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Muzaffarnagar में RDF और प्रदूषण पर निर्णायक पहल: किसान संगठनों और पेपर मिल मालिकों की बैठक में बनी सहमति, 15 अप्रैल तक बड़े बदलाव का रोडमैप

Muzaffarnagar RDF pollution का मुद्दा एक बार फिर जिले की राजनीति, प्रशासन और औद्योगिक क्षेत्र के केंद्र में आ गया है। बढ़ते प्रदूषण, RDF (रिफ्यूज डिराइव्ड फ्यूल) के नाम पर कथित रूप से कचरा जलाने, सड़क जाम और ग्रामीण इलाकों में बिगड़ती जीवन स्थितियों को लेकर किसानों और स्थानीय लोगों की चिंताओं ने प्रशासन को सक्रिय भूमिका निभाने पर मजबूर कर दिया है। इसी कड़ी में जिला पंचायत सभाकक्ष में आयोजित अहम बैठक में किसान संगठनों, पेपर मिल मालिकों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच विस्तृत और खुली चर्चा हुई, जिसे एक सकारात्मक और निर्णायक पहल के रूप में देखा जा रहा है।


🔴 RDF और प्रदूषण: कैसे बना बड़ा मुद्दा

बीते कुछ समय से मुजफ्फरनगर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों का कहना है कि पेपर मिलों में RDF के नाम पर सिर्फ ईंधन ही नहीं, बल्कि मिश्रित कचरा और अन्य अवशेष भी जलाए जा रहे हैं। इससे हवा में धुएं, बदबू और जहरीले कणों की मात्रा बढ़ रही है, जिससे सांस संबंधी बीमारियों, आंखों में जलन और खेती पर प्रतिकूल असर जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं।

Muzaffarnagar RDF pollution को लेकर किसान संगठनों ने जिला प्रशासन को कई बार ज्ञापन सौंपकर चेताया था कि अगर इस पर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। इसी दबाव और बढ़ती जनचेतना के चलते प्रशासन ने सभी पक्षों को एक मंच पर लाने का निर्णय लिया।


🔴 जिला पंचायत सभाकक्ष में हुई अहम बैठक

बैठक में भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के वरिष्ठ नेता राकेश टिकैत समेत कई किसान प्रतिनिधि और पेपर मिल एसोसिएशन से जुड़े उद्योगपति मौजूद रहे। प्रशासन की ओर से एडीएम प्रशासन संजय सिंह, एसपी सिटी सत्यनायण प्रजापत और प्रदूषण विभाग की जेई संध्या भी बैठक में शामिल रहीं।

इस बैठक का मुख्य उद्देश्य था—RDF जलाने की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना, प्रदूषण को नियंत्रित करना, और औद्योगिक क्षेत्र के आसपास रहने वाले ग्रामीणों की मूलभूत समस्याओं का समाधान निकालना।


🔴 पेपर मिल मालिकों का आश्वासन: साफ-सफाई और नियमों का पालन

पेपर मिल मालिकों और एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने बैठक में किसानों और प्रशासन को आश्वस्त किया कि फैक्ट्री क्षेत्रों में साफ-सफाई की व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा। RDF से लदे ट्रकों को ढककर लाने, सड़क किनारे अव्यवस्थित तरीके से खड़े वाहनों को हटाने और मिल परिसर के आसपास धूल व कचरे को नियंत्रित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।

Muzaffarnagar RDF pollution के संदर्भ में यह भी तय किया गया कि पेपर मिलों में केवल निर्धारित RDF ही जलाया जाएगा, किसी अन्य प्रकार की सामग्री नहीं, ताकि प्रदूषण का स्तर नियंत्रित रहे।


🔴 किसानों की मांगें: नाला, सड़क और पानी की समस्या

किसान नेताओं ने बैठक में यह मुद्दा भी उठाया कि औद्योगिक क्षेत्र के आसपास नालों की उचित व्यवस्था न होने से बरसात के दिनों में कीचड़ और जलभराव की समस्या गंभीर हो जाती है। इससे न केवल आवाजाही प्रभावित होती है, बल्कि खेती और स्वास्थ्य पर भी असर पड़ता है।

