Iran-Israel conflict: युद्ध की आहट और मिसाइल हमलों की आशंका
Iran-Israel conflict इजरायल और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। हाल के दिनों में यह तनाव अपने चरम पर पहुंच चुका है, जहां ईरान को इजरायल द्वारा संभावित मिसाइल हमले का खतरा महसूस हो रहा है। इस चिंता को देखते हुए, ईरान ने अपनी राजधानी तेहरान से उड़ने वाली सभी फ्लाइट्स को रद्द कर दिया है और सुरक्षा तैयारियों को और मजबूत कर लिया है। इजरायल के हमले की आशंका के बीच, ईरान ने मिसाइलों को तैनात कर दिया है ताकि किसी भी संभावित आक्रमण का जवाब तुरंत दिया जा सके।
7 अक्टूबर की तिथि का डर: हमास के हमले की बरसी
माना जा रहा है कि 7 अक्टूबर को इजरायल पर हुए हमास के हमले की पहली बरसी है। इस महत्वपूर्ण दिन को लेकर ईरान को शक है कि इजरायल उस पर हमला कर सकता है। यह दिन इसलिए भी अहम है क्योंकि पिछले साल इसी दिन हमास ने इजरायल पर बड़ा हमला किया था, जिसके बाद दोनों देशों के बीच संबंधों में और तनाव बढ़ गया था। ऐसी परिस्थिति में, ईरान को लग रहा है कि इजरायल उसकी सैन्य ठिकानों, तेल रिफाइनरियों, परमाणु संयंत्रों और एयरबेस को निशाना बना सकता है।
ईरान की सुरक्षा तैयारियां: मिसाइलें तैनात और फ्लाइट्स रद्द
अल अरबिया न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान की सरकारी मीडिया ने बताया कि रविवार रात 9 बजे से सोमवार सुबह 6 बजे तक तेहरान से उड़ान भरने वाली सभी फ्लाइट्स रद्द रहेंगी। इस बीच, ईरान ने अपनी सुरक्षा तैयारियों को बढ़ाते हुए देश भर में मिसाइलें तैनात कर दी हैं और अपने लड़ाकू विमानों को भी पूरी तरह से अलर्ट पर रखा है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने भी इजरायल को चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर इजरायल हमला करता है, तो ईरान जवाबी हमला करने में पीछे नहीं हटेगा। खामेनेई ने कहा, “अगर हमें मजबूर किया गया, तो हम फिर से इजरायल पर हमला करेंगे।”
इजरायल का सख्त संदेश: ‘महंगी पड़ेगी गलती’
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान को स्पष्ट रूप से चेतावनी दी है। नेतन्याहू ने कहा कि अगर ईरान ने हमला किया तो वह इसकी भारी कीमत चुकाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि इजरायल ईरान को ऐसा घाव देगा जिसे वह जीवनभर नहीं भूल पाएगा। इजरायली सेना के अनुसार, उन्होंने अब तक जमीन और हवा से करीब 440 हिज़्बुल्लाह लड़ाकों को मार गिराया है। यह भी माना जा रहा है कि आने वाले समय में इजरायल और भी आक्रामक कदम उठा सकता है।
ईरान का आक्रामक रुख: ‘भयानक जवाब देंगे’
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर इजरायल ने हमला किया, तो ईरान का जवाब बेहद घातक और भयानक होगा। उन्होंने कहा, “हम इजरायल को उसी की भाषा में जवाब देंगे।” ईरान की यह प्रतिक्रिया उसके बढ़ते आत्मविश्वास और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। ईरान की ओर से यह बयान यह संकेत देता है कि वह किसी भी प्रकार के हमले का माकूल जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।
क्षेत्रीय तनाव और युद्ध की संभावना
ईरान और इजरायल के बीच यह तनाव सिर्फ दो देशों के बीच का मामला नहीं है। इसका असर पूरे मिडिल ईस्ट क्षेत्र पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर दोनों देशों के बीच युद्ध की स्थिति उत्पन्न होती है, तो इसका सीधा प्रभाव तेल उत्पादन और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। इसके साथ ही, यह भी देखा जा सकता है कि कई और देश इस विवाद में अपनी भूमिका निभाने के लिए आगे आएंगे, जिससे क्षेत्रीय संघर्ष और भी जटिल हो सकता है।
इजरायल के संभावित हमले के लक्ष्य
जानकारों का कहना है कि अगर इजरायल हमला करता है, तो उसके संभावित निशाने ईरान की तेल रिफाइनरियां, तेल के कुएं, परमाणु संयंत्र, और मिलिट्री हेडक्वार्टर होंगे। इजरायल की सेना ने पहले भी दिखाया है कि वह अपने दुश्मनों पर आक्रमण करने में देर नहीं करती और उसकी रणनीति आक्रामक होती है। इस स्थिति में, ईरान की सेना भी पूरी तरह से तैयार है और किसी भी हमले का जवाब देने के लिए तत्पर है।
वैश्विक प्रतिक्रियाएं: क्या अंतरराष्ट्रीय समुदाय कर सकता है हस्तक्षेप?
ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते इस तनाव पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी नजर बनाए हुए है। संयुक्त राष्ट्र और बड़ी वैश्विक शक्तियां इस स्थिति को सुलझाने की कोशिश कर रही हैं ताकि मिडिल ईस्ट में शांति बनी रहे। हालांकि, अमेरिका, रूस और चीन जैसे देशों की भूमिका इस संघर्ष में बेहद अहम हो सकती है। अमेरिका जहां इजरायल का समर्थन करता है, वहीं रूस और चीन ने समय-समय पर ईरान के साथ अपने संबंधों को मजबूत किया है। इस स्थिति में, यह देखना दिलचस्प होगा कि इन बड़े देशों की कूटनीति इस तनाव को कम करने में किस हद तक सफल होती है।
हालात की नाजुकता और आने वाले दिन
इस समय, ईरान और इजरायल के बीच जो स्थिति बनी हुई है, वह बेहद नाजुक है। आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि दोनों देश क्या कदम उठाते हैं और क्या कोई सैन्य संघर्ष होता है या फिर कूटनीतिक रास्तों के जरिए इसे सुलझाने की कोशिश की जाती है। क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी इस पर ध्यान देने की जरूरत है, क्योंकि एक छोटी सी चिंगारी भी पूरे मिडिल ईस्ट को युद्ध की आग में झोंक सकती है।
ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने मिडिल ईस्ट में स्थिति को बेहद संवेदनशील बना दिया है। दोनों देशों के बीच किसी भी समय सैन्य संघर्ष शुरू हो सकता है, जिसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। मिसाइलें तैनात करने और लड़ाकू विमानों को अलर्ट पर रखने जैसी गतिविधियां इस बात की ओर इशारा करती हैं कि युद्ध की आशंका वास्तविक है। ऐसे में यह देखना होगा कि क्या कूटनीति काम आएगी या फिर यह तनाव युद्ध में तब्दील हो जाएगा।

