इतना ही नहीं साफ-शब्दों में जाति-सूचक शब्दों का इस्तेमाल किया।
युवक सूर्यकांत को जिलापूर्ति अधिकारी ब्रिजेश शुक्ला ने युवक द्वारा लगाई गई आरटीआई के जवाब के लिए लाया था, जो युवक ने अपने पिता धर्मपाल के नाम से डाली थी। जब युवक कार्यालय पहुंचा तो डीएसओ ब्रिजेश शुक्ला ने युवक को बहला-फुसलाकर सहमति रजिस्टर पर हस्ताक्षर करवाने चाहे
लेकिन युवक के जवाब मांगने पर डीएसओ ब्रिजेश शुक्ला ने आरटीआई वापिस लेने के लिए दबाव बनाया। जब युवक नहीं माना तो ब्रिजेश शुक्ला बतमीजी पर उतारु हो गए। इतना ही नहीं युवक के साथ गाली-गलौच करते हुए जाति-सूचक शब्दों का इस्तेमाल किया और झूठे केस में फसाने की धमकी दी।
ब्रिजेश शुक्ला भूल गए कि वे मुजफ्फरनगर में जिलापूर्ति अधिकारी है और एक जिम्मेदार अधिकारी है। इस मामले में युवक ने जिलाधिकारी, एसएसपी और मुख्यमंत्री को शिकायती पत्र देकर कार्रवाई की मांग की है।
इस मामले में जब जिलापूर्ति अधिकारी ब्रिजेश शुक्ला से बात करनी चाही तो उन्होंने साफ इनकार कर दिया और कहा कि मेरा कोई क्या बिगाड सकता है।
अब अधिकारी के ऐसे शब्दों को तानाशाही कहे या रौब इसका जबाव तो खुद अधिकारी के कारनामे बयान करते है। बहरहाल अब देखना होगा कि इस मामले में क्या कार्रवाई की जाती है या फिर जिलापूर्ति अधिकारी की तानाशाही यूं ही बरकरार रहेगी।

