Muzaffarnagar और आसपास से प्रमुख खबरें

NHM कर्मचारियों के समर्थन में उतरे चौधरी नरेश टिकैत, CM योगी को लिखा पत्र; बोले—मांगें पूरी नहीं हुईं तो सड़कों पर उतरेगी भाकियू

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों का आंदोलन सातवें दिन भी जारी रहा। भारी बारिश के बीच भी कर्मचारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कार्यालय पर धरने में डटे रहे। आंदोलन के दौरान अब भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत का समर्थन मिलने से मामला और महत्वपूर्ण हो गया है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर संविदा कर्मचारियों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने, उनका मानदेय बढ़ाने और कर्मचारियों के खिलाफ कथित उत्पीड़नात्मक कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाने का अनुरोध किया है।

कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आवाज उठा रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। दूसरी ओर, एक दिन पहले मुख्य चिकित्सा अधिकारी की ओर से कार्रवाई संबंधी पत्र जारी किए जाने के बाद कर्मचारियों में रोष बढ़ने की बात सामने आई है। इसी पृष्ठभूमि में चौधरी नरेश टिकैत ने कर्मचारियों के पक्ष में आवाज उठाते हुए सरकार से बातचीत और समाधान की दिशा में आगे बढ़ने की अपील की है।

चौधरी नरेश टिकैत ने कर्मचारियों की मांगों को जायज बताते हुए कहा कि वर्तमान महंगाई के दौर में कम मानदेय पर काम करने वाले संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान होना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कर्मचारियों के खिलाफ दमनकारी नीति अपनाई गई और उत्पीड़नात्मक कार्रवाई बंद नहीं हुई, तो भारतीय किसान यूनियन उनके समर्थन में सड़कों पर उतरने से पीछे नहीं हटेगी।

सातवें दिन भी नहीं टूटा कर्मचारियों का हौसला, बारिश में जारी रहा धरना

मुजफ्फरनगर NHM संविदा कर्मचारी आंदोलन सातवें दिन भी जारी रहने से कर्मचारियों की मांगों और प्रशासन के साथ उनके विवाद का मुद्दा चर्चा में बना हुआ है। भारी बारिश के बावजूद संविदा स्वास्थ्य कर्मियों ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय पर धरना जारी रखा। कर्मचारियों की मौजूदगी और कार्य बहिष्कार जारी रहने से संगठन की एकजुटता सामने आई।

आंदोलन कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि वे अपनी समस्याओं के समाधान के लिए लंबे समय से प्रयास कर रहे हैं। उनकी प्रमुख मांगों में नियमितीकरण, समान कार्य के लिए समान वेतन और अन्य लंबित मुद्दों पर शीघ्र निर्णय शामिल हैं। कर्मचारियों का तर्क है कि लंबे समय तक संविदा व्यवस्था में काम करने के बावजूद उनकी सेवा संबंधी समस्याओं का समाधान नहीं होने से उनके भविष्य को लेकर चिंता बनी रहती है।

सात दिनों से जारी धरने के बीच कर्मचारियों ने स्पष्ट किया है कि वे अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने के बजाय समाधान की उम्मीद में आंदोलन जारी रखेंगे। भारी बारिश के दौरान भी धरने में शामिल रहना उनके विरोध की निरंतरता को दर्शाता है। हालांकि, आंदोलन समाप्त होने की कोई निश्चित तारीख उपलब्ध जानकारी में सामने नहीं आई है।

इस घटनाक्रम में अब भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत का समर्थन भी जुड़ गया है। उनके मुख्यमंत्री को लिखे पत्र से कर्मचारियों की मांगों को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा बढ़ने की संभावना है। फिलहाल, सरकार की ओर से इस पत्र पर क्या प्रतिक्रिया आती है और वार्ता की प्रक्रिया कब शुरू होती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

चौधरी नरेश टिकैत ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को क्यों लिखा पत्र?

