Thailand & Myanmar में भीषण भूकंप का कहर! बैंकाक की इमारत ढही, 100+ मौतें, चीन-भारत तक महसूस किए गए झटके
Thailand & Myanmar में शुक्रवार दोपहर अचानक आए भयानक भूकंप ने तबाही का मंजर पेश कर दिया। रिक्टर स्केल पर 7.7 की तीव्रता वाले इस भूकंप ने न केवल थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक को हिलाकर रख दिया, बल्कि इसकी वजह से पड़ोसी देश म्यांमार के कई इलाकों में भी आपातकाल लागू कर दिया गया। भूकंप के झटके इतने तेज थे कि भारत और चीन के कई शहरों में भी लोगों ने इन्हें महसूस किया। अब तक 100 से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, लेकिन आशंका जताई जा रही है कि मृतकों की संख्या और बढ़ सकती है।
बैंकाक में बहुमंजिला इमारत ढही, सोशल मीडिया पर वायरल हुआ दर्दनाक वीडियो
भूकंप का सबसे भयानक नज़ारा बैंकॉक में देखने को मिला, जहाँ एक बहुमंजिला इमारत पल भर में धराशायी हो गई। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे एक ऊँची इमारत, जिसके ऊपर एक क्रेन लगी हुई थी, अचानक धूल के बादल के साथ गिरती है। इस दौरान आसपास के लोग चीखते-चिल्लाते हुए भागने की कोशिश करते दिखाई दे रहे हैं। पुलिस ने बताया कि यह घटना बैंकॉक के प्रसिद्ध चतुचक मार्केट के पास हुई, लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इमारत गिरने के समय उसके अंदर कितने मजदूर मौजूद थे।
#Thailand थाईलैंड के साथ सीमा के पास म्यांमार में 7.7 तीव्रता के भूकंप के बाद निर्माणाधीन गगनचुंबी इमारत ढहने के बाद बैंकाक में लगभग 50 निर्माण श्रमिक लापता हैं।
म्यांमार में हजारों लोगों के मारे जाने की आशंका #Myanmar pic.twitter.com/LHxFWiZPLX
— News & Features Network (@newsnetmzn) March 28, 2025
थाईलैंड सरकार ने जारी किए आपातकालीन निर्देश
भूकंप के बाद थाईलैंड की प्रधानमंत्री ने तुरंत आपातकालीन बैठक बुलाई और कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए:
- डिजिटल अर्थव्यवस्था मंत्रालय को निर्देश दिया गया कि वह आपातकालीन चेतावनी प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाए।
- रक्षा मंत्रालय और सशस्त्र बलों को निर्देश दिया गया कि वे लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तैयार रहें।
- प्राकृतिक संसाधन मंत्रालय को भूकंप के बाद के झटकों (आफ्टरशॉक्स) की निगरानी करने और उनसे निपटने के लिए तैयार रहने को कहा गया।
- बैंकॉक प्रशासन और गृह मंत्रालय को राहत और बचाव कार्यों की जिम्मेदारी सौंपी गई।
- स्वास्थ्य मंत्रालय को अस्पतालों और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को सक्रिय करने के निर्देश दिए गए।
भूकंप के बाद बैंकाक में मचा हड़कंप
भूकंप के झटके दोपहर करीब 1:30 बजे महसूस किए गए, जिसके बाद शहर भर में इमारतों से चेतावनी अलार्म बजने लगे। लोग घबराकर ऊंची इमारतों से सीढ़ियों से नीचे भागने लगे। बैंकॉक महानगर में 1.7 करोड़ से अधिक लोग रहते हैं, जिनमें से अधिकांश ऊंची इमारतों में निवास करते हैं। भूकंप के कारण कई इमारतों के स्विमिंग पूल का पानी बाहर आ गया और कुछ जगहों पर मलबा गिरने की घटनाएं भी हुईं।
भूकंप का केंद्र म्यांमार में, 6.4 तीव्रता का दूसरा झटका
अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) और जर्मनी के जीएफजेड भूविज्ञान केंद्र के अनुसार, यह भूकंप 10 किलोमीटर की गहराई पर आया था और इसका केंद्र म्यांमार में स्थित था। दोपहर में पहले भूकंप के बाद 6.4 तीव्रता का एक और झटका आया, जिससे लोगों में दहशत और बढ़ गई। प्रशासन ने लोगों से इमारतों से बाहर रहने की अपील की और चेतावनी दी कि अभी और झटके आ सकते हैं।
म्यांमार में इमरजेंसी, भारत और चीन में भी महसूस किए गए झटके
म्यांमार सरकार ने भूकंप की वजह से 6 क्षेत्रों और राज्यों में आपातकाल की घोषणा कर दी है। वहीं, भूकंप के झटके भारत के पूर्वोत्तर राज्यों और चीन के कुछ हिस्सों में भी महसूस किए गए। विशेषज्ञों का कहना है कि यह क्षेत्र भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील है और आने वाले दिनों में और झटके आ सकते हैं।
क्या होती है 7.7 तीव्रता का मतलब?
भूकंप की तीव्रता को मापने के लिए रिक्टर स्केल का उपयोग किया जाता है। 7.0 से अधिक तीव्रता वाले भूकंप को “बहुत भयानक” श्रेणी में रखा जाता है, जो बड़े पैमाने पर विनाश कर सकता है। इससे पहले 2015 में नेपाल में आए 7.8 तीव्रता के भूकंप ने हज़ारों लोगों की जान ले ली थी।
क्या भारत के लिए भी है खतरा?
भूकंप विज्ञानियों के अनुसार, हिमालयन क्षेत्र में भी बड़े भूकंप आने की आशंका बनी रहती है। भारत के उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर जैसे राज्य सीस्मिक जोन-4 और 5 में आते हैं, जहाँ कभी भी भीषण भूकंप आ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं हमें अपनी तैयारियों को और मजबूत करने की याद दिलाती हैं।
अब क्या होगा आगे?
थाईलैंड और म्यांमार की सरकारें राहत और बचाव कार्यों में जुटी हुई हैं। अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने भी मदद का हाथ बढ़ाया है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इस तरह की आपदाओं से निपटने के लिए दुनिया तैयार है? क्या हम अपनी इमारतों और शहरों को भूकंपरोधी बनाने की दिशा में गंभीर हैं? ये सवाल अब पूरी दुनिया के सामने हैं…
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