सड़क निर्माण, पानी की आपूर्ति और फैक्ट्रियों में आधुनिक इक्विपमेंट लगाए जाने की मांग को भी प्रमुखता से रखा गया। किसानों का कहना था कि यदि तकनीकी सुधार किए जाएं, तो प्रदूषण का स्तर काफी हद तक कम किया जा सकता है।


🔴 ट्रकों से जाम और सड़क सुरक्षा का मुद्दा

Muzaffarnagar RDF pollution से जुड़ा एक और बड़ा मुद्दा है—पेपर मिलों के बाहर खड़े भारी ट्रकों से लगने वाला जाम और सड़क हादसों का खतरा। बैठक में सुझाव दिया गया कि ट्रकों को सड़क से हटकर निर्धारित स्थानों पर खड़ा किया जाए, ताकि यातायात बाधित न हो और दुर्घटनाओं की संभावना कम हो।

इस प्रस्ताव पर दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी और प्रशासन ने इसे लागू कराने का भरोसा दिलाया।


🔴 15 अप्रैल तक का रोडमैप, 16 अप्रैल को फिर समीक्षा

बैठक में यह तय किया गया कि 15 अप्रैल तक सभी तय की गई व्यवस्थाओं को धरातल पर उतारने का प्रयास किया जाएगा। इसके बाद 16 अप्रैल को एक और समीक्षा बैठक आयोजित होगी, जिसमें यह देखा जाएगा कि किन बिंदुओं पर कितना काम हुआ और किन मुद्दों पर अभी सुधार की जरूरत है।

Muzaffarnagar RDF pollution के समाधान को लेकर यह टाइमलाइन स्थानीय लोगों के लिए एक उम्मीद की किरण के रूप में देखी जा रही है।


🔴 राकेश टिकैत का बयान: सकारात्मक शुरुआत

भाकियू नेता राकेश टिकैत ने बैठक के बाद कहा कि आज कई समस्याओं पर समाधान की दिशा में सहमति बनी है। उन्होंने इसे एक सकारात्मक पहल बताते हुए कहा कि यदि प्रशासन और उद्योग जगत इसी तरह सहयोग करता रहा, तो प्रदूषण और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी कई परेशानियों से निजात मिल सकती है।

उन्होंने यह भी जोर दिया कि पेपर मिलों में केवल RDF ही जलाया जाए, किसी अन्य सामग्री का इस्तेमाल न हो, ताकि पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर न पड़े।


🔴 स्थानीय ग्रामीणों की प्रतिक्रिया

बैठक के बाद आसपास के गांवों के लोगों ने संतोष व्यक्त किया। उनका कहना है कि लंबे समय से वे धूल, धुएं और जाम की समस्या झेल रहे थे। यदि तय किए गए कदम वास्तव में लागू होते हैं, तो इससे न केवल पर्यावरण सुधरेगा बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी भी आसान होगी।


🔴 उद्योग और पर्यावरण के बीच संतुलन की चुनौती

Muzaffarnagar RDF pollution का यह मामला एक बड़े सवाल की ओर इशारा करता है—कैसे औद्योगिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाया जाए। पेपर मिलें जिले की अर्थव्यवस्था और रोजगार का एक अहम हिस्सा हैं, लेकिन उनके संचालन का सीधा असर आसपास के ग्रामीण जीवन पर भी पड़ता है।

इसलिए प्रशासन, किसान और उद्योग जगत—तीनों की साझा जिम्मेदारी बनती है कि विकास की रफ्तार पर्यावरण और स्वास्थ्य की कीमत पर न बढ़े।


मुजफ्फरनगर में RDF और प्रदूषण को लेकर हुई यह बैठक सिर्फ एक औपचारिक बातचीत नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन, औद्योगिक जिम्मेदारी और प्रशासनिक सक्रियता के बीच नए भरोसे की नींव है। 15 अप्रैल तक तय किए गए कदमों के अमल और 16 अप्रैल की समीक्षा बैठक पर अब पूरे जिले की नजरें टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि यह पहल सिर्फ आश्वासन बनकर रह जाती है या वास्तव में बदलाव की शुरुआत साबित होती है।

 

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