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर NHM संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों की समस्याओं पर ध्यान देने का अनुरोध किया है। पत्र में कर्मचारियों को मिलने वाले मानदेय को वर्तमान महंगाई के मुकाबले कम बताते हुए उसमें सम्मानजनक और समान रूप से वृद्धि किए जाने की जरूरत पर जोर दिया गया है।

चौधरी नरेश टिकैत के अनुसार, कर्मचारियों को ऐसा मानदेय मिलना चाहिए जिससे वे अपने परिवार का भरण-पोषण सम्मानपूर्वक कर सकें। उन्होंने सरकार से कर्मचारियों की मांगों को गंभीरता से लेने और उनके समाधान के लिए सकारात्मक निर्णय करने की अपील की है।

पत्र में यह भी कहा गया है कि कर्मचारी अपने मानदेय और अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। इसे राजनीतिक आंदोलन के बजाय कर्मचारियों के अधिकारों और भविष्य से संबंधित विषय के रूप में देखा जाना चाहिए। चौधरी टिकैत ने सरकार से आग्रह किया कि कर्मचारियों की समस्याओं का संज्ञान लेकर बातचीत के माध्यम से समाधान तलाशा जाए।

कर्मचारियों के आंदोलन के बीच मुख्यमंत्री को पत्र लिखे जाने को महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। इससे कर्मचारी संगठन की मांगों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश हुई है। हालांकि, पत्र पर मुख्यमंत्री या राज्य सरकार की ओर से किसी प्रतिक्रिया अथवा निर्णय की पुष्टि उपलब्ध समाचार विवरण में नहीं की गई है।

कम मानदेय और बढ़ती महंगाई का मुद्दा, परिवार चलाने में कठिनाई का तर्क

चौधरी नरेश टिकैत ने अपने पत्र में NHM संविदा कर्मचारियों के मानदेय का मुद्दा प्रमुखता से उठाया है। उनका कहना है कि वर्तमान महंगाई के दौर में कर्मचारियों को मिलने वाला मानदेय अत्यंत कम है। ऐसे में मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि करना आवश्यक है, ताकि कर्मचारी अपने परिवार की जरूरतें पूरी कर सकें।

महंगाई का असर दैनिक जरूरतों, आवास, परिवहन, शिक्षा और परिवार के दूसरे खर्चों पर पड़ता है। ऐसे में नियमित आय पर निर्भर कर्मचारियों के लिए वेतन या मानदेय का स्तर उनके जीवन की आर्थिक स्थिरता से जुड़ा होता है। संविदा कर्मचारियों की ओर से मानदेय में वृद्धि की मांग इसी व्यापक आर्थिक संदर्भ में सामने आई है।

हालांकि, उपलब्ध समाचार विवरण में कर्मचारियों को वर्तमान में मिलने वाले मानदेय की राशि, अलग-अलग पदों के वेतनमान या प्रस्तावित वृद्धि की सटीक दर नहीं दी गई है। इसलिए किसी निश्चित रकम या प्रतिशत को उनकी मांग के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा। पत्र में मुख्य रूप से सम्मानजनक और समान रूप से मानदेय बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।

चौधरी टिकैत ने सरकार से आग्रह किया है कि कर्मचारियों की आर्थिक परिस्थितियों और उनकी मांगों को गंभीरता से समझते हुए समाधान की दिशा में कदम उठाए जाएं। अब यह देखना होगा कि संबंधित विभाग और सरकार इस मांग पर किस तरह विचार करते हैं।

उत्पीड़नात्मक कार्रवाई का आरोप, नरेश टिकैत की सख्त चेतावनी

इस आंदोलन के दौरान मुख्य चिकित्सा अधिकारी की ओर से कार्रवाई संबंधी पत्र जारी किए जाने के बाद कर्मचारियों में रोष बढ़ने की बात सामने आई है। इसी घटनाक्रम के संदर्भ में चौधरी नरेश टिकैत ने कर्मचारियों के खिलाफ कथित उत्पीड़नात्मक कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की है।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कर्मचारियों के खिलाफ दमनकारी नीति अपनाई गई और ऐसी कार्रवाई बंद नहीं हुई, तो भारतीय किसान यूनियन उनके समर्थन में सड़कों पर उतर सकती है। यह बयान आंदोलन को लेकर संगठन की स्थिति को स्पष्ट करता है। चौधरी टिकैत ने कर्मचारियों की मांगों को जायज बताते हुए सरकार से समाधान की दिशा में सकारात्मक कदम उठाने का आग्रह किया है।

