Germany के क्रिसमस मार्केट में आतंक: 68 घायल, 2 की मौत, तालेब की कहानी से उठे नए सवाल
Germany के मेगडेबर्ग शहर में क्रिसमस मार्केट का रंगीन माहौल अचानक खून-खराबे में बदल गया जब एक दौड़ती कार ने भीड़भाड़ वाले इलाके में घुसकर लोगों को रौंद दिया। इस दर्दनाक घटना में 68 लोग गंभीर रूप से घायल हुए, जबकि दो लोगों की मौत हो गई। मृतकों में एक युवा और एक मासूम बच्चा शामिल है। इस हमले ने पूरे जर्मनी को झकझोर दिया है।
हमलावर कौन है?
हमले का जिम्मेदार 50 वर्षीय तालेब ए. नामक शख्स को गिरफ्तार कर लिया गया है। तालेब सऊदी अरब के होफुफ शहर का रहने वाला है। वह 2006 से जर्मनी में रह रहा था और 2016 में उसे शरणार्थी का दर्जा मिला। हालांकि, अब यह साफ हो चुका है कि तालेब का जर्मनी में एक विवादास्पद व्यक्तित्व है।
तालेब का बैकग्राउंड
तालेब पेशे से साइकाइट्री और साइकोथेरेपी कंसलटेंट है। जर्मनी में रहते हुए उसने पूर्व मुस्लिमों की मदद के लिए एक वेबसाइट भी शुरू की थी। वह अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी (AfD) पार्टी का समर्थक है, जो अपने दक्षिणपंथी रुख के लिए जानी जाती है।
तालेब पहले इस्लाम धर्म का अनुयायी था, लेकिन अब उसे इस्लाम का कट्टर आलोचक माना जाता है। उसके विचारों और गतिविधियों ने उसे मुस्लिम समुदाय के साथ-साथ जर्मनी के कई संगठनों के निशाने पर ला दिया।
सऊदी अरब से भागने की कहानी
1974 में सऊदी अरब के होफुफ शहर में जन्मे तालेब ने नास्तिक विचारधारा को अपनाया। सऊदी अरब जैसे कट्टरपंथी देश में नास्तिकता के लिए कोई जगह नहीं है। वहां अपनी जान बचाने के लिए उसने जर्मनी का रुख किया।
जर्मनी पहुंचकर उसने मिडिल ईस्ट से आए पूर्व मुस्लिमों के लिए एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तैयार किया। इसका उद्देश्य उन लोगों को मदद देना था जो इस्लाम छोड़कर अलग जीवन जीना चाहते थे। लेकिन तालेब की इस पहल को कट्टरपंथी मुस्लिम संगठनों ने नापसंद किया।
आरोप और विवाद
तालेब पर सऊदी अरब में आतंकवाद और लड़कियों की तस्करी के गंभीर आरोप हैं। इन आरोपों ने जर्मनी की सरकार को तालेब के भविष्य पर विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है।
सऊदी अरब ने तालेब को प्रत्यर्पित करने की मांग की है, लेकिन जर्मनी सरकार ने अभी तक इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। तालेब को जर्मनी में परमानेंट रेजिडेंट परमिट प्राप्त है।
घटना का विश्लेषण
हमले के समय तालेब ने क्रिसमस मार्केट के भीड़भाड़ वाले इलाके को निशाना बनाया। पुलिस के मुताबिक, यह हमला योजनाबद्ध था। घटना के बाद पूरे जर्मनी में क्रिसमस मार्केट की सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
सवाल जो जवाब मांगते हैं
- तालेब का मकसद क्या था?
क्या यह हमला व्यक्तिगत नाराजगी का नतीजा था, या इसके पीछे कोई बड़ा षड्यंत्र है? - जर्मनी सरकार की भूमिका:
जर्मनी ने तालेब को शरणार्थी का दर्जा दिया था। क्या सरकार को उसके अतीत के बारे में जानकारी नहीं थी? - सऊदी अरब का रुख:
सऊदी अरब ने तालेब पर आतंकवाद के आरोप लगाए हैं। अगर यह आरोप सही हैं, तो क्या जर्मनी उसे सऊदी को सौंपेगा?
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित किया है। यूरोप में बढ़ती शरणार्थी नीति की आलोचना और सुरक्षा चिंताओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
समाप्त नहीं हुआ खतरा
यह हमला जर्मनी की शरणार्थी नीति और सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। क्या जर्मनी भविष्य में ऐसे खतरों को रोक पाएगा? यह समय है कि जर्मनी और अन्य यूरोपीय देश अपनी नीतियों पर दोबारा विचार करें।

