India-Russia Oil Trade पर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प का बयान: भारत रूस से तेल खरीदने पर कर रहा है कटौती, लेकिन नहीं पूरी तरह रोक पा रहा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर India-Russia Oil Trade के बारे में बड़ा बयान दिया है। बुधवार रात, नाटो चीफ मार्क रूट से मुलाकात के दौरान प्रेस को संबोधित करते हुए, ट्रम्प ने कहा कि भारत अब धीरे-धीरे रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा और साल के अंत तक इसे लगभग पूरी तरह से खत्म कर देगा। उन्होंने कहा कि इस संबंध में खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें यह आश्वासन दिया है।
भारत और रूस के बीच तेल व्यापार पर ट्रम्प का बयान
व्हाइट हाउस में प्रेस से बात करते हुए, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बताया कि “भारत के लिए यह एक ऐसा मुद्दा है जिसे तुरंत हल करना संभव नहीं है, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने मुझे भरोसा दिया है कि साल के अंत तक भारत रूस से तेल की खरीद लगभग खत्म कर देगा।” उन्होंने यह भी कहा कि “कल ही प्रधानमंत्री मोदी से इस मुद्दे पर मेरी बातचीत हुई थी, और यह एक बहुत बड़ा कदम है।” ट्रम्प ने बताया कि भारत पहले लगभग 40% तेल रूस से खरीदता था, जो अब घटकर शून्य पर पहुंच जाएगा।
यह बयान पिछले कुछ हफ्तों में ट्रम्प द्वारा रूस से तेल खरीद पर दिए गए चौथे बयान के रूप में सामने आया है। 15 अक्टूबर को ट्रम्प ने कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें आश्वासन दिया था कि भारत अब रूस से तेल नहीं खरीदेगा। 17 अक्टूबर को उन्होंने फिर से यह बयान दोहराया कि भारत रूस से तेल खरीदने में कटौती कर रहा है।
ट्रम्प का कहना है कि ओबामा-बाइडेन के कारण भारत और चीन करीब आए
रूस और चीन के रिश्तों पर टिप्पणी करते हुए, ट्रम्प ने कहा कि “रूस और चीन के बीच रिश्ते ऐतिहासिक रूप से कभी अच्छे नहीं रहे, लेकिन ओबामा और बाइडेन की नीतियों के कारण अब दोनों देश एक-दूसरे के करीब आ गए हैं।” ट्रम्प के अनुसार, यह बेहद चिंताजनक है कि दोनों देशों के बीच इतना करीबी बढ़ा है, जो सुरक्षा और वैश्विक राजनीति के दृष्टिकोण से खतरनाक हो सकता है।
भारत पर प्रतिबंध का मकसद रूस पर दबाव बनाना
अमेरिका द्वारा रूस पर दबाव डालने के प्रयासों का हिस्सा बनते हुए, भारत पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए गए हैं। ट्रम्प का मानना है कि रूस से तेल खरीदने से मिलने वाला पैसा रूस को यूक्रेन के खिलाफ युद्ध जारी रखने के लिए मदद करता है। कई बार उन्होंने यह कहा कि भारत को रूस से तेल खरीदने की बजाय अन्य विकल्पों पर विचार करना चाहिए।
भारत पर दबाव बनाने के लिए ट्रम्प प्रशासन ने रूस से तेल खरीदने पर भारत के खिलाफ 50 से ज्यादा टैरिफ लगाए हैं, जिसमें 25% रेसीप्रोकल और 25% पैनल्टी शामिल हैं। व्हाइट हाउस प्रेस सचिव केरोलिना लेविट ने बताया कि इन प्रतिबंधों का मुख्य उद्देश्य रूस पर दबाव बनाना है, ताकि वह यूक्रेन से जंग खत्म करने पर मजबूर हो सके।
रूस से सस्ता तेल खरीदने का भारत का कदम
रूस से सस्ता तेल खरीदने की शुरुआत फरवरी 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद हुई, जब यूरोप ने रूस के तेल पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बाद, रूस ने अपनी तेल सप्लाई को एशिया की ओर मोड़ा, और भारत ने इस मौके का लाभ उठाया। 2021 में भारत ने रूस से केवल 0.2% तेल खरीदा था, जबकि 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 37% तक पहुंच गया है।
