Muzaffarnagar Private School Fees Protest: निजी स्कूलों की मनमानी फीस के खिलाफ शिवसेना का प्रदर्शन, शिक्षा मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा
News-Desk
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education fee issue UP, Muzaffarnagar news education, Muzaffarnagar private school fees protest, parents protest Muzaffarnagar, private school regulation demand, school admission fee controversy, school fee hike complaint, Shiv Sena MuzaffarnagarMuzaffarnagar में निजी स्कूलों द्वारा कथित रूप से की जा रही मनमानी फीस वसूली और अभिभावकों पर बढ़ते आर्थिक बोझ के खिलाफ शिवसेना ने मुखर विरोध दर्ज कराया। शिवसेना पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बैनर तले जिला अधिकारी के माध्यम से प्रदेश के शिक्षा मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपते हुए निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली पर नियंत्रण लगाने की मांग की गई।
इस अभियान का नेतृत्व पश्चिम प्रदेश प्रमुख Lalit Mohan Sharma के आवाहन पर किया गया, जिसमें संगठन के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने बड़ी संख्या में भाग लेकर अभिभावकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया।
सरकारी स्कूलों की स्थिति के कारण निजी स्कूलों पर बढ़ी निर्भरता
ज्ञापन में कहा गया कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर अभिभावकों के मन में विश्वास की कमी के कारण बड़ी संख्या में लोग अपने बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाने को मजबूर हैं।
इसी स्थिति का फायदा उठाकर कई निजी और पब्लिक स्कूल अभिभावकों से मनमाने तरीके से फीस वसूल रहे हैं। संगठन का आरोप है कि यह स्थिति शिक्षा व्यवस्था को आर्थिक बोझ का माध्यम बना रही है।
महंगी फीस, ड्रेस और किताबों के नाम पर अतिरिक्त बोझ का आरोप
Muzaffarnagar private school fees protest के दौरान संगठन ने आरोप लगाया कि कई स्कूल प्रबंधन महंगी फीस के अलावा महंगी ड्रेस और पाठ्यक्रम के नाम पर अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव बना रहे हैं।
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि कुछ स्कूलों में छात्रों के लिए एक विशेष प्रकाशन की किताबें अनिवार्य कर दी जाती हैं और अभिभावकों को उन्हें केवल तय दुकानों से खरीदने के लिए बाध्य किया जाता है।
इस प्रकार की व्यवस्था को अभिभावकों के साथ आर्थिक शोषण के रूप में देखा जा रहा है।
हर कक्षा में दोबारा एडमिशन प्रक्रिया पर भी उठाए सवाल
संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि कई निजी स्कूलों में छात्र के अगली कक्षा में जाने पर दोबारा प्रवेश जैसी प्रक्रिया अपनाई जाती है, जिससे अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक भार पड़ता है।
ज्ञापन में इस व्यवस्था को समाप्त करने की मांग प्रमुख रूप से उठाई गई।
तीन प्रमुख मांगों को लेकर सौंपा गया ज्ञापन
Muzaffarnagar private school fees protest के तहत शिवसेना ने शिक्षा मंत्री को भेजे ज्ञापन में तीन महत्वपूर्ण मांगें रखीं:
पहली मांग यह रखी गई कि एक ही स्कूल में पढ़ने वाले छात्र को अगली कक्षा में भेजते समय दोबारा प्रवेश प्रक्रिया समाप्त की जाए।
दूसरी मांग के तहत कहा गया कि अभिभावकों को ड्रेस और पाठ्यक्रम कहीं से भी खरीदने की स्वतंत्रता दी जाए और उन्हें निश्चित दुकानों से खरीदने के लिए बाध्य करने वाले स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
तीसरी मांग के रूप में हर कक्षा की फीस निर्धारित करने और उसका उल्लंघन करने वाले स्कूलों की मान्यता रद्द करने की व्यवस्था लागू करने की बात कही गई।
प्रशासनिक कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी
शिवसेना के जिला अध्यक्ष Bittu Sikheda ने कहा कि जनपद में अभिभावकों का आर्थिक शोषण किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि प्रशासन ने जल्द कार्रवाई नहीं की तो संगठन बड़े स्तर पर आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा।
उन्होंने बताया कि जिले में लगातार मिल रही शिकायतों के आधार पर यह ज्ञापन सौंपा गया है और आगे भी इस मुद्दे को मजबूती से उठाया जाएगा।
पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की बड़ी संख्या में रही मौजूदगी
Muzaffarnagar private school fees protest के दौरान पश्चिमी प्रदेश उप-प्रमुख Pramod Agrawal, छात्र सभा जिला अध्यक्ष Jatin Vashishth सहित सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद रहे।
इसके अलावा राजीव शर्मा, भुवन मिश्रा, विवेक, मोहित पाल, रवि पाल, पुपिंदर पाल, मयंक, प्रिंस, मनीष बालियान, अरविंद कौशिक, राकेश सोनकर, रूपराम कश्यप, पिंकू कश्यप, अर्जुन राजपूत, शैलेंद्र विश्वकर्मा, उज्ज्वल पंडित, अभिषेक शर्मा, आनंद दीप प्रजापति, दिनेश कुमार, अंकुर सैनी, श्यामवीर, प्रत्यक्ष, निहाल सिंह, करण सैनी, राजेश अरोड़ा, रोशन सोनकर, लाल निकुंज चौहान, गौरव, संजय गुप्ता और अमित राजपूत सहित अनेक कार्यकर्ताओं ने कार्यक्रम में भाग लिया।
अभिभावकों की समस्याओं को लेकर जिले में बढ़ी चर्चा
Muzaffarnagar private school fees protest के बाद निजी स्कूलों की फीस संरचना और अन्य आर्थिक व्यवस्थाओं को लेकर जिले में व्यापक चर्चा शुरू हो गई है। कई अभिभावकों ने उम्मीद जताई है कि प्रशासन इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कदम उठाएगा।
स्थानीय स्तर पर यह मुद्दा अब शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और संतुलन की मांग के रूप में उभरकर सामने आ रहा है।

