संपादकीय विशेष

रोहाना सड़क बदहाल: बारिश ने खोली Muzaffarnagar प्रशासन की पोल, गड्ढों में तब्दील हुआ ग्रामीणों का जीवन मार्ग

Muzaffarnagar /Rohana road condition एक बार फिर ग्रामीणों के लिए चिंता और परेशानी का कारण बन गई है। पिछले दो दिनों से लगातार हुई बारिश ने रोहाना गांव के मुख्य संपर्क मार्ग की हालत को और भी बदतर बना दिया है। कभी विकास की उम्मीद का प्रतीक मानी जाने वाली यह सड़क अब गड्ढों से भरी एक ऐसी पगडंडी में तब्दील हो चुकी है, जिस पर चलना जान जोखिम में डालने जैसा हो गया है। गांव के लोगों का कहना है कि हर बरसात के साथ उनकी मुश्किलें बढ़ जाती हैं, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।


🔴 गांवों की जीवनरेखा बनी सड़क, अब बनी संकट की वजह

मुजफ्फरनगर-देवबंद स्टेट हाईवे-59 से निकलकर रोहाना खुर्द और रोहाना कला होते हुए महतोली गांव तक जाने वाला यह मार्ग करीब दो किलोमीटर लंबा है। यह सड़क केवल एक गांव की नहीं, बल्कि आधा दर्जन से अधिक गांवों की जीवनरेखा मानी जाती है। इसी रास्ते से किसान अपने खेतों तक पहुंचते हैं, बच्चे स्कूल जाते हैं, मरीज अस्पताल ले जाए जाते हैं और व्यापारियों का रोज़मर्रा का आवागमन होता है।

लेकिन Rohana road condition अब इतनी खराब हो चुकी है कि यह मार्ग सुविधा नहीं, बल्कि बाधा बन गया है। जगह-जगह गहरे गड्ढे, कीचड़ और टूटे हुए किनारे इस बात की गवाही देते हैं कि यह सड़क लंबे समय से उपेक्षा का शिकार है।


🔴 टोल से बचने की मजबूरी, बढ़ता ट्रैफिक और टूटती सड़क

ग्रामीणों का कहना है कि स्टेट हाईवे-59 पर स्थित टोल प्लाजा से बचने के लिए छोटे-बड़े कॉमर्शियल वाहन और निजी गाड़ियां भी इसी रास्ते का इस्तेमाल करती हैं। भारी वाहनों की लगातार आवाजाही के कारण सड़क की सतह पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे बारिश के बाद हालात और भी खराब हो जाते हैं।

Rohana road condition पर नजर डालें तो साफ दिखता है कि सड़क की परत जगह-जगह से उखड़ चुकी है। जहां पहले सिर्फ दरारें थीं, वहां अब पानी से भरे गहरे गड्ढे बन गए हैं। रात के समय यह स्थिति और भी खतरनाक हो जाती है, जब वाहन चालकों को सामने दिखता ही नहीं कि आगे सड़क है या गड्ढों का जाल।


🔴 किसानों की परेशानी, गन्ने से लदी भैंसा-बुग्गी भी फंसी

यह इलाका कृषि प्रधान है और गन्ना यहां की प्रमुख फसल मानी जाती है। किसान अपनी भैंसा-बुग्गी और ट्रैक्टर-ट्रॉली के जरिए गन्ने को मंडियों और मिलों तक पहुंचाते हैं। लेकिन Rohana road condition ने उनकी राह मुश्किल कर दी है।

ग्रामीण बताते हैं कि बारिश के बाद सड़क पर कीचड़ इतना बढ़ जाता है कि भारी भरकम गन्ने से लदी गाड़ियां फिसलने लगती हैं। कई बार वाहन बीच रास्ते में फंस जाते हैं, जिससे घंटों तक आवागमन ठप हो जाता है। इससे न केवल समय की बर्बादी होती है, बल्कि किसानों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है।


🔴 दो साल से बदहाल, सिर्फ अस्थायी मरम्मत का सहारा

ग्रामीणों के अनुसार, यह रास्ता पिछले दो वर्षों से लगातार खराब स्थिति में है। लंबे समय तक गड्ढों से भरी इस सड़क पर चलना दूभर हो गया था। सितंबर माह में गड्ढा भरो अभियान के तहत सड़क पर केवल पैचवर्क किया गया, जिससे कुछ समय के लिए राहत मिली।

