Muzaffarnagar: बिटटू सिखेडा को व्हाटसअप कॉल से सर तन से जुदा की धमकी, समर्थन में संयुक्त हिंदू मोर्चा ने सौंपा ज्ञापन
मुजफ्फरनगर।(Muzaffarnagar News) संयुक्त हिंदू मोर्चा के नेतृत्व में हिन्दुवादी एवं सामाजिक संगठनों के वर्तमान एवं पूर्व पदाधिकारियो ने शिवसेना जिला प्रमुख बिटटू सिखेडा को व्हाटसअप कॉल से सर तन से जुदा की धमकी देने के आरोप के चलते कचहरी परिसर स्थित एसएसपी कार्यालय पहुंच कर एक ज्ञापन सौपा।
ज्ञापन मे आरोप लगाया कि फोन द्वारा शिवसेना जिला प्रमुख बिटटू सिखेडा को फोन पर धमकी दी गई की तुम बडे हिंदूवादी बनते हो और डासना वाले महाराज का साथ देते हो। अगर तुमने उनका साथ नही छोडा तो कमलेश तिवारी की तरह तुम्हारी हत्या कर दी जाएगी।
हमारे लोग तुम्हारे शहर मे तुम्हारी लोकेशन ट्रेस कर रहे है। ज्ञापन देने वालों में मुख्य रूप से मनोज सैनी संस्थापक संयुक्त हिंदू मोर्चा व निवर्तमान प्रदेश महासचिव शिवसेना, हिंदू क्रांति दल प्रदेश अध्यक्ष बाबूराम पाल, निवर्तमान प्रदेश उप प्रमुख शिवसेना डॉक्टर योगेंद्र शर्मा, हिंदू जागरण मंच सहसंयोजक पंकज भारद्वाज, राष्ट्रीय अध्यक्ष साक्षी वेलफेयर ट्रस्ट शालू सैनी, अखिल भारत हिंदू महासभा प्रदेश अध्यक्ष सुरेंद्र मित्तल, पूर्व जिला महासचिव शिवसेना राजेश कश्यप, बजरंग दल से विकास अग्रवाल, शिवसेना जिला अध्यक्ष बिट्टू सिखेड़ा, जिला अध्यक्ष विश्व हिंदू पीठ बसंत कश्यप, भगवा रक्षा वाहिनी जिला अध्यक्ष कमलदीप, प्रदेश अध्यक्ष अखंड हिंदू मोर्चा राजू सैनी, राजेंद्र तायल, जिला अध्यक्ष हिंदू स्वाभिमान महंत पंकज शास्त्री, राजकुमार गर्ग पश्चिम प्रदेश सचिव राष्ट्रीय हिंदू शक्ति संगठन, सचिन वर्मा, हिंदू रक्षा दल भारत राजपूत, सचिन जोगी गौ रक्षा सेवा समिति, अनीता ठाकुर जिला अध्यक्ष भवानी सेना, गीता देवी, सुधीर चाहल, राजीव गर्ग, सौरभ राय,, सचिन जोगी, युवा जिला अध्यक्ष शिवसेना कपिल कश्यप, शुभम जोशी, वंश, गीता धीमान, मन्नू, कुमार अरुण कुमार, संजय मित्तल सहारनपुर मंडल हिंदू क्रांति दल, लाल सिंह पाल नेता, मनीष गर्ग जिला अध्यक्ष हिंदू क्रांति दल आदि लोग मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
मुजफ्फरनगर की घटना और इस्लामी आतंकवाद की बढ़ती चुनौतियाँ
मुजफ्फरनगर में हाल ही में घटित एक घटना ने देशभर में हलचल मचा दी है। संयुक्त हिंदू मोर्चा और विभिन्न हिंदूवादी संगठनों ने शिवसेना जिला प्रमुख बिट्टू सिखेड़ा को मिली धमकी के खिलाफ एसएसपी कार्यालय में ज्ञापन सौंपा है। इस मामले में यह आरोप लगाया गया है कि बिट्टू सिखेड़ा को व्हाट्सएप कॉल पर धमकी दी गई कि यदि उन्होंने डासना वाले महाराज का साथ नहीं छोड़ा, तो उनकी हत्या कमलेश तिवारी की तरह कर दी जाएगी।
यह धमकी ना केवल बिट्टू सिखेड़ा के जीवन के लिए खतरा है, बल्कि इससे समाज में बढ़ते कट्टरपंथी विचारधाराओं के खतरों का भी संकेत मिलता है। यह घटना “सर तन से जुदा” जैसी घटनाओं की एक कड़ी मानी जा सकती है, जिसमें कट्टरपंथी तत्वों द्वारा विरोधियों को जान से मारने की धमकी दी जाती है।
“सर तन से जुदा” की घटनाएं: कट्टरपंथ की आग