कर्मचारियों की ओर से भी प्रशासनिक कार्रवाई के बजाय संवाद के माध्यम से विवाद सुलझाने पर जोर दिया जा रहा है। डॉ. सुदेश वर्मा ने कहा कि कार्रवाई संबंधी पत्र जारी होने के बावजूद कर्मचारियों का मनोबल कमजोर नहीं पड़ा है। उनके अनुसार, कर्मचारी निर्धारित समय पर धरने में शामिल हो रहे हैं और अपनी मांगों को लेकर एकजुट हैं।

हालांकि, कार्रवाई संबंधी पत्र में क्या निर्देश दिए गए हैं और प्रशासन की ओर से कार्रवाई का आधार क्या बताया गया है, इसका विस्तृत विवरण उपलब्ध समाचार में नहीं है। इसलिए इस मामले में प्रशासन की आधिकारिक स्थिति और पत्र की वास्तविक विषयवस्तु सामने आना भी महत्वपूर्ण रहेगा।

डॉ. सचिन जैन बोले—लंबे समय से उठाई जा रही हैं मांगें

एनएचएम संविदा कर्मचारी संघ के जिला अध्यक्ष डॉ. सचिन जैन ने बताया कि भारी बारिश के बावजूद सातवें दिन भी कर्मचारियों ने कार्य बहिष्कार जारी रखते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय पर धरना दिया। उन्होंने कहा कि कर्मचारी लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आवाज उठा रहे हैं, लेकिन अब तक समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो सका है।

डॉ. सचिन जैन के अनुसार, कर्मचारियों की मांगों पर शीघ्र निर्णय लिया जाना चाहिए। उन्होंने नियमितीकरण, समान कार्य के लिए समान वेतन और अन्य लंबित मुद्दों के समाधान की अपील की। कर्मचारी संगठन का कहना है कि उनकी समस्याओं को लगातार लंबित रखने के बजाय सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए।

नियमितीकरण और समान काम के लिए समान वेतन की मांग संविदा कर्मचारियों के लिए सेवा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता से जुड़ी हुई है। हालांकि, इन मांगों पर निर्णय संबंधित नियमों, नीतियों और लागू सेवा शर्तों के दायरे में लिया जाना होता है। इस कारण सरकार और कर्मचारी संगठन के बीच विस्तृत चर्चा महत्वपूर्ण हो सकती है।

डॉ. सचिन जैन ने आंदोलन जारी रहने की जानकारी देते हुए कर्मचारियों की एकजुटता पर जोर दिया। धरने में लगातार उपस्थिति और कार्य बहिष्कार जारी रहने से स्पष्ट है कि संगठन फिलहाल अपनी मांगों के समाधान की प्रतीक्षा कर रहा है।

डॉ. सुदेश वर्मा ने कहा—कर्मचारियों की एकजुटता बरकरार

डॉ. सुदेश वर्मा ने कहा कि प्रशासन की ओर से कार्रवाई संबंधी पत्र जारी किए जाने के बावजूद कर्मचारियों के हौसले कमजोर नहीं हुए हैं। उनके अनुसार, कोई भी कर्मचारी काम पर वापस नहीं लौटा और सभी निर्धारित समय पर धरने में शामिल हो रहे हैं। उन्होंने इसे कर्मचारियों की एकजुटता का संकेत बताया।

डॉ. सुदेश वर्मा ने कहा कि कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे में प्रशासन को दमनात्मक कार्रवाई के बजाय बातचीत के माध्यम से समस्या का समाधान निकालना चाहिए। उनके बयान में यह संदेश प्रमुख रहा कि कर्मचारियों की मांगों पर सुनवाई और समाधान के लिए संवाद जरूरी है।

