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Muzaffarnagar में होमगार्ड हत्याकांड का फैसला: पुलिसकर्मी पर चाकू से जानलेवा हमला करने वाले आरोपी को मृत्युदंड, ₹1.10 लाख का अर्थदंड

Muzaffarnagar लगभग छह वर्ष पुराने चर्चित होमगार्ड हत्याकांड में जिला न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए दोषी करार दिए गए आरोपी को मृत्युदंड तथा ₹1,10,000 के अर्थदंड से दंडित किया है। न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों, पुलिस विवेचना और अभियोजन पक्ष की प्रभावी पैरवी के आधार पर यह निर्णय सुनाया।

यह मामला वर्ष 2020 में थाना कोतवाली नगर क्षेत्र में पुलिस टीम पर हमले और बाद में घायल होमगार्ड की उपचार के दौरान हुई मृत्यु से जुड़ा है।


पुलिस टीम पर हमले से शुरू हुआ था मामला

पुलिस के अनुसार 4 मई 2020 को थाना कोतवाली नगर में तैनात आरक्षी इस्लाम अली ने लिखित तहरीर देकर सूचना दी थी कि पुलिस टीम सरकारी कार्य कर रही थी, तभी आरोपी दीपक पुत्र लाल सिंह, निवासी डीलर वाली गली, बुधाना मोड़, थाना कोतवाली नगर, ने पुलिस टीम के साथ धक्का-मुक्की कर सरकारी कार्य में बाधा उत्पन्न की।

आरोप था कि इसी दौरान आरोपी ने होमगार्ड रतिराम पर जान से मारने की नीयत से चाकू से हमला किया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। शिकायत में पुलिसकर्मियों के साथ अभद्रता और जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया।


कई गंभीर धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा

प्राप्त तहरीर के आधार पर थाना कोतवाली नगर में आरोपी के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया गया।

पुलिस ने मामले की जांच शुरू करते हुए आवश्यक साक्ष्य जुटाए और 5 जून 2020 को आरोपी दीपक को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया।


उपचार के दौरान होमगार्ड रतिराम की हुई मृत्यु

घटना में गंभीर रूप से घायल हुए होमगार्ड रतिराम का लंबे समय तक उपचार चला। पुलिस के अनुसार 4 अक्टूबर 2020 को उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।

इसके बाद विवेचना के दौरान मामले में हत्या से संबंधित धारा 302 जोड़ी गई और जांच को आगे बढ़ाया गया।


घटना में प्रयुक्त चाकू भी हुआ बरामद

जांच के दौरान पुलिस ने घटना में प्रयुक्त चाकू भी बरामद किया। बरामदगी के आधार पर आरोपी के खिलाफ आयुध अधिनियम की संबंधित धाराओं में अलग से मुकदमा दर्ज किया गया।

विवेचना पूरी होने के बाद पुलिस ने निर्धारित समय सीमा में आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल कर दिया।


सशक्त विवेचना और प्रभावी पैरवी बनी फैसले का आधार

मुजफ्फरनगर पुलिस के अनुसार इस मामले में निष्पक्ष एवं गुणवत्तापूर्ण विवेचना करते हुए सभी आवश्यक साक्ष्य एकत्र किए गए।

अपराधियों को सजा दिलाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे अभियान के अंतर्गत वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा के निर्देशन में पूरे मामले की नियमित मॉनिटरिंग की गई।

पुलिस अधीक्षक नगर अमृत जैन, पुलिस अधीक्षक अपराध इन्दु सिद्धार्थ, सहायक पुलिस अधीक्षक/क्षेत्राधिकारी नगर सिद्धार्थ के. मिश्रा तथा थाना प्रभारी कोतवाली नगर बृजेश कुमार शर्मा के नेतृत्व में अभियोजन को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया गया।


अभियोजन पक्ष ने रखे मजबूत साक्ष्य

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से सभी महत्वपूर्ण गवाहों को समय पर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।

एडीजीसी कुलदीप सिंह तथा कोर्ट पैरोकार कांस्टेबल निजार-उल-हक ने भी अभियोजन पक्ष की ओर से प्रभावी पैरवी करते हुए न्यायालय के समक्ष उपलब्ध साक्ष्यों को विस्तार से प्रस्तुत किया।


न्यायालय ने सुनाई मृत्युदंड की सजा

2 जुलाई 2026 को एडीजे/एफटीसी कोर्ट संख्या-3, मुजफ्फरनगर के न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने मामले में अपना फैसला सुनाया।

न्यायालय ने आरोपी दीपक पुत्र लाल सिंह को हत्या सहित विभिन्न धाराओं में दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड तथा ₹1,10,000 (एक लाख दस हजार रुपये) के अर्थदंड से दंडित किया।


आगे की कानूनी प्रक्रिया भी होगी पूरी

भारतीय विधि व्यवस्था के अनुसार मृत्युदंड के मामलों में आगे की न्यायिक प्रक्रिया भी निर्धारित कानून के अनुसार पूरी की जाती है। संबंधित उच्च न्यायालय द्वारा ऐसे मामलों में विधिक प्रावधानों के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई की जाती है।


पुलिस ने फैसले को बताया प्रभावी विवेचना का परिणाम

मुजफ्फरनगर पुलिस का कहना है कि निष्पक्ष विवेचना, वैज्ञानिक तरीके से साक्ष्य संकलन और अभियोजन की प्रभावी पैरवी के कारण न्यायालय में मामला मजबूत ढंग से प्रस्तुत किया जा सका।

पुलिस अधिकारियों ने कहा कि गंभीर अपराधों में दोषियों को कानून के अनुसार सजा दिलाने के लिए भविष्य में भी इसी प्रकार प्रभावी कार्रवाई जारी रहेगी।

मुजफ्फरनगर के चर्चित होमगार्ड हत्याकांड में जिला न्यायालय द्वारा सुनाया गया फैसला पुलिस विवेचना और अभियोजन प्रक्रिया का महत्वपूर्ण परिणाम माना जा रहा है। न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड और अर्थदंड की सजा सुनाई है। भारतीय कानून के अनुसार मृत्युदंड से संबंधित मामलों में आगे की न्यायिक प्रक्रिया भी नियमानुसार पूरी की जाएगी।

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