मोरना चीनी मिल विस्तार की मांग फिर तेज़: जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. वीरपाल निर्वाल ने Lucknow में मुख्यमंत्री योगी से की मुलाकात, किसानों में उम्मीद की लहर
Lucknow। प्रदेश में गन्ना कटाई शुरू होते ही एक बार फिर मोरना चीनी मिल के विस्तारीकरण की चर्चा ज़ोरों पर है। क्षेत्र के किसान और स्थानीय जनप्रतिनिधि वर्षों से इस मांग को उठा रहे हैं, और अब इस दिशा में एक नई उम्मीद जागी है। जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. वीरपाल निर्वाल ने एक बार फिर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया है।
मुख्यमंत्री से मुलाकात: किसानों के लिए नई उम्मीद
बीते शनिवार को डॉ. वीरपाल निर्वाल ने लखनऊ स्थित सीएम कार्यालय में जाकर मुख्यमंत्री से व्यक्तिगत मुलाकात की। उन्होंने मुख्यमंत्री को बताया कि मोरना स्थित दि गंगा किसान सहकारी चीनी मिल की वर्तमान पेराई क्षमता 25 टीसीडी (टन क्रशिंग पर डे) है, जो क्षेत्र में गन्ने के अत्यधिक उत्पादन के मुकाबले काफी कम है।
उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि मिल की पेराई क्षमता को 50 टीसीडी तक बढ़ाया जाए और इसके साथ ही नई यूनिट का निर्माण भी कराया जाए। यह मांग किसानों की आवाज़ बन चुकी है, जो वर्षों से अधूरी है।
किसानों की समस्या और बढ़ती गन्ना उपज
मोरना क्षेत्र में गन्ने की खेती मुख्य आय का स्रोत है। गन्ने की अधिक पैदावार के कारण किसान हर साल मिलों में लंबी कतारों में खड़े रहते हैं। सीमित क्षमता के चलते कई बार गन्ना देर से तौलने की समस्या आती है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
मिल की मशीनें पुरानी हो चुकी हैं और उत्पादन प्रक्रिया पर इसका सीधा असर पड़ता है। ऐसे में किसानों की मांग है कि न केवल मिल का नवीनीकरण किया जाए, बल्कि तकनीकी रूप से उन्नत इकाई की स्थापना की जाए, जिससे उत्पादन क्षमता और गुणवत्ता दोनों में सुधार हो सके।
सरकार की प्राथमिकता में किसान हित
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस विषय को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र निर्णय लेने का आश्वासन दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों के हितों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है।
उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार पहले से ही चीनी मिलों के आधुनिकीकरण और विस्तारीकरण की दिशा में कार्य कर रही है।
योगी ने यह भी कहा कि शुकतीर्थ क्षेत्र के विकास और जनपद में चल रही अन्य विकास योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
प्रदेश में गन्ना उद्योग की वर्तमान स्थिति
उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक राज्य है। यहां सैकड़ों चीनी मिलें प्रतिवर्ष करोड़ों क्विंटल गन्ना क्रश करती हैं। हालांकि, कई मिलें आज भी पुरानी तकनीक पर आधारित हैं।
राज्य सरकार द्वारा “नवीन चीनी नीति” के अंतर्गत कई इकाइयों को अपग्रेड किया गया है, लेकिन कई पुरानी सहकारी मिलें जैसे मोरना मिल अब भी अपनी सीमित क्षमता के साथ संघर्ष कर रही हैं।
विस्तारीकरण से क्या होगा लाभ?
किसानों को सीधा फायदा: पेराई क्षमता बढ़ने से गन्ने की समय पर तौल होगी।
नई नौकरियों के अवसर: नई यूनिट बनने से स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ेगा।
स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा: व्यापार और सहायक उद्योगों को लाभ मिलेगा।
तकनीकी सुधार: नई मशीनरी से चीनी उत्पादन की गुणवत्ता बढ़ेगी।
सरकारी राजस्व में वृद्धि: अधिक उत्पादन से कर और निर्यात में इजाफा होगा।
डॉ. वीरपाल निर्वाल की भूमिका
डॉ. वीरपाल निर्वाल ने बताया कि उन्होंने पहले भी कई बार मुख्यमंत्री से मिलकर यह मांग उठाई थी, लेकिन इस बार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सकारात्मक संकेत दिए हैं।
उन्होंने कहा कि “यह केवल मिल का नहीं, बल्कि हजारों किसानों के जीवन का प्रश्न है। अगर मिल का विस्तार होता है तो इसका लाभ पूरे जनपद को मिलेगा।”
डॉ. निर्वाल ने क्षेत्र के सभी किसान संगठनों से एकजुट होकर इस प्रयास को समर्थन देने की अपील की।
क्षेत्रीय किसानों की प्रतिक्रिया
स्थानीय किसान इस खबर से उत्साहित हैं। मोरना क्षेत्र के गन्ना उत्पादक किसान रामपाल सिंह का कहना है,
“अगर मिल की पेराई क्षमता बढ़ती है तो हमें समय पर भुगतान और तौल की सुविधा मिलेगी। अब तक हमें कई बार गन्ना खेत में ही खराब करना पड़ता था।”
इसी तरह, किसान सुमन चौधरी ने कहा कि “सरकार अगर इस मुद्दे पर गंभीर है तो यह हमारे लिए राहत की बात होगी।”
भविष्य की राह: संभावनाएं और चुनौतियाँ
यदि मुख्यमंत्री की मंजूरी मिलती है, तो मोरना चीनी मिल उत्तर प्रदेश की आधुनिक मिलों में शामिल हो सकती है।
हालांकि, इसके लिए भूमि, पूंजी और प्रशासनिक स्वीकृति जैसी कई प्रक्रियाएं आवश्यक हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रोजेक्ट अगले वित्त वर्ष में शुरू हो जाता है, तो गन्ना किसानों की आय में 25-30% तक की वृद्धि संभव है।
प्रदेश में अन्य मिलों पर भी नज़र
मोरना मिल के साथ-साथ कई अन्य मिलें भी विस्तारीकरण की सूची में हैं — जैसे बिजनौर, मुज़फ्फरनगर, बुलंदशहर, और सहारनपुर की सहकारी चीनी मिलें।
राज्य सरकार इन सभी मिलों के लिए एक व्यापक योजना पर काम कर रही है, जिससे प्रदेश को “शुगर पावर स्टेट” के रूप में स्थापित किया जा सके।
समापन से पहले किसानों की एक ही मांग — वादा निभाया जाए
किसान संगठन चाहते हैं कि मुख्यमंत्री द्वारा दिया गया आश्वासन जल्द ही अमल में लाया जाए। उनका कहना है कि अब वक्त आ गया है कि सरकार केवल योजनाओं की घोषणा न करे, बल्कि ज़मीनी स्तर पर काम दिखाए।
विस्तारीकरण के बाद मोरना क्षेत्र न सिर्फ गन्ना उत्पादन में अग्रणी रहेगा, बल्कि रोज़गार और आर्थिक विकास का केंद्र भी बनेगा।

