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पन्नी कचरे पर किसान सड़कों पर उतरे: भोपा रोड Muzaffarnagar पर गाड़ियों की घेराबंदी, भाकियू अराजनैतिक का बड़ा पर्यावरणीय अल्टीमेटम

Muzaffarnagar एक बार फिर पर्यावरण और जनस्वास्थ्य से जुड़े गंभीर मुद्दे को लेकर चर्चा के केंद्र में आ गया है। plastic waste protest के तहत शनिवार तड़के भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) से जुड़े कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने जिले के भोपा रोड पर पन्नी कचरे से भरी भारी गाड़ियों को रोककर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।
किसानों का आरोप है कि जिले में संचालित कई पेपर उद्योग खुलेआम पन्नी, जूते-चप्पल और अन्य प्लास्टिक कचरे को फूंककर भीषण प्रदूषण फैला रहे हैं, जिसका असर केवल मुजफ्फरनगर तक सीमित नहीं बल्कि दिल्ली और एनसीआर के कई जिलों तक पहुंच चुका है।


सुबह-सुबह सड़कों पर मोर्चा, भोपा रोड बना आंदोलन का केंद्र

दिन निकलते ही पर्यावरण बचाने की मांग को लेकर किसान सड़कों पर उतर आए। जानसठ तहसील अध्यक्ष अंकित जावला के नेतृत्व में भाकियू अराजनैतिक के कार्यकर्ताओं ने भोपा रोड पर पहुंचकर पन्नी कचरे से लदी कई गाड़ियों को घेर लिया और वहीं धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया।
घटनास्थल पर देखते ही देखते बड़ी संख्या में किसान एकत्र हो गए, जिससे सड़क पर आवाजाही प्रभावित हुई। किसानों ने साफ शब्दों में कहा कि यह आंदोलन केवल प्रतीकात्मक नहीं है, बल्कि आने वाले समय में इसे और व्यापक रूप दिया जाएगा।

plastic waste protest के दौरान किसानों ने नारेबाजी करते हुए प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की और चेतावनी दी कि यदि अनदेखी की गई तो आंदोलन जिला स्तर से आगे बढ़ेगा।


पेपर मिलों पर गंभीर आरोप, प्लास्टिक जलाने से हवा-पानी जहरीला

किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि जनपद में संचालित कई पेपर मिलें नियमों को ताक पर रखकर प्लास्टिक, पन्नी, जूते-चप्पल जैसे अवशेषों को ईंधन के रूप में जला रही हैं।
उनका कहना है कि इस प्रक्रिया से निकलने वाला जहरीला धुआं—

  • हवा को विषैला बना रहा है

  • भूजल को प्रदूषित कर रहा है

  • ग्रामीण इलाकों में सांस और त्वचा से जुड़ी बीमारियां बढ़ा रहा है

  • दिल्ली-एनसीआर के पर्यावरण संकट को और गंभीर बना रहा है

किसानों ने दावा किया कि कई गांवों में पानी पीने लायक नहीं रह गया है और फसलों पर भी इसका सीधा असर दिखने लगा है। plastic waste protest इसी बढ़ते खतरे के खिलाफ जनआंदोलन का रूप ले रहा है।


प्रशासन और विभागीय अधिकारियों को किया फोन, मौके पर पहुंचे प्रदूषण अधिकारी

धरना प्रदर्शन के दौरान किसान यूनियन के पदाधिकारियों ने लगातार स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों के अधिकारियों से संपर्क साधा। घंटों चले दबाव के बाद प्रदूषण नियंत्रण विभाग के क्षेत्रीय अधिकारी मौके पर पहुंचे।
किसानों ने उन्हें क्षेत्र का दूषित हो चुका पानी दिखाया और बताया कि किस तरह प्लास्टिक जलाने से पर्यावरण संतुलन बिगड़ चुका है।

किसान नेताओं ने अधिकारियों से दो टूक कहा कि यदि इस मुद्दे पर केवल आश्वासन दिए गए और ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।


जिला कलेक्ट्रेट में ‘हवन-पूजन’ की चेतावनी, आंदोलन को मिलेगा धार्मिक-सांस्कृतिक रूप

भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक के पदाधिकारियों ने प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि पन्नी कचरे के परिवहन और उपयोग पर तत्काल रोक नहीं लगी, तो वे पन्नी कचरे से भरी गाड़ियों को जिला कलेक्ट्रेट ले जाकर हवन-पूजन करेंगे
किसानों का कहना है कि यह प्रतीकात्मक विरोध होगा, जो यह दर्शाएगा कि प्रशासनिक लापरवाही किस हद तक पहुंच चुकी है।

इस चेतावनी ने प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। plastic waste protest अब केवल सड़क तक सीमित न रहकर राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बनता जा रहा है।


पर्यावरण बनाम उद्योग, स्थानीय जनता भी किसानों के समर्थन में

भोपा रोड और आसपास के ग्रामीण इलाकों में स्थानीय लोगों ने भी किसानों के इस आंदोलन का समर्थन किया।
ग्रामीणों का कहना है कि—

  • बच्चों में सांस की बीमारी बढ़ रही है

  • पशुओं का पानी पीने से इंकार करना आम हो गया है

  • खेतों की मिट्टी की उर्वरता घट रही है

  • बदबू और धुएं से जीवन दूभर हो गया है

लोगों ने कहा कि प्रशासन और उद्योगों के बीच की चुप्पी का खामियाजा आम जनता भुगत रही है, और plastic waste protest ने उनकी आवाज को मंच दिया है।


भाकियू अराजनैतिक का स्पष्ट संदेश: पर्यावरण से समझौता नहीं

किसान यूनियन के नेताओं ने साफ कर दिया कि उनका संगठन किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं बल्कि पर्यावरण और जनस्वास्थ्य की रक्षा के लिए यह आंदोलन चला रहा है।
उन्होंने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो—

  • जिलेभर में चक्का जाम

  • तहसील स्तर पर प्रदर्शन

  • कलेक्ट्रेट घेराव

  • प्रदेश स्तर तक आंदोलन विस्तार

जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं।
plastic waste protest आने वाले दिनों में मुजफ्फरनगर की राजनीति और प्रशासनिक प्राथमिकताओं को सीधे चुनौती देता दिख रहा है।

मुजफ्फरनगर में पन्नी कचरे के खिलाफ शुरू हुआ यह आंदोलन अब केवल एक धरना नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की बड़ी चेतावनी बन चुका है। भोपा रोड से उठी यह आवाज आने वाले दिनों में जिला प्रशासन, प्रदूषण नियंत्रण विभाग और औद्योगिक इकाइयों की कार्यशैली पर सीधा दबाव बनाएगी। भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक हवा, पानी और जमीन को जहरीले कचरे से मुक्त नहीं किया जाता, तब तक यह संघर्ष रुकने वाला नहीं है।

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