Muzaffarnagar में 61वें वर्ष भी गूंजा अखंड श्रीरामचरितमानस का स्वर, श्रीरामदरबार में भक्ति से सराबोर हुआ माहौल; हजारों श्रद्धालुओं ने लिया धर्मलाभ
News-Desk
12 min read
61वां वर्ष, Muzaffarnagar News, अंकित वाशिष्ठ, अखंड श्रीरामचरितमानस, अनुज भारद्वाज, अमिता शर्मा, गोविंद शर्मा, द्वारिकापुरी, धर्म समाचार, धार्मिक कार्यक्रम, पं. रामदेव शर्मा, पूर्णाहुति, प्रसाद, भजनांजलि, भंडारा, मुजफ्फरनगर, यज्ञ हवन, रामचरितमानस पाठ, रामायण पाठ, वैदेही विशिष्ट, शिवांगी भारद्वाज, श्रद्धालु, श्रीराम, श्रीरामचरितमानस, श्रीरामदरबार, संतों के आशीर्वचनMuzaffarnagar के द्वारिकापुरी स्थित श्रीरामदरबार में आस्था, भक्ति और धार्मिक परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला। श्रीरामचरितमानस के अखंड पाठ एवं गायन की 60 वर्ष पुरानी परंपरा ने इस वर्ष 61वें वर्ष में प्रवेश किया और दो दिवसीय धार्मिक आयोजन के दौरान मंदिर परिसर श्रीराम के जयघोष, भजनों और रामचरितमानस के मधुर स्वर से गूंजता रहा।
19 अगस्त से शुरू हुआ अखंड श्रीरामचरितमानस पाठ गुरुवार, 20 अगस्त 2026 को विधिवत पूर्णाहुति के साथ संपन्न हुआ। आयोजन में नगर की विभिन्न कीर्तन मंडलियों ने लगातार स्वरबद्ध रामायण पाठ किया, जबकि बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर धार्मिक कार्यक्रम में सहभागिता की।
दूसरे दिन यज्ञ-हवन, सांस्कृतिक प्रस्तुति, भजनांजलि, संतों के आशीर्वचन और अखंड पाठ की पूर्णाहुति के बाद ब्राह्मण भोज, प्रसाद तथा विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया और प्रभु श्रीराम का आशीर्वाद प्राप्त किया।
60 वर्षों से चली आ रही परंपरा ने पूरा किया 61वां वर्ष
श्रीरामदरबार में अखंड श्रीरामचरितमानस पाठ और गायन की परंपरा कोई नई शुरुआत नहीं, बल्कि छह दशकों से लगातार चली आ रही आध्यात्मिक विरासत है।
वर्षों से यहां श्रद्धालु मिलकर श्रीरामचरितमानस का पाठ और गायन करते आ रहे हैं। समय बदलता रहा, पीढ़ियां बदलती रहीं, लेकिन श्रीरामचरितमानस के प्रति श्रद्धा और इस धार्मिक परंपरा से लोगों का जुड़ाव कायम रहा।
इस वर्ष 61वें वर्ष का आयोजन उसी निरंतर परंपरा की अगली कड़ी रहा।
19 अगस्त से शुरू हुआ दो दिवसीय धार्मिक आयोजन
कार्यक्रम की शुरुआत 19 अगस्त को हुई।
प्रथम दिवस प्रातः 9 बजे नित्य श्रीराम कथा का आयोजन किया गया। इसके बाद प्रातः 10 बजे अखंड श्रीरामचरितमानस पाठ प्रारंभ हुआ।
नगर की विभिन्न कीर्तन मंडलियों ने बारी-बारी से रामायण पाठ को आगे बढ़ाया और श्रीरामदरबार का वातावरण लगातार भक्तिमय बना रहा।
श्रद्धालु बड़ी संख्या में कार्यक्रम में पहुंचे और रामचरितमानस का श्रवण किया।
कीर्तन मंडलियों के स्वर से गूंजता रहा श्रीरामदरबार
अखंड पाठ की सबसे विशेष बात यह रही कि नगर की अलग-अलग कीर्तन मंडलियों ने इसमें सहभागिता की।
स्वरबद्ध रामायण पाठ के दौरान श्रीरामचरितमानस की चौपाइयों और भजनों से वातावरण आध्यात्मिक हो उठा।
श्रद्धालुओं ने भी पूरे भक्तिभाव के साथ पाठ का श्रवण किया।
कई श्रद्धालु कार्यक्रम के दौरान मंदिर परिसर में बैठकर धार्मिक आयोजन का हिस्सा बने रहे।
