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Muzaffarnagar में फूटा साइबर फ्रॉड का बड़ा भांडा: विदेशी कॉल घोटाले में बड़ा नेटवर्क गिरफ्तार

Muzaffarnagar जिले में साइबर क्राइम थाने और दूरसंचार विभाग (डॉट) की संयुक्त कार्रवाई में एक बड़े और हाई-टेक साइबर फ्रॉड नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। इस पूरे मामले ने न केवल सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है, बल्कि सरकार को राजस्व के बड़े नुकसान का भी खुलासा किया है।

5 जून 2025 को मिली एक गोपनीय सूचना पर बुढ़ाना मोड़ क्षेत्र में दबिश दी गई, जहां से तीन शातिर साइबर अपराधियों को धर-दबोचा गया। ये आरोपी लंबे समय से अवैध तरीके से अंतरराष्ट्रीय कॉल को भारतीय कॉल में बदलने का नेटवर्क चला रहे थे।


गिरफ्तार आरोपी कौन हैं और कैसे कर रहे थे साइबर धोखाधड़ी?

गिरफ्तार किए गए अपराधियों की पहचान मोसीन पुत्र मंगत (उम्र 36 वर्ष, ग्राम काजीखेड़ा, थाना तितावी, मुजफ्फरनगर), सद्दाम हुसैन पुत्र मोहम्मद याकूब (उम्र 31 वर्ष, ग्राम कम्हेड़ा, थाना ककरौली, मुजफ्फरनगर) और मोहम्मद फिरोज पुत्र कमरुद्दीन (उम्र 26 वर्ष, मोहल्ला कल्याण सिंह, गली नंबर 11, थाना मवाना, मेरठ) के रूप में हुई है।

इन लोगों के पास से जो सामान बरामद हुआ है, वह भी चौंकाने वाला है –
3 डेस्क बॉक्स, 4 वाई-फाई राउटर, 7 मोबाइल फोन (3 एंड्रॉयड, 4 कीपैड), 40 सिम कार्ड, 1 लैपटॉप और कई हाई-टेक डिवाइसेज़ जब्त किए गए हैं। इन उपकरणों का इस्तेमाल अवैध टेलीफोन एक्सचेंज चलाने के लिए किया जा रहा था।


कैसे काम करता था पूरा नेटवर्क?

यह गिरोह फर्जी दस्तावेजों पर सिम कार्ड हासिल करता था और इन सिम कार्ड्स को VOIP (Voice Over Internet Protocol) तकनीक के साथ जोड़कर एक अवैध टेलीफोन एक्सचेंज तैयार करता था।

इस तकनीक का सबसे खतरनाक पक्ष यह था कि इससे विदेशी कॉल भारतीय नंबरों पर एक लोकल कॉल की तरह दिखाई देती थी, जिससे कॉल ट्रेस करना लगभग असंभव हो जाता था।

इसके चलते भारत सरकार को इंटरनेशनल कॉल टैक्स का नुकसान होता और देश की सुरक्षा को गंभीर खतरा उत्पन्न होता। साथ ही, कॉलर की पहचान भी छिपी रहती थी जिससे आतंकवादी और अंतरराष्ट्रीय अपराधी इसका लाभ उठा सकते थे।


क्रिप्टो में लेनदेन, विदेशी साइबर अपराधियों से जुड़ाव

पूछताछ में खुलासा हुआ है कि आरोपी केवल भारत में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराधियों से भी जुड़े हुए थे। उन्हें उनके द्वारा विदेशी कॉल्स के लिए प्लेटफॉर्म और नेटवर्क मुहैया कराया जाता था, बदले में इनको भुगतान क्रिप्टोकरेंसी के जरिए किया जाता था।

यह राशि भारत में ब्लैक मनी की तरह एक्सचेंज की जाती थी और विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए वैध रूप में बदल दी जाती थी। यह पूरा नेटवर्क डार्क वेब और गोपनीय इंटरनेट नेटवर्क्स के माध्यम से संचालित हो रहा था, जो अब तक पुलिस की पकड़ से बाहर था।


कितनी बड़ी है यह साइबर फ्रॉड की साजिश?