कर्मचारी आंदोलनों में संगठन की एकजुटता का असर आगे की बातचीत और आंदोलन की दिशा पर पड़ सकता है। जब कर्मचारी किसी साझा मांग के समर्थन में लगातार धरने पर बैठे रहते हैं, तो उनकी समस्याओं पर चर्चा की आवश्यकता और अधिक स्पष्ट हो जाती है। हालांकि, आंदोलन की अवधि और उसका भविष्य संबंधित पक्षों के निर्णयों पर निर्भर करता है।

फिलहाल, डॉ. सुदेश वर्मा ने आंदोलन जारी रहने और कर्मचारियों के एकजुट रहने की बात कही है। अब यह देखना होगा कि प्रशासन और कर्मचारी संगठन के बीच कोई औपचारिक वार्ता शुरू होती है या नहीं।

स्टाफ नर्स डिंपल ने दी चेतावनी, आपातकालीन सेवाएं फिलहाल बहाल

स्टाफ नर्स डिंपल ने बताया कि आंदोलन के दौरान फिलहाल आपातकालीन सेवाएं बहाल रखी गई हैं। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने आंदोलन को जबरन कुचलने का प्रयास किया और कर्मचारियों की मांगों की अनदेखी जारी रखी, तो आंदोलन और व्यापक हो सकता है। उन्होंने सरकार से समस्याओं का जल्द समाधान करने की अपील की।

आपातकालीन सेवाओं का जारी रहना मरीजों की सुरक्षा और जरूरी उपचार की उपलब्धता के लिहाज से महत्वपूर्ण है। स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े किसी भी आंदोलन के दौरान यह सुनिश्चित करना आवश्यक होता है कि गंभीर स्थिति में मरीजों को आवश्यक सहायता मिल सके। डिंपल के बयान के अनुसार, आंदोलन के दौरान फिलहाल आपातकालीन सेवाएं बहाल रखी गई हैं।

उन्होंने सरकार से सकारात्मक पहल करने और स्वास्थ्य सेवाओं को सामान्य बनाने की दिशा में कदम उठाने का आग्रह किया। कर्मचारियों की मांगों पर समाधान निकलने से आंदोलन समाप्त करने और नियमित कामकाज बहाल करने का रास्ता बन सकता है। दूसरी ओर, मांगों पर सुनवाई में देरी होने पर आंदोलन आगे बढ़ने की चेतावनी भी दी गई है।

फिलहाल, उपलब्ध जानकारी में आपातकालीन सेवाओं की अलग-अलग इकाइयों या उनकी कार्यप्रणाली का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है। इसलिए इस संबंध में अंतिम स्थिति जानने के लिए संबंधित स्वास्थ्य विभाग की आधिकारिक जानकारी महत्वपूर्ण होगी।

नियमितीकरण और समान काम के लिए समान वेतन की मांग क्यों महत्वपूर्ण?

एनएचएम संविदा कर्मचारियों ने नियमितीकरण, समान कार्य के लिए समान वेतन और अन्य लंबित मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने की अपील की है। ये मांगें कर्मचारियों की सेवा शर्तों, आय और भविष्य की सुरक्षा से जुड़ी हैं। संविदा व्यवस्था में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए सेवा की निरंतरता और आर्थिक स्थिरता जैसे विषय लंबे समय तक महत्वपूर्ण बने रह सकते हैं।

नियमितीकरण की मांग का संबंध कर्मचारियों की सेवा स्थिति को लेकर स्पष्टता से है। वहीं, समान कार्य के लिए समान वेतन की मांग इस विचार पर आधारित है कि समान प्रकृति और जिम्मेदारी वाला काम करने वाले कर्मचारियों की पारिश्रमिक व्यवस्था पर उचित विचार किया जाना चाहिए। हालांकि, इन मांगों पर अंतिम निर्णय लागू नियमों, पात्रता, सेवा शर्तों और सरकारी नीतियों के अनुसार ही लिया जा सकता है।

