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Iran Protest Inflation Crisis: महंगाई से उबलता ईरान, 100 से ज्यादा शहरों में सड़कों पर जनता, ‘शाह पहलवी लौटेंगे’ के नारे, 45 मौतें

Iran inflation protests ने पश्चिम एशिया की राजनीति और वैश्विक कूटनीति में भूचाल ला दिया है। 28 दिसंबर से शुरू हुए विरोध प्रदर्शन अब एक संगठित जनआंदोलन का रूप ले चुके हैं। बीते 10 दिनों में हालात इस कदर बिगड़ गए हैं कि गुरुवार रात तक ईरान के 100 से ज्यादा शहरों में लोग सड़कों पर उतर आए। महंगाई, बेरोजगारी, मुद्रा गिरावट और सख्त धार्मिक शासन के खिलाफ उठी यह आवाज अब सिर्फ आर्थिक विरोध नहीं, बल्कि सत्ता परिवर्तन की मांग में बदलती दिख रही है।


🔴 100 से अधिक शहरों में भड़का जनआक्रोश

गुरुवार को तेहरान, मशहद, इस्फहान, तबरीज, शिराज समेत देशभर के बड़े और मध्यम शहरों में भारी प्रदर्शन देखने को मिले। लोग सड़कों पर उतरकर सरकार विरोधी नारे लगा रहे थे। कई जगहों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़पें हुईं, पत्थरबाजी हुई और सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया।

प्रदर्शनकारियों के नारों में सबसे ज्यादा गूंज रहा नारा था—
“यह आखिरी लड़ाई है, शाह पहलवी लौटेंगे”

यह नारा साफ संकेत देता है कि Iran inflation protests अब केवल महंगाई तक सीमित नहीं रहे।


🔴 इंटरनेट और फोन सेवाएं ठप, देश लगभग ‘डिजिटल लॉकडाउन’ में

सरकार ने हालात काबू में रखने के लिए देशभर में इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं बंद कर दी हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर रोक लगा दी गई है, जिससे सूचना प्रवाह लगभग ठप हो गया है। विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम सरकार की घबराहट को दर्शाता है, क्योंकि पहले भी ऐसे कदम जनआक्रोश को और भड़काते रहे हैं।


🔴 हिंसा में 45 मौतें, 2,270 से ज्यादा गिरफ्तार

अमेरिकी ह्यूमन राइट एजेंसी के मुताबिक Iran inflation protests के दौरान हुई हिंसा में अब तक कम से कम 45 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं 2,270 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है।

ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी फार्स ने पुष्टि की है कि तेहरान में हालात नियंत्रित करने के दौरान एक पुलिस अधिकारी की चाकू मारकर हत्या कर दी गई। यह घटना दर्शाती है कि हालात कितने विस्फोटक हो चुके हैं।


🔴 मशहद में राष्ट्रीय झंडा फाड़ा गया, प्रतीकात्मक विद्रोह

देश के दूसरे सबसे बड़े शहर मशहद में प्रदर्शनकारियों द्वारा राष्ट्रीय झंडा फाड़ने की घटना ने शासन के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। इसे सिर्फ गुस्से का इज़हार नहीं, बल्कि इस्लामिक गणराज्य के प्रतीकों को खुली चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।


🔴 रेजा पहलवी की अपील से तेज हुआ आंदोलन

Iran inflation protests को नई ऊर्जा तब मिली, जब देश के निर्वासित युवराज रेजा पहलवी ने ईरानियों से सड़कों पर उतरने की अपील की। रेजा पहलवी, ईरान के अंतिम शाह मोहम्मद रजा पहलवी के पुत्र हैं, जिन्हें 1979 की इस्लामिक क्रांति में सत्ता से बेदखल कर दिया गया था।

रेजा पहलवी फिलहाल अमेरिका में रहते हैं और खुद को ईरान के लिए एक धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक विकल्प के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं।


