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Ludhiana में Argentinia की युवती को लिव-इन पार्टनर ने बनाया बंधक, बच्चों से किया अलग – पुलिस ने दिलाया न्याय! 🔥

Ludhiana शहर एक बार फिर चर्चा में है—इस बार एक विदेशी Argentinia की महिला के साथ हुए अमानवीय बर्ताव के कारण। अर्जेंटीना की 31 वर्षीय महिला गेटे मारिया बोलन को उसके भारतीय लिव-इन पार्टनर हरजिंदर भोला ने न केवल बंधक बना लिया, बल्कि उसे शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित भी किया। महिला मार्च में भारत अपने पार्टनर से मिलने आई थी, परंतु उसे वापस लौटने नहीं दिया गया।


शुरुआत: प्यार का रिश्ता कैसे बना बंधन
गेटे मारिया बोलन मार्च में हरजिंदर भोला से मिलने भारत आईं थीं। उनका उद्देश्य था तीन महीने का छोटा-सा प्रवास, ताकि वह उसके परिवार से मिल सकें। लेकिन यह मुलाकात एक डरावने अध्याय में बदल गई। हरजिंदर भोला, जो हाल ही में ऑस्ट्रेलिया से लौटा था, ने महिला को मजबूर कर दिया कि वह भारत में ही रुकी रहे।

जब महिला ने अर्जेंटीना लौटने की बात कही, तो आरोपी ने उसका रास्ता रोक दिया। उसने महिला के बाल खींचे, उसकी पिटाई की और उसके दो मासूम बच्चों — 12 साल की बेटी और 7 साल के बेटे — को उससे अलग कर दिया।


बेटी का बयान: “हम दोनों को पीटा गया”
गेटे की बेटी ने भी पुलिस को बताया कि आरोपी ने उसे और उसके छोटे भाई को पीटा। उनके बयान ने मामले को और गंभीर बना दिया। युवती ने कहा कि यह पहली बार नहीं था जब उसे प्रताड़ित किया गया। अर्जेंटीना में भी उसने आरोपी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी।


दूतावास से गुहार, फिर पुलिस की सक्रियता
जब हालात और बिगड़ गए, तो गेटे ने अर्जेंटीना दूतावास से मदद मांगी। दूतावास ने तुरंत भारतीय पुलिस को सूचित किया। थाना डिवीजन नंबर 2 के एसएचओ गुरजीत सिंह के नेतृत्व में एक टीम ने इस्लाम गंज क्षेत्र से महिला को रेस्क्यू किया।
उसे पहले सिविल अस्पताल के ‘सखी वन स्टॉप सेंटर’ में ले जाया गया, जहाँ उसे चिकित्सीय और मनोवैज्ञानिक सहायता दी गई। इसके बाद उसे सुरक्षित रूप से दिल्ली रवाना कर दिया गया।


पुलिस ने किया आरोपी को गिरफ्तार, माँ पर भी जांच जारी
महिला की शिकायत पर पुलिस ने हरजिंदर भोला के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया। उसके खिलाफ BNS की धारा 115(2) (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना), 126(2) (ग़लत तरीके से रोकना), और 351(2) (आपराधिक धमकी) के तहत मामला दर्ज हुआ है।

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी की मां की भूमिका भी संदिग्ध है। SHO गुरजीत सिंह ने कहा कि “महिला ने आरोपी की मां पर भी आरोप लगाया है कि वह बेटे का साथ देती थी और मारपीट में शामिल थी।”


भाषा की बाधा, पर इंसाफ नहीं रुका
यह केस पुलिस के लिए भी चुनौतीपूर्ण रहा क्योंकि अर्जेंटीनी महिला ने शिकायत स्पेनिश भाषा में दर्ज कराई थी। पुलिस ने तकनीकी सहायता से अनुवाद कर शिकायत का पंजाबी संस्करण तैयार किया। SHO ने बताया कि “भाषा एक दीवार जरूर थी, पर इंसाफ उस दीवार को पार कर गया।”


अर्जेंटीना दूतावास की सराहना, पंजाब पुलिस की तत्परता
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस घटना ने दूतावास और पुलिस के बीच समन्वय का एक मजबूत उदाहरण पेश किया। दूतावास ने तुरंत प्रतिक्रिया दी और पंजाब पुलिस ने मानवीय आधार पर तत्काल कार्रवाई की।


मानव अधिकार संगठनों की प्रतिक्रिया
स्थानीय मानव अधिकार कार्यकर्ताओं और महिला आयोग ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। उनका कहना है कि “विदेशी महिलाओं के साथ इस तरह का व्यवहार भारत की छवि को धूमिल करता है। ऐसे मामलों में पुलिस को और सख्त कदम उठाने चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी अपराधी ऐसा करने की हिम्मत न करे।”


समान घटनाओं का बढ़ता सिलसिला
हाल के महीनों में विदेशी नागरिकों के साथ इस तरह की घटनाएँ कई राज्यों में सामने आई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि लिव-इन संबंधों में कानूनी अस्पष्टता और संस्कृति के अंतर कई बार इस तरह के विवादों की जड़ बनते हैं। दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु में भी ऐसे ही मामलों में विदेशी महिलाएँ प्रताड़ना का शिकार हो चुकी हैं।


महिला सुरक्षा के लिए ज़रूरी कदम
इस घटना ने फिर से यह प्रश्न खड़ा किया है कि विदेशी नागरिकों की सुरक्षा को लेकर क्या हमारे पास पर्याप्त तंत्र है?
विशेषज्ञों का सुझाव है कि —

  • विदेशी पर्यटकों के लिए हेल्पलाइन नंबरों का प्रचार अधिक हो।

  • पुलिस थानों में बहुभाषी अधिकारियों की नियुक्ति की जाए।

  • लिव-इन रिलेशन में विदेशी नागरिकों के लिए कानूनी परामर्श सेवाएँ उपलब्ध कराई जाएँ।


एसएचओ गुरजीत सिंह बोले — “न्याय मिलेगा, चाहे भाषा कोई भी हो”
गुरजीत सिंह ने कहा कि “महिला को हर संभव सुरक्षा दी गई है और केस की जाँच पूरी गंभीरता से की जा रही है। आरोपी को जेल भेजा जा चुका है और उसके परिवार की भूमिका पर भी नज़र रखी जा रही है।”


समाज के लिए सबक: प्यार और विश्वास के बीच सीमाएँ ज़रूरी हैं
यह घटना एक चेतावनी भी है कि रिश्ते चाहे कितने भी गहरे हों, विश्वास और सुरक्षा की सीमाएँ कभी पार नहीं होनी चाहिए। जब कोई रिश्ता हिंसा और नियंत्रण में बदल जाए, तो वहाँ से बाहर निकलना ही समझदारी है।


यह मामला केवल एक विदेशी महिला का नहीं, बल्कि हर उस महिला की आवाज़ है जो चुपचाप प्रताड़ना सहती है। पुलिस की तत्परता और दूतावास की जागरूकता ने एक जान बचाई। उम्मीद की जानी चाहिए कि ऐसे मामलों में न्याय तेजी से होगा और समाज में महिलाओं की सुरक्षा के प्रति संवेदनशीलता बढ़ेगी।

 

News-Desk

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