“सर तन से जुदा” जैसे नारे पिछले कुछ वर्षों में तेजी से उभरकर सामने आए हैं। इस्लामिक आतंकवादियों द्वारा इस नारे का उपयोग उन लोगों के खिलाफ किया जाता है, जो उनके विचारों के विरोधी होते हैं या उनकी धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ बोलते हैं। यह नारा सीधे-सीधे हिंसा और हत्या को बढ़ावा देता है, जो कि एक गंभीर चिंता का विषय है।
हाल ही में, कुछ घटनाओं में इस नारे के तहत लोगों की हत्याएं भी की गई हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण कमलेश तिवारी का है, जिन्हें उनके धार्मिक विचारों के चलते बेरहमी से मार दिया गया था। ऐसे ही कई मामले सामने आए हैं, जहां धार्मिक उन्माद के चलते निर्दोष लोगों की जान ली गई है।
इस्लामिक आतंकवाद: भारत में बढ़ती चुनौतियाँ
भारत एक बहुलतावादी देश है, जहाँ विभिन्न धर्मों और समुदायों के लोग शांति और सौहार्द्र के साथ रहते हैं। लेकिन पिछले कुछ समय से, इस्लामी आतंकवाद के उभार ने देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौतियाँ पैदा की हैं।
आतंकवादी संगठन जैसे ISIS, अल-कायदा और उनके विचारधारा से प्रभावित समूह देश के विभिन्न हिस्सों में सक्रिय हैं। ये संगठन न केवल हिंसा का सहारा लेते हैं, बल्कि धार्मिक उन्माद फैलाकर युवाओं को भड़काते भी हैं। इस्लामिक स्टेट (ISIS) ने भी भारत में अपने पैर फैलाने की कोशिश की है, जिसका उद्देश्य युवाओं को कट्टरपंथ की ओर आकर्षित करना और उन्हें आतंकवादी गतिविधियों में शामिल करना है।
धार्मिक सहिष्णुता और संवाद की आवश्यकता
इस्लामिक आतंकवाद के बढ़ते खतरों के बावजूद, यह महत्वपूर्ण है कि हम सभी धार्मिक और सांस्कृतिक समूहों के बीच संवाद और सहिष्णुता को बढ़ावा दें। समाज में बढ़ती असहिष्णुता और हिंसा का समाधान केवल कानून और बल के माध्यम से नहीं किया जा सकता। इसके लिए आवश्यक है कि धार्मिक नेताओं, सामाजिक संगठनों और समुदायों के बीच संवाद हो, ताकि कट्टरपंथी विचारधाराओं को रोका जा सके और समाज में शांति और सौहार्द्र बना रहे।
सामाजिक संगठनों की भूमिका
मुजफ्फरनगर की घटना के बाद, विभिन्न हिंदूवादी संगठनों ने एकजुट होकर अपनी आवाज उठाई है। ये संगठन इस तरह की घटनाओं के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए समाज में शांति और सुरक्षा की मांग कर रहे हैं। संयुक्त हिंदू मोर्चा, शिवसेना, हिंदू क्रांति दल, बजरंग दल, और अन्य संगठनों ने बिट्टू सिखेड़ा को मिली धमकी के खिलाफ खड़े होकर अपना समर्थन दिया है।
इन संगठनों की भूमिका महत्वपूर्ण है, लेकिन साथ ही यह भी जरूरी है कि इन संगठनों द्वारा उठाए गए मुद्दे समाज में विभाजन और तनाव पैदा न करें। हमें एक संतुलन बनाए रखने की जरूरत है, जहां हम कट्टरपंथी विचारधाराओं का विरोध कर सकें, साथ ही समाज के सभी वर्गों के बीच शांति और सौहार्द्र को बनाए रख सकें।
मुजफ्फरनगर की घटना ने एक बार फिर इस्लामिक आतंकवाद और “सर तन से जुदा” जैसी कट्टरपंथी विचारधाराओं की ओर हमारा ध्यान आकर्षित किया है। इस तरह की घटनाएं हमारे समाज की सुरक्षा और अखंडता के लिए गंभीर खतरा हैं।
हमें एकजुट होकर कट्टरपंथी विचारधाराओं का विरोध करना होगा, साथ ही धार्मिक सहिष्णुता और संवाद को बढ़ावा देना होगा।

