Lucknow: उत्तर प्रदेश में सोशल मीडिया पर जातिवाद और महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट: X हैंडलर के खिलाफ FIR दर्ज
Lucknow उत्तर प्रदेश में सोशल मीडिया के दुरुपयोग का एक नया मामला सामने आया है, जहां एक एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडलर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। मामला बेहद गंभीर है क्योंकि इसमें महिलाओं के प्रति अश्लील टिप्पणी और दो समुदायों के बीच जातिवादी विवाद को हवा देने की साजिश का आरोप लगाया गया है। इस केस ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है, और अब प्रशासन इस मुद्दे पर सख्ती से कार्रवाई करने के मूड में दिख रहा है।
ऋचा राजपूत की शिकायत: महिलाओं और पिछड़े वर्गों पर हमले का आरोप
इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब उत्तर प्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की महिला सदस्य ऋचा राजपूत ने हजरतगंज थाने में शिकायत दर्ज कराई। ऋचा ने बताया कि एक हैंडलर जिसका संभावित नाम शकील तनवीर @surya_samajwadi है, सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट कर रहा है। इस व्यक्ति पर आरोप है कि वह महिलाओं, खासकर पिछड़े वर्ग की महिलाओं के खिलाफ अश्लील टिप्पणियां कर रहा है। यह हरकत न केवल महिलाओं के सम्मान को ठेस पहुंचाती है, बल्कि समाज में आपसी द्वेष और अविश्वास का माहौल भी पैदा करती है।
ऋचा राजपूत ने आगे बताया कि आरोपी ने दो समाजों के बीच जातिवादी टिप्पणियां की हैं, जो सामाजिक सौहार्द्र को बिगाड़ सकती हैं। साथ ही वह चुनावी प्रक्रिया को भी गलत तरीके से प्रभावित करने के लिए झूठी अफवाहें फैला रहा है। खास तौर पर ईवीएम मशीन की गड़बड़ी के फर्जी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर रहा है।
सोशल मीडिया पर झूठ और अफवाहों का जाल
यह कोई पहला मौका नहीं है जब सोशल मीडिया पर इस तरह की आपत्तिजनक गतिविधियां देखने को मिल रही हैं। पिछले कुछ समय में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां राजनीतिक, सामाजिक, और सांस्कृतिक मुद्दों को लेकर झूठी खबरें फैलाई जा रही हैं। शकील तनवीर पर यह भी आरोप है कि वह अपने समर्थकों को सोशल मीडिया के माध्यम से हिंसात्मक और उत्तेजक पोस्ट करने के लिए उकसा रहा है। इन पोस्ट्स का उद्देश्य समाज में तनाव फैलाना और लोगों को एक-दूसरे के खिलाफ भड़काना है।
आरोपी हैंडलर की साजिशें: हिंदू पहचान और चुनावी अफवाहें
इस मामले को और भी पेचीदा बनाता है आरोपी का हिंदू बनकर सोशल मीडिया पर गतिविधियां करना। शकील तनवीर पर यह आरोप है कि उसने अपना नाम और पहचान छिपाकर “Hindu” बनकर पिछड़े वर्ग की महिलाओं पर अश्लील पोस्ट डाली हैं। इस प्रकार की रणनीति न केवल धोखाधड़ी है, बल्कि यह सांप्रदायिक तनाव को भड़काने की भी कोशिश है। इसके साथ ही आरोपी ने चुनावी प्रक्रियाओं को गलत तरीके से प्रस्तुत करने के लिए भी सोशल मीडिया का उपयोग किया। वह झूठे वीडियो और अफवाहें फैलाकर ईवीएम मशीनों की गड़बड़ी का मुद्दा उठा रहा है, जिससे समाज में अविश्वास का माहौल पैदा हो रहा है।
सोशल मीडिया पर बढ़ता अपराध और प्रशासन की चुनौती
सोशल मीडिया का आज के दौर में जितना सकारात्मक उपयोग हो सकता है, उतना ही इसके दुरुपयोग के उदाहरण भी सामने आ रहे हैं। खासकर उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में जहां सामाजिक और जातिगत मुद्दे बेहद संवेदनशील हैं, सोशल मीडिया पर गलत जानकारी और अफवाहों का फैलाव खतरनाक साबित हो सकता है। यह मामला सिर्फ एक एफआईआर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य और देश की सुरक्षा के लिए एक चेतावनी है कि कैसे साइबर क्राइम नए-नए रूपों में सामने आ रहा है।