लेकिन अब अचानक हुई तेज बारिश ने उस अस्थायी मरम्मत की पोल खोल दी है। पैच उखड़ चुके हैं और गड्ढे पहले से भी बड़े हो गए हैं। Rohana road condition पर नजर डालें तो साफ लगता है कि बिना ठोस निर्माण और चौड़ीकरण के यह समस्या हर साल दोहराई जाती रहेगी।


🔴 ग्रामीणों का आक्रोश, जनप्रतिनिधियों पर आरोप

जब ग्रामीणों से बातचीत की गई तो उन्होंने अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की। उनका कहना है कि क्षेत्रीय सांसद और विधायक का इस ओर कोई ध्यान नहीं है। ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव जीतने के बाद से आज तक किसी भी जनप्रतिनिधि ने गांव में आकर सड़क की हालत देखने की जहमत नहीं उठाई।

Rohana road condition को लेकर लोगों में यह भावना है कि उनकी समस्याएं सिर्फ चुनावी वादों तक सीमित रह जाती हैं। रोज़मर्रा की जिंदगी में झेलनी पड़ने वाली परेशानियों की आवाज ऊपर तक नहीं पहुंच पाती।


🔴 बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों की सुरक्षा पर खतरा

इस सड़क से सिर्फ किसान ही नहीं, बल्कि स्कूली बच्चे, बुजुर्ग और मरीज भी गुजरते हैं। बारिश के मौसम में फिसलन और गड्ढों के कारण हादसों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार दोपहिया वाहन चालक गिर चुके हैं और छोटे-मोटे हादसे आम हो गए हैं।

Rohana road condition ने स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को भी मुश्किल बना दिया है। आपात स्थिति में मरीज को अस्पताल ले जाना एक चुनौती बन जाता है, क्योंकि एंबुलेंस तक इस रास्ते पर धीरे-धीरे चलने को मजबूर होती है।


🔴 प्रशासन से मांग, स्थायी समाधान की जरूरत

ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि केवल गड्ढे भरने से काम नहीं चलेगा। इस मार्ग का चौड़ीकरण और पक्का निर्माण जरूरी है, ताकि भारी वाहनों का दबाव सहन किया जा सके और बारिश के मौसम में भी सड़क सुरक्षित बनी रहे।

Rohana road condition को लेकर लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह समस्या आने वाले वर्षों में और गंभीर रूप ले सकती है।


🔴 मानसून और ग्रामीण सड़कों की हकीकत

यह मामला सिर्फ रोहाना तक सीमित नहीं है। मानसून के मौसम में ग्रामीण इलाकों की सड़कों की हालत अक्सर इसी तरह बिगड़ जाती है। बजट और योजना के बावजूद ज़मीनी स्तर पर स्थायी निर्माण का अभाव साफ नजर आता है।

Rohana road condition इस बात का उदाहरण बन गई है कि विकास के दावों और हकीकत के बीच कितना बड़ा फासला है।


रोहाना सड़क की बदहाली केवल गड्ढों की कहानी नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन की उस सच्चाई को दर्शाती है, जहां हर बारिश के साथ उम्मीदें बह जाती हैं और परेशानियां और गहरी हो जाती हैं। अब निगाहें प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर टिकी हैं कि वे इस मार्ग को सिर्फ अस्थायी राहत नहीं, बल्कि स्थायी समाधान देकर गांवों की इस जीवनरेखा को फिर से सुरक्षित और मजबूत बना पाते हैं या नहीं।

 

Dr. S.K. Agarwal

डॉ. एस.के. अग्रवाल न्यूज नेटवर्क के मैनेजिंग एडिटर हैं। वह मीडिया योजना, समाचार प्रचार और समन्वय सहित समग्र प्रबंधन के लिए जिम्मेदार है। उन्हें मीडिया, पत्रकारिता और इवेंट-मीडिया प्रबंधन के क्षेत्र में लगभग 3.5 दशकों से अधिक का व्यापक अनुभव है। वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई प्रतिष्ठित समाचार पत्रों, चैनलों और पत्रिकाओं से जुड़े हुए हैं। संपर्क ई.मेल- [email protected]

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