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72 की उम्र में Brigitte Macron पर फिर लगा आरोपों का तूफान! यूट्यूब वीडियो से फैली अफवाह, सुप्रीम कोर्ट में मानहानि केस

फ्रांस की प्रथम महिला Brigitte Macron एक बार फिर से सुर्खियों में हैं। उम्र के 72वें पड़ाव पर कदम रखने के बाद भी उनका जीवन मानो थमता ही नहीं। इस बार चर्चा का कारण बना एक पुराना लेकिन विवादित यूट्यूब वीडियो, जिसमें दो महिलाओं ने उन्हें लेकर बेहद सनसनीखेज और अपमानजनक दावा किया था—कि ब्रिगिट असल में पुरुष पैदा हुई थीं।

**मानहानि की जंग पहुँची सुप्रीम कोर्ट तक
यह विवाद 2021 में शुरू हुआ था, जब अमंडाइन रॉय और नताशा रे नामक दो महिलाओं ने एक यूट्यूब चैनल पर ब्रिगिट मैक्रों को लेकर दावा किया कि वे असल में “जीन-मिशेल ट्रोगन्यू” हैं—जो उनके भाई का नाम है। इन दोनों महिलाओं का कहना था कि ब्रिगिट और जीन-मिशेल की शक्ल काफी हद तक मिलती है और उन्होंने ब्रिगिट के लैंगिक पहचान पर सवाल उठाया।

इस आरोप को लेकर पहले ब्रिगिट ने निचली अदालत में मुकदमा दायर किया। वहां कोर्ट ने साल 2024 में इन दोनों महिलाओं पर कुल 12 लाख रुपये का जुर्माना लगाया—जिसमें 7 लाख ब्रिगिट को और 5 लाख उनके भाई को हर्जाना देने का आदेश हुआ। परंतु, पेरिस की एक अदालत ने बाद में इस सजा को माफ कर दिया।

अब यह मामला फ्रांस की सर्वोच्च अदालत—कोर्ट डे कैसेशन—में पहुँच गया है। ब्रिगिट ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए कहा कि यह न सिर्फ एक झूठी अफवाह है, बल्कि उनके परिवार, मान-सम्मान और सार्वजनिक छवि के खिलाफ सोची-समझी साजिश है।

**ब्रिगिट मैक्रों का गुस्सा और वायरल झड़प
मई 2025 में एक और घटना ने इस विवाद को और भी चटपटा बना दिया। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों जब वियतनाम दौरे पर थे, तो नोई बाई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर ब्रिगिट का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वह पति मैक्रों का मुंह पकड़कर धक्का देती नजर आईं।

यह वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैला। पहले तो फ्रांसीसी सरकार ने इस घटना को “मजाक” बताया, लेकिन लोगों के बीच कई तरह की अटकलें लगने लगीं—क्या उनके रिश्ते में खटास है? क्या ब्रिगिट किसी दबाव में हैं?

**शुरुआत से ही सवालों के घेरे में रहा रिश्ता
ब्रिगिट और इमैनुएल मैक्रों का रिश्ता शुरू से ही फ्रांस में चर्चाओं का विषय रहा है। इसकी वजह है उनकी उम्र का फासला—ब्रिगिट मैक्रों से 24 साल बड़ी हैं। जब पहली बार उनकी मुलाकात हुई थी, तब इमैनुएल केवल 15 साल के थे और ब्रिगिट उनके स्कूल की फ्रेंच और ड्रामा टीचर।

ब्रिगिट की बेटी भी उसी क्लास में पढ़ती थी, जिसमें इमैनुएल छात्र थे। लेकिन दोनों के बीच एक गहरा जुड़ाव हो गया और उन्होंने एक नाटक पर काम करते हुए एक-दूसरे को करीब से जाना। हालांकि, इस रिश्ते को सामाजिक स्वीकृति मिलने में सालों लग गए।