इंस्पेक्टर विक्रम सिंह ने बताया कि इस मामले की तफ्तीश की जा रही है और पुलिस आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर इस तरह की गतिविधियां बर्दाश्त नहीं की जाएंगी, और अपराधियों को कानून के कठघरे में लाया जाएगा।
राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की सदस्य और #BJP प्रवक्ता रिचा राजपूत ने हजरतगंज थाने में FIR दर्ज कराई है। एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर विवादित पोस्ट और महिलाओं पर की गई अभद्र टिप्पणियों को लेकर फर्जी हिन्दू पहचान के साथ @surya_samajwadi पर केस दर्ज. pic.twitter.com/w8WKaljUrX
— News & Features Network (@newsnetmzn) October 18, 2024
सोशल मीडिया मॉनिटरिंग और सख्त कानून की जरूरत
यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि सोशल मीडिया पर सरकार और प्रशासन को मॉनिटरिंग और रेगुलेशन के लिए और कड़े कदम उठाने की जरूरत है। मौजूदा कानून और नियम-कायदों के बावजूद, सोशल मीडिया पर फेक न्यूज, अभद्र टिप्पणियां, और भ्रामक जानकारी का सिलसिला बढ़ता जा रहा है। विशेष रूप से चुनावी सीजन में, इस तरह की गतिविधियां समाज और चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती हैं।
सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई हो और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर निगरानी के लिए सशक्त तंत्र विकसित किए जाएं। इसके साथ ही जनता को भी जागरूक करने की जरूरत है कि वे सोशल मीडिया पर किसी भी जानकारी को सत्यापित करें और भ्रामक खबरों का हिस्सा न बनें।
देशभर में बढ़ते सोशल मीडिया अपराध
यह सिर्फ उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है। देशभर में सोशल मीडिया के माध्यम से अभद्रता, जातिवाद, और झूठी खबरों का फैलाव तेजी से बढ़ रहा है। विभिन्न राज्यों में भी इसी तरह के मामलों में एफआईआर दर्ज की गई हैं, जहां सोशल मीडिया पर महिलाओं और समुदायों को निशाना बनाकर अश्लील और भड़काऊ सामग्री पोस्ट की जा रही है। महाराष्ट्र, दिल्ली, और मध्य प्रदेश में भी ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां सोशल मीडिया पर जातिवादी और सांप्रदायिक टिप्पणी की गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को अपने यूजर्स की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखने की जरूरत है। यदि वे समय पर कार्रवाई नहीं करेंगे, तो इससे समाज में तनाव और अस्थिरता बढ़ सकती है।
सोशल मीडिया यूजर्स की जिम्मेदारी
एक ओर जहां सोशल मीडिया एक शक्तिशाली माध्यम है जो लोगों को अपनी आवाज उठाने का मौका देता है, वहीं दूसरी ओर इसका गलत इस्तेमाल समाज को नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसे में सोशल मीडिया यूजर्स की भी यह जिम्मेदारी है कि वे इस प्लेटफॉर्म का सही उपयोग करें और समाज में शांति और सौहार्द्र बनाए रखने में अपना योगदान दें। किसी भी भड़काऊ या गलत जानकारी को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच जरूर करें।
सोशल मीडिया को जिम्मेदारी से इस्तेमाल करें
यह मामला हमें याद दिलाता है कि सोशल मीडिया की शक्ति का सही उपयोग करना कितना महत्वपूर्ण है। यह हमें अपनी बात कहने का प्लेटफॉर्म जरूर देता है, लेकिन इसका दुरुपयोग गंभीर परिणाम ला सकता है। सरकार और प्रशासन को इसके लिए सख्त कानून बनाने की जरूरत है, ताकि सोशल मीडिया पर किसी भी प्रकार की अभद्रता और जातिवादी गतिविधियों को रोका जा सके। साथ ही, जनता को भी इस बारे में जागरूक होने की जरूरत है कि वे किसी भी प्रकार की भ्रामक या हिंसक जानकारी का हिस्सा न बनें।

