France ने Madagascar को लौटाईं राजा टोएरा और साकालावा समुदाय की खोपड़ियां, औपनिवेशिक हिंसा पर उठे बड़े सवाल
France – Madagascar के बीच 128 साल पुराना इतिहास आखिरकार एक नए मोड़ पर पहुंचा। फ्रांस ने पहली बार मेडागास्कर को औपनिवेशिक दौर की तीन खोपड़ियां वापस कीं। इनमें से एक खोपड़ी मालागासी राजा टोएरा की मानी जाती है, जिन्हें 1897 में फ्रांसीसी सैनिकों ने मौत के घाट उतार दिया था। उस दौर में फ्रांसीसी साम्राज्यवाद ने न केवल जमीनें छीनीं, बल्कि संस्कृति और इंसानियत को भी लूट लिया।
फ्रांस ने इन खोपड़ियों को पेरिस के नेशनल हिस्ट्री म्यूजियम में एक ट्रॉफी की तरह रखा था। यही कारण है कि जब इन्हें मेडागास्कर लौटाया गया तो पूरे देश में भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा।
फ्रांस का ऐतिहासिक कदम: नया कानून और इंसानियत की जीत
2023 में फ्रांस ने एक नया कानून पारित किया था, जिसके तहत उपनिवेशों से लाए गए मानव अवशेषों को उनके मूल देशों को लौटाने की प्रक्रिया आसान हो गई। इसी कानून के तहत पहली बार मेडागास्कर को अपने पूर्वजों की खोपड़ियां वापस मिलीं।
फ्रांस की संस्कृति मंत्री रचिदा दाती ने इसे औपनिवेशिक हिंसा की एक बड़ी गलती बताया। उन्होंने कहा कि “खोपड़ियां सिर्फ हड्डियां नहीं हैं, ये इंसान की गरिमा का प्रतीक हैं। इन्हें ट्रॉफी की तरह रखना इतिहास की सबसे बड़ी शर्मिंदगी है।”
मेडागास्कर का भावनात्मक बयान: दिल का घाव भरने जैसा पल
मेडागास्कर की संस्कृति मंत्री वोलामिरांती डोना मारा ने इस मौके को ऐतिहासिक करार देते हुए कहा कि “पिछले 128 वर्षों से यह हमारे दिल में खुले घाव की तरह था। आज जब हमारे पूर्वजों की खोपड़ियां वापस लौट रही हैं, यह न सिर्फ हमारी परंपरा बल्कि आत्मा की भी जीत है।”
हालांकि वैज्ञानिक जांच ने साफ किया है कि इनमें से दो खोपड़ियां साकालावा समुदाय की हैं, लेकिन यह पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हो पाया कि तीसरी खोपड़ी वाकई राजा टोएरा की है या नहीं।
मैक्रों का औपनिवेशिक अत्याचारों पर माफी मांगना
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने 2017 में सत्ता संभालने के बाद से ही अफ्रीका और अन्य देशों में किए गए औपनिवेशिक अत्याचारों को स्वीकार करना शुरू किया। अप्रैल 2025 में मेडागास्कर की राजधानी एंटानानारिवो में उन्होंने खुलकर कहा था कि फ्रांस को अपने अतीत की गलतियों के लिए माफी मांगनी चाहिए।
यह कदम उसी दिशा में एक ठोस प्रयास माना जा रहा है।
1960 में मिली आजादी, लेकिन अब तक कायम रहा दर्द
मेडागास्कर 1960 में फ्रांस से आजाद हो गया था, लेकिन औपनिवेशिक शोषण की कहानियां और जख्म आज तक कायम रहे। देश के लिए यह खोपड़ियां सिर्फ हड्डियां नहीं बल्कि इतिहास, संस्कृति और सम्मान का हिस्सा हैं।
फ्रांस लंबे समय तक यह तर्क देता रहा कि ऐसे मामलों में संसद से अलग-अलग कानून पास करना जरूरी होता है, लेकिन 2023 का नया कानून इन प्रक्रियाओं को आसान बनाकर मानवीय संवेदनाओं को प्राथमिकता देता है।
दुनिया के अन्य देशों ने भी उठाई मांग
मेडागास्कर की तरह ऑस्ट्रेलिया और अर्जेंटीना जैसे देशों ने भी अपने पूर्वजों के अवशेष वापस मांगे हैं। दक्षिण अफ्रीका ने भी 2002 में “हॉटेन्टॉट वीनस” नाम की महिला के अवशेष मांगे थे, जिन्हें यूरोप में एक तमाशे की तरह प्रदर्शित किया जाता था।
यानी यह सिर्फ एक देश की जीत नहीं बल्कि पूरी मानवता की गरिमा को लौटाने की दिशा में उठाया गया कदम है।
फ्रांस के म्यूजियम और 30 हजार से ज्यादा अवशेष
फ्रांस के म्यूसी डे ल’होम म्यूजियम में आज भी 30 हजार से ज्यादा खोपड़ियां और कंकाल रखे हुए हैं। इनमें से अधिकांश अवशेष वे हैं जिन्हें फ्रांसीसी साम्राज्य ने अपने उपनिवेशों से जबरन लाकर संग्रहित कर लिया था।
2023 में फ्रांस ने नाजी काल के दौरान यहूदियों से छीनी गई कलाकृतियों को भी लौटाने का कानून बनाया था। इससे साफ है कि अब यूरोप को अपने पुराने पापों का बोझ उतारने के लिए ऐतिहासिक कदम उठाने ही होंगे।
औपनिवेशिक दौर की कहानी: संस्कृति से खिलवाड़ और इंसानियत का अपमान
इतिहास गवाह है कि साम्राज्यवादी ताकतों ने उपनिवेशों में सिर्फ शासन ही नहीं किया, बल्कि उनकी आत्मा तक को लूट लिया। राजा टोएरा की खोपड़ी को ट्रॉफी की तरह प्रदर्शित करना सिर्फ एक राजा का अपमान नहीं था, बल्कि पूरी सभ्यता और संस्कृति पर हमला था।
आज जब यह खोपड़ियां मेडागास्कर लौटाई जा रही हैं, तो यह कदम केवल इतिहास की गलती सुधारना ही नहीं बल्कि इंसानियत को नई दिशा देना भी है।

