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Kabul:अफगानिस्तान में हालात बेहद खराब, निजामी हालात में पता ही नहीं लग रहा था कि कौन सही है

Kabul पर एक सप्ताह पहले तालिबान के कब्जे के बाद अफगानिस्तान की राजधानी में खराब होती सुरक्षा स्थिति के बीच भारतीय वायुसेना (आईएएफ) के एक सैन्य परिवहन विमान ने काबुल से 107 भारतीयों समेत 168 लोगों को रविवार को वहां से निकाल लिया। इनमें अफगानिस्तान के सिख सांसद नरेंद्र खालसा भी हैं, जिन्होंने कहा कि वह और उनकी बच्ची तो बच गए, पर अफगानिस्तान में हालात बेहद खराब हैं।

वहां सब कुछ खत्म हो चुका है। शून्य है। ये बातें उन्होंने कैमरे के सामने रोते हुए कहीं। भारत की ओर से की गई मदद को लेकर उन्होंने वह पीएम मोदी का हजार बार शुक्रिया अदा करते हैं।

दिल्ली से सटे गाजियाबाद के हिंडन एयरपोर्ट पर उन्होंने बताया, “वहां पर हालात ठीक नहीं है। बहुत दहशतगर्दी चल रही थी। परेशानी बहुत ज्यादा थी। पर बड़ी बात यह है कि मेरी और मेरी बच्ची की जान बच गई। संगत और हिंदू भाइयों को वहां बहुत दिक्कत है। वहां एयरपोर्ट पर हर गेट पर पांच से छह हजार लोग थे। हम गुरुद्वारा गए। निजामी हालात में पता ही नहीं लग रहा था कि कौन सही है और कौन बुरा है।”

यह पूछे जाने पर कि आप सांसद रहे और इस नाते अपना मुल्का छोड़ना कैसा लगता है? जज्बाती होते हुए उन्होंने जवाब दिया,
“मुझे रोना आता है फिर।” यह कहते ही उनकी आंखों से आंसू छलक आए। हालांकि, मीडियाकर्मियों ने उन्हें ढांढस बांधने की कोशिश की कि वे अपने वतन वापस लौट पाएंगे।

बकौल खालसा, “हमने ऐसा दौर नहीं देखा था। सब कुछ खत्म है वहां। शून्य है। अभी वहां 200 सिख हिंदू भाई फंसे हैं। वे गुरुद्वारे में फंसे हैं। उधर भरोसा नहीं है कुछ कि आखिर किस किस्म के लोग (तालिबानी) हैं। किससे लड़ें और किससे बात करें। सारी संगत गुरुद्वारे में है। सेवादार वहीं हैं। लंगर 24 घंटे वहीं चल रहा है।”

पत्रकार ने पूछा- भारत में सुरक्षित महसूस कर रहे हैं? वह बोले- क्यों नहीं…यह हमारा दूसरा घर है। अफगानी हैं, पर वहां भी सब लोग करते हैं कि इंडिया भी तुम्हारा घर है। हम एक और घर भी रखते हैं। खुदा से दुआ करते हैं कि हमारा मुल्क फिर से बनें और वहां जाकर बसें। हमारा देश हमारी मां है। हमें जनता से बहुत प्यार है। हमारा सपना टूट गया। मैं पीएम मोदी को एक बार नहीं बल्कि हजार बार शुक्रिया बोलूंगा। पीएम, भारत सरकार और वायुसेना ने बुरे वक्त में हमारी मदद की।

इसी बीच, एक अफगानी महिला ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया, “वहां पर हालात बदतर होते जा रहे हैं, इसलिए मैं अपने बेटी और दो पोतियों के साथ भारत आ गई। हमारे भारतीय भाई और बहन हमें रेस्क्यू कराने आए, पर तालिबान ने हमारा घर तक फूंक दिया। मैं मदद के लिए भारत की शुक्रगुजार हूं।”

 

News-Desk

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