ISRO का नया अध्याय: PROBA-3 सैटेलाइट लॉन्चिंग में देरी, जानिए सूर्य के रहस्यों की खोज का सफर
नई दिल्ली: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अपने महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष मिशन PROBA-3 सैटेलाइट की लॉन्चिंग को निर्धारित समय से कुछ घंटे पहले टाल दिया है। इस मिशन को PSLV-C59 रॉकेट के माध्यम से लॉन्च किया जाना था, लेकिन तकनीकी खामी के चलते इसे स्थगित कर दिया गया। अब यह प्रक्षेपण गुरुवार, 5 दिसंबर, शाम 4:12 बजे के लिए पुनः निर्धारित किया गया है।
लॉन्चिंग में क्यों हुई देरी?
ISRO ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर जानकारी दी कि PROBA-3 अंतरिक्ष यान में एक तकनीकी गड़बड़ी का पता चलने के कारण प्रक्षेपण को रोका गया। इसरो के वैज्ञानिकों ने इसे एक “सावधानीपूर्वक निर्णय” बताते हुए कहा कि मिशन की सफलता सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकता है।
PROBA-3 को अपनी सटीकता और तकनीकी नवाचार के लिए जाना जाता है। यह पहली बार है जब अंतरिक्ष में प्रेसिशन फॉर्मेशन फ्लाइंग तकनीक का परीक्षण किया जाएगा। इस मिशन के तहत दो सैटेलाइट, Occulter और Coronagraph, को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। ये दोनों सैटेलाइट सूर्य के धुंधले कोरोना (Corona) का अध्ययन करेंगे, जिससे वैज्ञानिकों को सूर्य के व्यवहार और उसके प्रभावों को समझने में मदद मिलेगी।
PROBA-3: क्या है इसकी खासियत?
PROBA-3 दुनिया का पहला प्रेसिशन फॉर्मेशन फ्लाइंग सैटेलाइट है। इसका मतलब है कि यह मिशन दो अलग-अलग सैटेलाइट्स का उपयोग करेगा, जो अंतरिक्ष में एक-दूसरे के सापेक्ष सटीक स्थिति बनाए रखेंगे।
- सैटेलाइट्स का डिजाइन:
- पहला सैटेलाइट, Occulter, 200 किलोग्राम का है और इसे सूर्य के तेज प्रकाश को ब्लॉक करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
- दूसरा सैटेलाइट, Coronagraph, 340 किलोग्राम का है और यह सूर्य के धुंधले कोरोना का अध्ययन करेगा।
- कैसे काम करेगा मिशन?
लॉन्चिंग के बाद, दोनों सैटेलाइट्स अलग हो जाएंगे लेकिन बाद में इन्हें एक सटीक पोजिशन में लाया जाएगा। इनका मुख्य काम सौर कोरोनाग्राफ बनाना है, जो सूर्य के बाहरी वातावरण (कोरोना) का विश्लेषण करेगा। यह अंतरिक्ष विज्ञान में एक क्रांतिकारी कदम है।
यूरोपीय देशों की साझेदारी
PROBA-3 एक अंतरराष्ट्रीय साझेदारी परियोजना है, जिसमें कई यूरोपीय देश शामिल हैं। इस मिशन में स्पेन, पोलैंड, बेल्जियम, इटली और स्विट्जरलैंड जैसे देश सहयोग कर रहे हैं।
- मिशन की लागत: यह परियोजना 200 मिलियन यूरो (करीब 1,700 करोड़ रुपये) की लागत से तैयार की गई है।
- मिशन की अवधि: मिशन की समय सीमा दो साल है, जिसके दौरान यह महत्वपूर्ण डेटा एकत्र करेगा।
सौर विज्ञान में क्रांति
सूर्य के कोरोना का अध्ययन करना हमेशा से वैज्ञानिकों के लिए एक चुनौतीपूर्ण कार्य रहा है। कोरोना सूर्य का बाहरी वातावरण है, जो सौर गतिविधियों जैसे सोलर फ्लेयर्स और कोरोनल मास इजेक्शन (CMEs) को नियंत्रित करता है। ये गतिविधियां पृथ्वी पर जलवायु, संचार और ऊर्जा प्रणालियों को प्रभावित करती हैं। PROBA-3 के माध्यम से, वैज्ञानिकों को इन रहस्यों को सुलझाने में मदद मिलेगी।
- सटीकता का परीक्षण:
PROBA-3 के सैटेलाइट्स 150 मीटर की दूरी पर एक-दूसरे के साथ एक सटीक स्थिति बनाए रखेंगे। यह तकनीक आने वाले मिशनों में उपयोगी साबित हो सकती है, खासकर इंटरप्लेनेटरी मिशन में। - सूर्य के अध्ययन में उन्नति:
सूर्य के कोरोना का बेहतर अध्ययन हमें सौर तूफानों और उनके प्रभावों का पूर्वानुमान लगाने में सक्षम बनाएगा।
इसरो की अगली बड़ी छलांग
PROBA-3 के अलावा, इसरो ने हाल ही में चंद्रयान-3 और आदित्य-L1 जैसे मिशनों की सफलता का जश्न मनाया है। PROBA-3 इसरो के लिए एक और उपलब्धि साबित हो सकती है।
- इसरो ने पिछले कुछ वर्षों में अंतरिक्ष अनुसंधान में अपनी जगह मजबूत की है।
- यह मिशन अंतरराष्ट्रीय सहयोग और उन्नत तकनीकी प्रयोगों का उदाहरण है।
भविष्य की उम्मीदें
PROBA-3 की सफलता न केवल भारत बल्कि वैश्विक अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए एक मील का पत्थर साबित होगी। सूर्य के बारे में नई जानकारियां हासिल करने से भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों को नई दिशा मिलेगी।
PROBA-3 मिशन अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक बड़ा कदम है। इसरो और उसके अंतरराष्ट्रीय साझेदारों की यह कोशिश मानवता के ज्ञान में एक अनमोल योगदान साबित हो सकती है।

