Muzaffarnagar News: श्रीराम कालेज में पांच दिवसीय फैकल्टी डवलपमेंट प्रोग्राम का आयोजन
मुजफ्फरनगर। (Muzaffarnagar News) श्रीराम ग्रुप ऑफ कॉलेजेज, मुजफ्फरनगर के इंजीनियरिंग विभाग के कम्प्यूटर सांइस एंड इंजीनियरिंग संकाय द्वारा ५ दिवसीय राष्ट्रीय शॉर्ट टर्म कोर्स /फैकल्टी डवलपमेंट प्रोग्राम का आयोजन किया गया। जिसका शीर्षक भारत में बौद्धिक सम्पदा अधिकार एवं पेटेंट रहा। इस फैकल्टी डवलपमेंट प्रोग्राम के आयोजन के लिए राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षण एवम् अनुसंधान संस्थान (एन०आई०टी०टी०टी०आर०) चंडीगढ, द्वारा श्रीराम ग्रुप ऑफ कॉलेजेज को विडियो कान्फ्रेन्सिंग के माध्यम से इस फैकल्टी डवलपमेंट कार्यशाला को आयोजित करने के लिए रिमोट सैन्टर नियुक्त किया गया
जिसके लिये कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग के विभागाध्यक्ष प्रो० पवन कुमार गोयल ने लोकल कोॅर्डिनेटर की भूमिका निभाई। सन २०१२ से एन०आई०टी०टी०टी०आर० चंडीगढ ने चंडीगढ़ की यात्रा किये बिना तकनीकी संसथानों के शिक्षकों को इन कार्यक्रमों से लाभान्वित करने में सक्षम बनाने के लिए आई.सी.टी. के माध्यम से प्रशिक्षण कार्यक्रमों की पेशकश प्रारम्भ की थी और आई.सी.टी. माध्यम से प्रशिक्षण कार्यक्रम से सम्बन्धित के विशेषज्ञों द्वारा एन०आई०टी०टी०टी०आर० चंडीगढ से जुड़े दूरस्थ केन्द्रों में प्रसारित किये जाते हैं।
कार्यक्रम का शुभारम्भ मुख्य अतिथि डॉ० एस०सी० कुलश्रेष्ठ, चौयरमैन श्रीराम ग्रुप ऑफ कॉलेजेज द्वारा दीपप्रज्वलित करके किया गया। डॉ० एस०सी० कुलश्रेष्ठ, चौयरमेन श्रीराम ग्रुप ऑफ कॉलेजेज ने राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षण एवम् अनुसंधान संस्थान (एन०आई०टी०टी०टी०आर०) चंडीगढ के प्रो० नीरजबाला एवं इंजी० अमरदेव सिंह, डिपार्टमेंट ऑफ एन्टरप्रिन्योरशिप डेवलपमेंट एण्ड इण्डस्ट्रीयल कोलेबोरेशन को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रमों से श्रीराम ग्रुप ऑफ कॉलेजेज के शिक्षकों एवम् छात्रों के तकनीकि ज्ञान मे निश्चित वृद्धि होगी
उन्होंने कहा कि बौद्धिक सम्पदा किसी व्यक्ति द्वारा सृजित कोई साहित्यिक कृति, कला, प्रतीक, नाम, चित्र, डिजाईन, कॉपीराइट, पेटेन्ट, ट्रेडमार्क आदि को कहते हैं। बौद्धिक सम्पदा अधिकार व्यक्तियों को उनके दिमाग की रचनाओं पर दिये गये अधिकार हैं। वे आमतौर पर निर्माता को एक निश्चित अवधि के लिये उसकी रचना के उपयोग पर एक विशेष अधिकार देते हैं।
इस अवसर पर कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग के विभागाध्यक्ष प्रो० पवन कुमार गोयल ने कार्यक्रम के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इस फैकल्टी डवलपमेंट प्रोग्राम के अन्तर्गत विभिन्न विषयों पर चर्चा की गयी जैसे बौद्धिक सम्पदा अधिकार (आईपीआर) और पेटेन्ट का परिचय, रचनात्मकता और नवाचार को बढ़ावा देना, लाइसेंसिंग और प्रौद्योगिकी हस्तान्तरण, कॉपीराइट, डब्ल्यू.टी.ओ. ट्रिप्स समझौते के प्रावधान, पेटेन्ट दाखिल करना, तकनीकी पेटेन्ट आवेदन भरना, औद्योगिक डिजाइन, प्रतिस्पर्धात्मक लाभ के लिये पेटेन्ट का प्रबन्धन, बिजनेस स्टार्टअप की सुविधा के दृष्टिकोण से भारतीय आई.पी.आर. पारिस्थितिकी तन्त्र में नवीनतम विकास, एक पेटेन्ट विशिष्टता का लेआउट और पेटेन्ट फाइलिंग में प्रारूपण और कानूनी लेखन शर्तें एवं पेटेन्ट खोज आदि। इस कार्यशाला में श्रीराम समूह के विभिन्न संस्थानों के विभिन्न संकायों के २५ शिक्षकां ने प्रतिभाग किया।
इस अवसर पर संस्थान निदेशक डॉ० आलोक गुप्ता ने सभी प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रमों के माध्यम से अध्यापकों का तकनीकी ज्ञान विकसित होता हैं तथा उनके आत्मविश्वास मे भी वृद्धि होती है जिससे वे छात्रों को तकनीकी शिक्षा द्वारा भविष्य में आने वाली चुनौतियों के लिये तैयार कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि पेटेंट, ट्रेडमार्क, कॉपीराइट और ट्रेड सीक्रेट, ये सब च्इंटलेक्चुअल प्रॉपर्टीज् यानी बौद्धिक संपदा के तहत आते हैं। यानी एक ऐसा प्रॉडक्ट, जो क्रिएटिव दिमाग की उपज है। दरअसल इंटलेक्चुअल प्रॉपर्टी कल्पना को वास्तविकता में परिवर्तित करता है।
इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी भी वैसे ही एक संपत्ति है, जैसे कि आपका घर, गाड़ी और यहां तक कि आपका बैंक अकाउंट। दूसरी संपत्तियों की तरह ही इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी को भी चोरी या गलत इस्तेमाल से बचाने की जरूरत होती है, तब ही आप इससे लाभ ले सकते हैं। कुछ लोग पेटेंट, कॉपीराइट और ट्रेडमार्क में विचलित हो जाते हैं। हालाकि इन सबमें कुछ समानता हो सकती है, लेकिन ये अलग-अलग हैं और इनका उद्देश्य भी अलग होता है।
इस अवसर पर डीन-एकेडिमिक प्रो० साक्षी श्रीवास्तव ने सभी प्रतिभागियों की प्रतिभागिता पर उनको आभार प्रकट किया एवं राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षण एवम् अनुसंधान संस्थान (एन०आई०टी०टी०टी०आर०) चंडीगढ के विशेषज्ञो का विशेष आभार प्रकट किया एवं कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन छात्रों एवं शिक्षकों के ज्ञानवर्द्धन हेतु आगे भी किया जाता रहेगा। कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिये उन्होंने कम्प्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग विभाग के सभी शिक्षकगणों को बधाई दी।
कार्यशाला को सफल बनाने में कम्प्यूटर सांइस एडं इंजीनियरिंग विभागाध्यक्ष प्रो० पवन कुमार गोयल एवं अध्यापकगण देवेश मलिक, रूचि राय, श्री व्योम शर्मा एवं शुभी वर्मा का विशेष योगदान रहा।

