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कम नहीं हो रहा कुपोषण का कहर

मुजफ्फरनगर। जिले से कुपोषण का कहर कम नहीं हो रहा। हर माह कुछ के स्वास्थ्य में सुधार होता है तो नए कुपोषित बच्चे भी सामने आ जाते हैं। अगस्त माह की रिपोर्ट के अनुसार जिले में 24 हजार से ज्यादा बच्चे कुपोषित हैं, जिनमें से 2474 अतिकुपोषित श्रेणी में हैं।

बच्चों में कुपोषण को दूर करने के लिए 2017 में राष्ट्रीय पोषण मिशन की शुरुआत की गई थी। इसके तहत कुपोषित और अतिकुपोषित बच्चों को उपचार देकर उन्हें स्वस्थ बनाना है। जनपद में हर माह आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों का वजन कर कुपोषण का पता लगाया जाता है। अगस्त माह की रिपोर्ट के अनुसार जनपद में 24 415 बच्चे कुपोषित पाए गए हैं। इनमें से 18476 पीली तथा 2474 लाल श्रेणी में हैं। कुपोषित बच्चे को पीली श्रेणी में रखा जाता है, जबकि अतिकुपोषित को लाल श्रेणी में शामिल किया जाता है। दरअसल, हर माह चलने वाले अभियान में बच्चे पुष्टाहार देने, देखभाल तथा उपचार के बाद सामान्य श्रेणी में आ जाते हैं, लेकिन उतने ही नए कुपोषित बच्चे मिल जाते हैं। अगस्त माह में ही 195 नए बच्चे लाल श्रेणी में चिह्नित किए गए हैं, जबकि 354 बच्चे पीली श्रेणी में पाए गए हैं।

जुलाई माह तक चिह्नित किए गए 3337 बच्चों के स्वास्थ्य में अगस्त माह में सुधार पाया गया है। जिला कार्यक्रम अधिकारी वाणी वर्मा का कहना है कि प्रतिमाह आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों का वजन कर कुपोषण की स्थिति का पता लगाया जाता है। उन्होंने कहा कि जो बच्चे कुपोषित मिलते हैं उनके स्वास्थ्य का परीक्षण कराकर उपचार दिलाया जाता है।
एनआरसी में सुधर रहा बच्चों का स्वास्थ्य-यदि किसी बच्चे का वजन उसकी आयु के मानक से कम होता है, तो उसके स्वास्थ्य का परीक्षण कराया जाता है। उसे चिकित्सक के पास भेजकर उपचार कराया जाता है। बच्चे की स्थिति ज्यादा खराब हो तो जिला मुख्यालय पर बने पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में भर्ती कराया जाता है। यहां बच्चे के पोषाहार के साथ ही तीमारदार के भोजन की भी व्यवस्था होती है साथ ही 50 रुपये प्रतिदिन का भत्ता भी दिया जाता है।

बच्चे को चिकित्सक एवं डायटीशियन की देखरेख में रखा जाता है। स्वस्थ हो जाने पर ही उसे घर भेजा जाता है। वर्तमान में एनआरसी में 10 बच्चे भर्ती हैं। इनके स्वास्थ्य में सुधार होने पर उन्हें घर भेज दिया जाता है।
पोषण माह में रोजाना हो रहे कार्यक्रम-राष्ट्रीय पोषण मिशन के तहत सितंबर को पोषण माह के रूप में मनाया जा रहा है। इसकी थीम ऊपरी आहार है। जिले में रोजाना कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। 20 सितंबर को बाल सुपोषण उत्सव, 21 को ऊपरी आहार विषयक सुपोषण गूंज, 23 को मातृत्व समिति एवं सास बहू बैठक, 24 को पोषण वाटिका गृह भ्रमण, 25 को नवविवाहिताओं को केंद्र पर बुलाकर खून की जांच, 26 को लाडली दिवस 27 को सुपोषण झांकी रेसिपी प्रतियोगिता, 28 को सुपोषण गूंज एवं 30 सितंबर को बाल सुपोषण उत्सव मनाया जाएगा।

News-Desk

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