सरकारी सौदे से चमका Intel: अमेरिकी सरकार ने खरीदी 10% हिस्सेदारी, शेयर उछलकर $25 के पार
अमेरिकी टेक सेक्टर में हलचल मच गई जब अमेरिकी सरकार ने Intel में 10% हिस्सेदारी लेने का ऐलान किया। यह सौदा न केवल इंटेल के लिए राहत की खबर है बल्कि पूरे सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए ऐतिहासिक माना जा रहा है। इसके तहत सरकार कंपनी को करीब 8 बिलियन डॉलर (₹68,100 करोड़) की भारी-भरकम सब्सिडी देगी। इस घोषणा के बाद बाजार में इंटेल के शेयरों ने जोरदार उछाल लिया और कारोबार के दौरान 7% बढ़कर 25 डॉलर के पार पहुंच गया।
अमेरिका के कॉमर्स सेक्रेटरी हॉवर्ड लुटनिक ने इस डील की पुष्टि करते हुए कहा कि इस समझौते से अमेरिका की तकनीकी सुरक्षा और आर्थिक विकास को नया बल मिलेगा।
कॉमर्स सेक्रेटरी का बयान – “अमेरिकी टेक सेक्टर को नई उड़ान”
हॉवर्ड लुटनिक ने X (पहले ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा:
“बड़ी खबर – अमेरिकी सरकार अब इंटेल जैसी महान टेक कंपनी की 10% मालिक है। यह ऐतिहासिक समझौता सेमीकंडक्टर सेक्टर में अमेरिकी नेतृत्व को और मजबूत करेगा। इससे हमारी अर्थव्यवस्था को नई ग्रोथ मिलेगी और टेक सेक्टर को सुरक्षा।”
उन्होंने इंटेल के CEO को धन्यवाद देते हुए कहा कि इस साझेदारी से अमेरिका का भविष्य और अधिक तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर होगा।
ट्रम्प का बयान – “CEO नौकरी बचाने आए थे, लेकिन 10 बिलियन डॉलर दे गए”
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस सौदे पर चुटकी लेते हुए कहा कि इंटेल के CEO लिप-बू टैन हाल ही में उनसे मुलाकात करने आए थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रम्प ने CEO को चीन से कथित संबंधों के चलते इस्तीफा देने के लिए कहा था। लेकिन सौदे के बाद उन्होंने तंज कसते हुए कहा –
“CEO अपनी नौकरी बचाने आए थे, लेकिन 10 बिलियन डॉलर दे गए। यह हमारे लिए शानदार डील है।”
ट्रम्प प्रशासन इस हिस्सेदारी को राष्ट्रीय सुरक्षा, चिप मैन्युफैक्चरिंग और अमेरिकी रोजगार से जोड़कर देख रहा है।
क्यों जरूरी थी इंटेल में सरकारी हिस्सेदारी?
इंटेल अमेरिका की इकलौती ऐसी कंपनी है जो सबसे तेज और आधुनिक चिप्स बनाने की क्षमता रखती है। लेकिन हाल के वर्षों में इंटेल AI चिप्स मार्केट में NVIDIA और AMD जैसी कंपनियों से पिछड़ गई है।
साथ ही, ओहायो में बन रही इंटेल की बड़ी सेमीकंडक्टर फैक्ट्री लगातार देरी का शिकार हो रही थी। यह प्रोजेक्ट ट्रम्प प्रशासन के लिए बेहद अहम है क्योंकि यह न केवल आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि इसे अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जोड़ा गया है।
CHIPS एक्ट और सब्सिडी का खेल
यह सौदा अमेरिका के 2022 के CHIPS एक्ट के तहत किया गया है। इस एक्ट के जरिए सरकार सेमीकंडक्टर उत्पादन को अमेरिका के भीतर बढ़ावा देने के लिए कंपनियों को प्रोत्साहित कर रही है।
इंटेल को पहले ही 7.8 बिलियन डॉलर (₹68,100 करोड़) की सब्सिडी मंजूर हो चुकी है।
इसमें से 2.2 बिलियन डॉलर (₹19,200 करोड़) पहले ही जारी किए जा चुके हैं।
अब बाकी बचे 5.7 बिलियन डॉलर (₹49,764 करोड़) को सरकार इंटेल के शेयरों में निवेश कर रही है।
यह समझौता इंटेल को आर्थिक रूप से और मजबूत करेगा और अमेरिका को सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में चीन पर निर्भरता कम करने में मदद करेगा।
शेयर मार्केट में जबरदस्त उछाल
सरकारी हिस्सेदारी की खबर फैलते ही बाजार ने जोरदार प्रतिक्रिया दी। कारोबार के दौरान इंटेल का शेयर 7% उछलकर $25 से ऊपर चला गया। हालांकि बंद होते समय इसमें थोड़ी गिरावट आई और यह 5.53% ऊपर $24.80 पर बंद हुआ।
पिछले 6 महीने में इंटेल का शेयर 2.18% चढ़ा है।
एक साल में इसमें 20.74% की तेजी आई है।
हालांकि, पिछले 5 साल में कंपनी का शेयर लगभग 49.68% गिरा है।
कंपनी का मौजूदा मार्केट कैप 10.85 हजार डॉलर (करीब ₹9,47,269 करोड़) है।
सेमीकंडक्टर युद्ध में इंटेल की वापसी?
वैश्विक स्तर पर सेमीकंडक्टर उद्योग पर चीन और ताइवान की कंपनियों का दबदबा है। NVIDIA, AMD और TSMC जैसी कंपनियां इस क्षेत्र में इंटेल को पीछे छोड़ चुकी हैं।
लेकिन इस सरकारी हिस्सेदारी से इंटेल को बड़ा बूस्ट मिलेगा। विश्लेषकों का मानना है कि Intel Share News आने वाले समय में सेमीकंडक्टर उद्योग में इंटेल को नई पहचान दिला सकता है।
निवेशकों और बाजार पर असर
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार की हिस्सेदारी से कंपनी में भरोसा बढ़ेगा। इससे न केवल निवेशकों को सुरक्षा की भावना मिलेगी बल्कि भविष्य में कंपनी का वैल्यूएशन भी सुधरेगा।
ट्रेडर्स का मानना है कि यह डील इंटेल के शेयर को शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म दोनों में फायदा पहुंचा सकती है।