पुलिस अधिकारियों का मानना है कि यह केवल एक छोटी सी कड़ी है, पूरी चेन इससे कहीं अधिक फैली हुई है। इस तरह के अवैध एक्सचेंज दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड और पंजाब में भी सक्रिय हैं।

एसएसपी संजय वर्मा के अनुसार, इस नेटवर्क से जुड़े और भी कई लोग अब पुलिस के रडार पर हैं, जिनकी तलाश में टीम छापेमारी कर रही है। साथ ही, साइबर क्राइम थाने और डॉट विभाग की टीमें इस नेटवर्क के वित्तीय और तकनीकी पहलुओं की गहराई से जांच कर रही हैं।


अंतरराष्ट्रीय कॉल्स को लोकल बनाना: सरकार को करोड़ों का नुकसान

सिर्फ एक महीने में ऐसे नेटवर्क सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचा सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय कॉल्स से सरकार को टैक्स के रूप में एक बड़ी राशि मिलती है, लेकिन जब ये कॉल लोकल बन जाती हैं, तो यह टैक्स बाईपास हो जाता है।

इसके अलावा, ये नेटवर्क राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरे की घंटी हैं क्योंकि आतंकवाद और तस्करी जैसे गंभीर अपराधों में इस तकनीक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है।


डॉट और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में बरामदगी ने खोले कई राज

इस कार्रवाई में दूरसंचार विभाग मेरठ के सहायक निदेशक अनुराग द्विवेदी, प्रवीण जैन, और साइबर क्राइम थाने के प्रभारी निरीक्षक सुल्तान सिंह समेत 12 अधिकारियों की टीम शामिल थी।

इनकी सक्रियता और तकनीकी समझ ने इस पूरे गिरोह को धर-दबोचने में बड़ी भूमिका निभाई। पुलिस अब इस नेटवर्क की तकनीकी फॉरेंसिक जांच करा रही है ताकि और गहराई से जानकारी सामने लाई जा सके।


साइबर अपराध की बढ़ती घटनाएं: क्या आम आदमी है सुरक्षित?

आज जहां मोबाइल और इंटरनेट हर हाथ में है, वहीं साइबर अपराधी इसी तकनीक का गलत फायदा उठाकर मासूम लोगों को अपना निशाना बना रहे हैं।
फर्जी सिम, फेक KYC, क्रिप्टो ट्रांजेक्शन और VOIP कॉलिंग जैसे तरीकों से आम आदमी की निजता और देश की सुरक्षा को गहरी चोट पहुंच रही है।


कानून और एजेंसियों के लिए अब सबसे बड़ा चैलेंज

साइबर अपराधों की प्रकृति दिन-प्रतिदिन बदलती जा रही है। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को भी अब अपने तौर-तरीकों में आधुनिकता लानी होगी।
सरकार को चाहिए कि वो फर्जी सिम जारी करने पर सख्त सजा, क्रिप्टो करंसी के लेनदेन की निगरानी, और VOIP टूल्स पर विशेष निगरानी जैसे कदम उठाए।


देश की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों को मिलेगी कड़ी सजा

एसएसपी संजय वर्मा ने दो टूक शब्दों में कहा कि देश की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों पर विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आगे की पूछताछ की जा रही है। जल्द ही इस नेटवर्क से जुड़े बाकी अपराधियों को भी सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।


मुजफ्फरनगर में साइबर क्राइम के इस बड़े नेटवर्क के भंडाफोड़ से यह स्पष्ट हो गया है कि अब अपराधी भी तकनीक का इस्तेमाल करने में माहिर हो चुके हैं। ऐसे में आम जनता को भी सजग रहने की आवश्यकता है। साथ ही सरकार और एजेंसियों को चाहिए कि वे अपने साइबर इन्फ्रास्ट्रक्चर को और अधिक मजबूत बनाएं ताकि इस तरह के हाई-टेक अपराधों पर लगाम लगाई जा सके। यह मामला आने वाले समय में साइबर अपराध की जांच और सजा के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित हो सकता है।

 

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