इस मामले में कर्मचारी संगठन ने अपनी मांगों पर शीघ्र निर्णय की आवश्यकता जताई है। सरकार के लिए चुनौती यह होगी कि वह कर्मचारियों की समस्याओं को सुने और लागू नियमों के अनुरूप संभावित समाधान की प्रक्रिया स्पष्ट करे। किसी भी निर्णय से पहले संबंधित पक्षों के बीच बातचीत से मांगों और उनके आधार को समझने में मदद मिल सकती है।

मुजफ्फरनगर में सात दिनों से जारी आंदोलन ने इन मांगों को स्थानीय स्तर पर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। चौधरी नरेश टिकैत का समर्थन मिलने के बाद अब कर्मचारियों की मांगों पर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर नजर रहेगी।

भाकियू के समर्थन से आंदोलन को मिला नया सहारा

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत के समर्थन में सामने आने से संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों के आंदोलन को सार्वजनिक स्तर पर अतिरिक्त ध्यान मिला है। मुख्यमंत्री को लिखे पत्र के जरिए उन्होंने कर्मचारियों की मांगों को गंभीरता से लेने और कथित उत्पीड़नात्मक कार्रवाई रोकने का अनुरोध किया है।

किसान संगठनों की भूमिका अक्सर किसानों से जुड़े मुद्दों तक सीमित नहीं रहती; विभिन्न सामाजिक और कर्मचारी मुद्दों पर भी संगठन अपना पक्ष रख सकते हैं। इस मामले में चौधरी टिकैत ने संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति, मानदेय और अधिकारों से संबंधित मुद्दे उठाए हैं। उन्होंने साफ कहा है कि यदि कर्मचारियों के खिलाफ दमनकारी कार्रवाई जारी रही, तो भारतीय किसान यूनियन उनके समर्थन में सड़कों पर उतर सकती है।

हालांकि, भाकियू की ओर से आगे किसी प्रदर्शन की तारीख, स्थान या विस्तृत कार्यक्रम की घोषणा उपलब्ध समाचार विवरण में नहीं दी गई है। इसलिए फिलहाल इसे चेतावनी और समर्थन के बयान के रूप में ही प्रस्तुत करना उचित है।

अब आंदोलन के आगे बढ़ने की दिशा सरकार और प्रशासन की प्रतिक्रिया, कर्मचारियों की मांगों पर होने वाली बातचीत और संबंधित पक्षों के निर्णयों पर निर्भर करेगी।

स्वास्थ्य सेवाओं को सामान्य बनाए रखना भी बड़ी चुनौती

एनएचएम संविदा कर्मचारियों का आंदोलन ऐसे क्षेत्र से जुड़ा है, जिसका सीधा संबंध आम नागरिकों की स्वास्थ्य जरूरतों से है। स्वास्थ्य सेवाओं में कर्मचारियों की उपलब्धता और नियमित कामकाज मरीजों को समय पर उपचार दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए कर्मचारियों की मांगों का समाधान तलाशने के साथ-साथ जरूरी स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता बनाए रखना भी आवश्यक है।

कर्मचारी नेताओं ने बताया कि आंदोलन के दौरान फिलहाल आपातकालीन सेवाएं बहाल रखी गई हैं। इसके बावजूद आंदोलन की अवधि बढ़ने पर स्वास्थ्य विभाग के नियमित कामकाज पर क्या असर पड़ेगा, यह संबंधित सेवाओं और उपलब्ध कर्मचारियों की स्थिति पर निर्भर करेगा। इस संबंध में कोई निश्चित अनुमान लगाना उचित नहीं होगा।

सरकार और कर्मचारी संगठन के बीच संवाद शुरू होने से दोनों पक्षों को अपनी स्थिति स्पष्ट करने और समाधान के विकल्प तलाशने का अवसर मिल सकता है। इससे कर्मचारियों की मांगों पर चर्चा के साथ-साथ मरीजों को होने वाली संभावित परेशानी कम करने की दिशा में भी प्रयास किए जा सकते हैं।