**माता-पिता की नाराजगी और दूरी
जब इमैनुएल के माता-पिता को उनके और ब्रिगिट के रिश्ते के बारे में पता चला, तो वे बेहद नाराज हो गए। उन्होंने इमैनुएल को पेरिस भेज दिया और ब्रिगिट को चेतावनी दी कि वह उनके बेटे से दूर रहें, जब तक वह बालिग न हो जाए।

लेकिन प्यार ने हार नहीं मानी। इमैनुएल ने ब्रिगिट से वादा किया कि वे एक दिन शादी करेंगे। उन्होंने संपर्क बनाए रखा—फोन, चिट्ठियां और मुलाकातें होती रहीं। यही वह इरादा था जिसने इमैनुएल को राजनीति में आगे बढ़ने और राष्ट्रपति बनने तक की राह दिखाई।

**तलाक के बाद रिश्ते को दी मंज़ूरी
ब्रिगिट ने 2006 में अपने पहले पति आंद्रे-लुई औजिए से तलाक ले लिया और 2007 में इमैनुएल से शादी कर ली। उस वक्त इमैनुएल की उम्र थी 29 और ब्रिगिट की 54। शादी के वक्त ब्रिगिट के बच्चे भी वहां मौजूद थे और उन्होंने अपने नए सौतेले पिता को खुले दिल से अपनाया।

शादी के बाद से ब्रिगिट इमैनुएल के राजनीतिक जीवन में एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन गईं। उन्होंने टीचिंग छोड़ दी और अपने पति के हर चुनावी प्रचार में साथ रहीं। राष्ट्रपति बनने के बाद, ब्रिगिट ने फ्रांस की फर्स्ट लेडी के तौर पर सामाजिक अभियानों में भाग लिया और शिक्षा से जुड़े कई मुद्दों पर काम किया।

**फिर से चर्चा में ब्रिगिट का पुराना वीडियो
हाल ही में 1993 का एक पुराना फोटो और वीडियो क्लिप वायरल हुआ, जिसमें 15 साल के मैक्रों एक नाटक के बाद अपनी टीचर ब्रिगिट को चूमते नजर आए। इस क्लिप ने एक बार फिर उनके रिश्ते की शुरुआत को लेकर लोगों की जिज्ञासा को जगा दिया। कुछ लोगों ने इसे “रोमांटिक” कहा, तो कुछ ने सवाल उठाए कि क्या उस उम्र में ऐसा रिश्ता नैतिक था?

**क्या यह राजनैतिक साजिश है?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मानहानि का मामला सिर्फ व्यक्तिगत नहीं, बल्कि राजनैतिक साजिश भी हो सकता है। ब्रिगिट हमेशा से राष्ट्रपति मैक्रों की रणनीति और छवि को सँवारने में अहम भूमिका निभाती रही हैं। ऐसे में उनके खिलाफ अफवाहें फैलाना एक सोची-समझी चाल हो सकती है।

**सोशल मीडिया बन गया है अफवाहों का अखाड़ा
ब्रिगिट और मैक्रों को लेकर सोशल मीडिया पर अक्सर अजीबोगरीब बातें वायरल होती रहती हैं। कभी उनकी उम्र को लेकर मज़ाक, तो कभी वीडियो के जरिए फैलाई जा रही झूठी कहानियां। फ्रांस ही नहीं, दुनिया के कई देशों में यह ट्रेंड बन गया है कि राजनेताओं की पत्नियों को भी निशाने पर लिया जाता है।

**क्या सुप्रीम कोर्ट से मिलेगा न्याय?
अब देखना ये है कि फ्रांस की सुप्रीम कोर्ट इस मामले में क्या निर्णय देती है। क्या इन महिलाओं को सजा मिलेगी या फिर अफवाह फैलाने वाले फिर से कानून की पकड़ से बच निकलेंगे? ब्रिगिट का यह कदम निश्चित तौर पर संदेश देता है कि वे अपने सम्मान से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेंगी।


**ब्रिगिट मैक्रों की यह कानूनी लड़ाई सिर्फ एक महिला की गरिमा की रक्षा नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही झूठी कहानियों के खिलाफ एक चेतावनी है—कि अब चुप नहीं बैठा जाएगा।**

 

News-Desk

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