भारत के लिए रूस से तेल खरीदने के फायदे
भारत के लिए रूस से तेल खरीदने के कई फायदे हैं, जिनमें प्रमुख हैं:
सस्ता तेल: रूस भारत को अन्य देशों की तुलना में सस्ता तेल प्रदान कर रहा है। हालांकि, पहले 30 डॉलर प्रति बैरल तक का डिस्काउंट अब घटकर 3-6 डॉलर प्रति बैरल रह गया है, फिर भी यह दूसरे देशों से सस्ता है।
लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्ट्स: भारत की निजी कंपनियों, जैसे रिलायंस इंडस्ट्रीज ने रूस के साथ लंबे समय के लिए तेल खरीदने के अनुबंध किए हैं। उदाहरण के लिए, रिलायंस ने दिसंबर 2024 में रूस के साथ 10 साल के लिए हर रोज 5 लाख बैरल तेल खरीदने का कॉन्ट्रैक्ट किया था।
वैश्विक तेल कीमतों पर असर: भारत का रूस से तेल आयात वैश्विक तेल कीमतों को स्थिर रखने में मदद करता है। यदि भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर देता है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति में कमी हो सकती है, जिससे कीमतें बढ़ सकती हैं।
रूस के अलावा भारत के पास कौन से विकल्प हैं?
भारत अपनी तेल जरूरतों का 80% से अधिक आयात करता है, और रूस के अलावा वह अन्य देशों से भी तेल खरीदता है। रूस के अलावा, भारत प्रमुख रूप से इराक, सऊदी अरब और अमेरिका से तेल खरीदता है।
इराक: भारत का दूसरा सबसे बड़ा तेल सप्लायर इराक है, जो भारत के कुल तेल आयात का 21% प्रदान करता है।
सऊदी अरब: सऊदी अरब, जो भारत का तीसरा सबसे बड़ा तेल सप्लायर है, भारत को रोजाना 7 लाख बैरल तेल प्रदान करता है।
अमेरिका: अमेरिका से भी भारत का तेल आयात बढ़ा है, जो अब भारत के तेल आयात का 7% हिस्सा बन चुका है।
दक्षिण अफ्रीकी देश: नाइजीरिया और अन्य दक्षिण अफ्रीकी देशों से भी भारत तेल खरीदता है।
भारत-रूस संबंधों का भविष्य और वैश्विक तेल बाजार
भारत के रूस से तेल खरीदने का भविष्य बहुत कुछ अमेरिकी दबाव और वैश्विक तेल बाजार की स्थितियों पर निर्भर करेगा। अगर भारत रूस से तेल खरीदने पर मजबूर होता है, तो उसे अपनी तेल आपूर्ति को अन्य देशों से बढ़ाना होगा, जैसे कि इराक, सऊदी अरब और अमेरिका।
भारत के तेल आयात में इस बदलाव से वैश्विक तेल बाजार में हलचल मच सकती है, क्योंकि रूस अब भारत के सबसे बड़े तेल आपूर्तिकर्ता के रूप में उभरा है। हालांकि, भारत के पास रूस के अलावा अन्य विकल्प भी हैं, जो उसकी तेल जरूरतों को पूरा करने में सहायक हो सकते हैं।
भारत को रूस से तेल खरीदने की रणनीति बदलने के बावजूद, इसके लिए अब भी कई आर्थिक, राजनैतिक और व्यापारिक पहलू जुड़े हुए हैं। रूस से सस्ता तेल भारत के लिए एक अहम विकल्प बना हुआ है, और इसके बदले में भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक तेल आपूर्ति स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए अन्य देशों से आपूर्ति को बढ़ाना होगा।
भारत की तेल खरीद नीति को लेकर अमेरिकी दबाव और रूस से तेल आयात में कमी लाने की प्रक्रिया में दोनों देशों के रिश्तों में एक नई दिशा देखने को मिल सकती है। यह आर्थिक और कूटनीतिक बदलाव भारतीय राजनीति और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर बड़ा असर डाल सकते हैं।

