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खतौली में बिजली विभाग के खिलाफ किसानों का बिगुल: बिना सूचना लोड बढ़ाने का आरोप, भाकियू (अराजनैतिक) Muzaffarnagar का अनिश्चितकालीन धरना एलान

Muzaffarnagar  खतौली में भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के कार्यकर्ताओं ने बिजली विभाग के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए एक्शन ऑफिस पर अनिश्चितकालीन धरना देने की घोषणा कर दी है। किसानों का आरोप है कि विद्युत विभाग बिना किसी पूर्व सूचना के उपभोक्ताओं के बिजली कनेक्शन की लोड क्षमता बढ़ा रहा है, जिससे उन पर जबरदस्त आर्थिक बोझ डाला जा रहा है।


🔴 बिजली विभाग पर गंभीर आरोप, किसानों में आक्रोश

भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के ब्लॉक अध्यक्ष गुड्डू चौधरी ने आरोप लगाया कि बिजली विभाग की यह कार्रवाई पूरी तरह मनमानी और उपभोक्ता विरोधी है। उनका कहना है कि जिन किसानों और ग्रामीण उपभोक्ताओं के पास पहले से 1 किलोवाट का बिजली कनेक्शन था, उन्हें बिना किसी लिखित या मौखिक सूचना के सीधे 2 और 3 किलोवाट में परिवर्तित कर दिया गया।

इस अचानक किए गए बदलाव के कारण बिजली बिल कई गुना बढ़ गए हैं, जिससे पहले से ही महंगाई की मार झेल रहे किसानों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।


🔴 बिना सूचना लोड बढ़ाने से बढ़ा आर्थिक बोझ

Khatauli electricity protest farmers के पीछे सबसे बड़ा मुद्दा यही है कि बिजली कनेक्शन की लोड क्षमता बढ़ाने से फिक्स्ड चार्ज, डिमांड चार्ज और अन्य शुल्क अपने आप बढ़ जाते हैं। किसानों का आरोप है कि उन्हें न तो कोई नोटिस दिया गया और न ही उनकी सहमति ली गई।

ग्रामीण उपभोक्ताओं का कहना है कि कई मामलों में छोटे घरेलू कनेक्शन को भी ज्यादा लोड दिखाकर भारी-भरकम बिल थमा दिए गए हैं, जिन्हें चुकाना उनके लिए लगभग असंभव हो गया है।


🔴 आंदोलन का ऐलान, अनिश्चितकालीन धरने की चेतावनी

भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) ने साफ शब्दों में कहा है कि यदि बिजली विभाग ने जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं किया, गलत तरीके से बढ़ाए गए लोड को वापस नहीं लिया और संशोधित बिल जारी नहीं किए, तो संगठन अनिश्चितकालीन धरना शुरू करेगा।

ब्लॉक अध्यक्ष ने चेतावनी दी कि यह आंदोलन केवल धरने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जरूरत पड़ने पर इसे और व्यापक रूप दिया जाएगा। Khatauli electricity protest farmers आने वाले दिनों में जिला स्तर तक फैल सकता है।


🔴 किसानों का सवाल: नियम हैं तो सूचना क्यों नहीं?

किसानों ने सवाल उठाया है कि यदि बिजली विभाग के पास लोड बढ़ाने का कोई नियम या तकनीकी आधार है, तो इसकी जानकारी उपभोक्ताओं को पहले क्यों नहीं दी गई। भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) का कहना है कि पारदर्शिता के अभाव में की गई ऐसी कार्रवाई सीधे तौर पर उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है।

किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि कई मामलों में मीटर रीडिंग और लोड आकलन में गड़बड़ी कर जानबूझकर बिल बढ़ाए गए हैं।


🔴 संगठन की एकजुटता, बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद

Khatauli electricity protest farmers के दौरान संगठन की मजबूती भी देखने को मिली। धरने और विरोध प्रदर्शन में संजू समोली, फारूक भूड़ खतौली, अनुज वालिया, भूप खेड़ी, सुनील चलसीना, बिट्टू चांद समंद, शादाब खोखनी, रविंदर, धर्मेंद्र संजू, जावेद नगला सहित बड़ी संख्या में भाकियू (अराजनैतिक) के कार्यकर्ता मौजूद रहे।

सभी ने एक सुर में कहा कि जब तक किसानों और आम उपभोक्ताओं के साथ हो रहे अन्याय को रोका नहीं जाएगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।


🔴 ग्रामीण इलाकों में बिजली बिल बना बड़ा मुद्दा

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली बिल पहले से ही एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है। खेती के लिए सिंचाई, घरेलू उपयोग और छोटे व्यवसायों की निर्भरता बिजली पर बढ़ती जा रही है। ऐसे में Khatauli electricity protest farmers केवल एक कस्बे की समस्या नहीं, बल्कि व्यापक ग्रामीण असंतोष का संकेत माना जा रहा है।

किसानों का कहना है कि सरकार एक ओर किसानों की आय बढ़ाने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर बिजली विभाग की ऐसी नीतियां उनकी कमर तोड़ रही हैं।


🔴 प्रशासन पर दबाव, निगाहें बातचीत पर

धरने की घोषणा के बाद स्थानीय प्रशासन और बिजली विभाग पर दबाव बढ़ गया है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या विभाग किसानों से बातचीत कर कोई समाधान निकालता है या फिर आंदोलन और तेज होता है।

भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) ने स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य टकराव नहीं, बल्कि न्याय है। यदि समस्याओं का समाधान ईमानदारी से किया गया, तो आंदोलन खत्म किया जा सकता है।


खतौली में बिजली विभाग के खिलाफ उठी किसानों की आवाज केवल लोड बढ़ोतरी का मामला नहीं, बल्कि पारदर्शिता, भरोसे और उपभोक्ता अधिकारों की लड़ाई है। भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) का यह आंदोलन आने वाले समय में ग्रामीण बिजली व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही की दिशा तय कर सकता है।

 

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