🔴 ट्रम्प की धमकी से अंतरराष्ट्रीय तनाव बढ़ा

इस उथल-पुथल के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को खुली चेतावनी दी है। ट्रम्प ने कहा कि यदि ईरानी सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर हिंसा बढ़ाई, तो अमेरिका ईरान पर सैन्य कार्रवाई कर सकता है।

उनका बयान पश्चिम एशिया में पहले से ही अस्थिर हालात को और संवेदनशील बना रहा है।


🔴 Gen Z का गुस्सा, आर्थिक बदहाली बनी चिंगारी

Iran inflation protests की अगुवाई कर रही पीढ़ी Gen Z मानी जा रही है। दिसंबर 2025 में ईरानी मुद्रा रियाल गिरकर लगभग 1.45 मिलियन प्रति अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गई, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है।

साल की शुरुआत से रियाल की कीमत लगभग 50% तक गिर चुकी है।

  • खाद्य वस्तुओं की कीमतों में 72% वृद्धि

  • दवाओं की कीमतों में 50% तक उछाल

इन आंकड़ों ने आम ईरानी की कमर तोड़ दी है।


🔴 2026 बजट और 62% टैक्स बढ़ोतरी ने भड़काया आक्रोश

सरकार द्वारा 2026 के बजट में प्रस्तावित 62% टैक्स वृद्धि ने आग में घी डालने का काम किया। मध्यम वर्ग और युवा वर्ग इसे अपने भविष्य पर सीधा हमला मान रहे हैं।


🔴 इस्लामिक क्रांति से अब तक सत्ता का सफर

1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद अयातुल्ला रूहोल्लाह खुमैनी ने मौलाना शासन की नींव रखी। 1989 में उनके बाद अयातुल्ला अली खामेनेई सत्ता में आए और बीते 37 वर्षों से वही सर्वोच्च नेता हैं।


🔴 47 साल बाद फिर ‘क्राउन प्रिंस’ की मांग क्यों

करीब पांच दशक बाद जनता का एक बड़ा वर्ग मौजूदा शासन से मोहभंग महसूस कर रहा है। 65 वर्षीय रेजा पहलवी को सत्ता सौंपने की मांग इसी असंतोष का परिणाम है। प्रदर्शनकारियों का मानना है कि पहलवी की वापसी से—

  • आर्थिक स्थिरता

  • अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता

  • व्यक्तिगत स्वतंत्रता

फिर से संभव हो सकती है।


🔴 तेल पर निर्भर अर्थव्यवस्था और बढ़ता घाटा

ईरान की अर्थव्यवस्था भारी रूप से तेल निर्यात पर निर्भर है।

  • 2024 में कुल निर्यात: 22.18 बिलियन डॉलर

  • आयात: 34.65 बिलियन डॉलर

  • व्यापार घाटा: 12.47 बिलियन डॉलर

2025 में यह घाटा बढ़कर 15 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया। ईरान अपने 90% तेल निर्यात चीन को करता है।


🔴 प्रतिबंध और परमाणु समझौते की अनिश्चितता

INSTC कॉरिडोर और यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन जैसे विकल्पों के बावजूद, प्रतिबंध हटे बिना और परमाणु समझौते की बहाली के बिना ईरान की अर्थव्यवस्था को संभालना बेहद मुश्किल माना जा रहा है। 2025 में जीडीपी वृद्धि केवल 0.3% रहने का अनुमान है।


ईरान में महंगाई के खिलाफ उभरा यह जनआंदोलन अब केवल आर्थिक विरोध नहीं रहा। 100 से ज्यादा शहरों में फैली आग, Gen Z का गुस्सा, सत्ता परिवर्तन की मांग और अंतरराष्ट्रीय दबाव—ये सभी संकेत दे रहे हैं कि ईरान एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है, जहां आने वाले दिन पूरे मध्य पूर्व की दिशा तय कर सकते हैं।

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