स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े विवादों में समय पर संवाद, स्पष्ट जानकारी और जिम्मेदार प्रशासनिक निर्णय महत्वपूर्ण होते हैं। मुजफ्फरनगर में जारी आंदोलन के बीच भी इन पहलुओं पर ध्यान देना जरूरी है।

धरने में शामिल रहे ये कर्मचारी

सातवें दिन मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय पर जारी धरने में जिला अध्यक्ष डॉ. सचिन जैन के साथ डॉ. राहुल वर्मा, डॉ. शमशेर, डॉ. विजीत, डॉ. रमाशंकर, जुनैद, रवि कुमार, लवलेश, डॉ. देवेंद्र, डॉ. प्रवीण, डॉ. सुधा, डॉ. वेद भूषण, डॉ. चेतन, डॉ. विकास, समीना नाज, निर्मला चौधरी, एहतेशाम, डॉ. गौरव, डॉ. आमिर, हिमांशु त्यागी और राकेश सहित अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे।

कर्मचारियों ने धरने के दौरान अपनी मांगों के समर्थन में एकजुटता प्रदर्शित की और सरकार से जल्द समाधान की मांग की। आंदोलन में शामिल कर्मचारियों का कहना है कि वे अपनी मांगों को लेकर लंबे समय से प्रयास कर रहे हैं और अब सरकार को इस विषय पर गंभीरता से निर्णय लेना चाहिए।

अब सरकार के अगले कदम पर टिकी निगाहें

मुजफ्फरनगर NHM संविदा कर्मचारी आंदोलन के सातवें दिन चौधरी नरेश टिकैत का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखना घटनाक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। कर्मचारियों की ओर से नियमितीकरण, समान काम के लिए समान वेतन, मानदेय में वृद्धि और अन्य लंबित मांगों पर निर्णय लेने की अपील की जा रही है। वहीं, भाकियू अध्यक्ष ने कथित उत्पीड़नात्मक कार्रवाई रोकने की मांग करते हुए जरूरत पड़ने पर कर्मचारियों के समर्थन में सड़कों पर उतरने की चेतावनी दी है।

फिलहाल, मुख्यमंत्री या राज्य सरकार की ओर से पत्र पर किसी निर्णय अथवा वार्ता की तारीख की पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है। इसलिए आंदोलन के समाप्त होने या उसके अगले चरण के बारे में कोई निश्चित दावा नहीं किया जा सकता। आगे की स्थिति संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया, बातचीत और कर्मचारियों की मांगों पर होने वाली प्रगति से स्पष्ट होगी।

मुजफ्फरनगर में एनएचएम संविदा कर्मचारियों का आंदोलन सातवें दिन भी जारी रहने के बीच भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर कर्मचारियों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने और कथित उत्पीड़नात्मक कार्रवाई रोकने का अनुरोध किया है। कर्मचारियों ने नियमितीकरण, समान काम के लिए समान वेतन और मानदेय में वृद्धि की मांग दोहराई है। फिलहाल सरकार की प्रतिक्रिया और वार्ता की संभावित शुरुआत पर निगाहें टिकी हैं। आंदोलन का समाधान बातचीत और संबंधित पक्षों के निर्णयों पर निर्भर करेगा।

Shyama Charan Panwar

एस0सी0 पंवार (वरिष्ठ अधिवक्ता) टीम के निदेशक हैं, समाचार और विज्ञापन अनुभाग के लिए जिम्मेदार हैं। पंवार, सी.सी.एस. विश्वविद्यालय (मेरठ)से विज्ञान और कानून में स्नातक हैं. पंवार "पत्रकार पुरम सहकारी आवास समिति लि0" के पूर्व निदेशक हैं। उन्हें पत्रकारिता क्षेत्र में 29 से अधिक वर्षों का अनुभव है। संपर्क ई.मेल- panwar@poojanews.com

Shyama Charan Panwar has 367 posts and counting. See all posts by Shyama Charan Panwar

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

15 + seventeen =