दूसरे दिन हवन-यज्ञ के साथ हुई शुरुआत
गुरुवार, 20 अगस्त को कार्यक्रम के दूसरे दिन प्रातः 8 बजे यज्ञ-हवन का आयोजन किया गया।
वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक विधि-विधान के बीच हवन संपन्न हुआ।
श्रद्धालुओं ने हवन में आहुति देकर परिवार और समाज की सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना की।
इसके बाद कार्यक्रम के अन्य धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन आगे बढ़े।
भजनांजलि और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां
हवन के बाद सांस्कृतिक प्रस्तुति और भजनांजलि का आयोजन किया गया।
भक्ति गीतों और धार्मिक प्रस्तुतियों के माध्यम से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव हुआ।
कार्यक्रम के दौरान संत-महात्माओं ने भी श्रद्धालुओं को आशीर्वचन दिए और श्रीराम के आदर्शों को जीवन में अपनाने का संदेश दिया।
अखंड पाठ की विधिवत पूर्णाहुति
दो दिनों तक चले अखंड श्रीरामचरितमानस पाठ का गुरुवार को विधिवत समापन किया गया।
पूर्णाहुति के समय धार्मिक वातावरण और अधिक भावपूर्ण हो गया।
श्रद्धालुओं ने प्रभु श्रीराम का स्मरण करते हुए कार्यक्रम में सहभागिता की।
अखंड पाठ की पूर्णाहुति के साथ वर्षों पुरानी परंपरा का एक और अध्याय सफलतापूर्वक पूरा हुआ।
संतों के आशीर्वचन से मिला आध्यात्मिक संदेश
कार्यक्रम में संत-महात्माओं ने श्रद्धालुओं को आशीर्वचन दिए।
धार्मिक आयोजनों में संतों का मार्गदर्शन श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है।
श्रीराम के जीवन और आदर्शों से जुड़े संदेशों के माध्यम से लोगों को धर्म, मर्यादा, सेवा और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी गई।
भंडारे में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
पूर्णाहुति के बाद श्रद्धालुओं के लिए ब्राह्मण भोज, प्रसाद और विशाल भंडारे का आयोजन किया गया।
बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भंडारे में प्रसाद ग्रहण किया।
धार्मिक कार्यक्रम के समापन के अवसर पर आयोजित भंडारे ने आयोजन को सामूहिकता और सेवा की भावना से भी जोड़ा।
पं. रामदेव शर्मा ने जताया आभार
श्रीरामदरबार के अध्यक्ष पं. रामदेव शर्मा ने कार्यक्रम में सहयोग करने वाले सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि श्रीरामचरितमानस का निरंतर पाठ और गायन श्रीरामदरबार की वर्षों पुरानी आध्यात्मिक परंपरा है।
उन्होंने श्रद्धालुओं, कीर्तन मंडलियों, संत-महात्माओं और आयोजन में तन-मन-धन से सहयोग करने वाले धर्मप्रेमी लोगों का धन्यवाद किया।
‘श्रीरामचरितमानस के संदेश को जीवन में अपनाएं’
श्रीरामदरबार की ओर से श्रद्धालुओं से श्रीरामचरितमानस के संदेश को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया गया।
आयोजकों ने कहा कि रामचरितमानस केवल धार्मिक पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें जीवन, परिवार, समाज, कर्तव्य और मर्यादा से जुड़े अनेक संदेश भी मिलते हैं।
प्रभु श्रीराम के आदर्शों पर चलने और जीवन में सदाचार को महत्व देने की प्रेरणा दी गई।
हजारों श्रद्धालुओं ने लिया धर्मलाभ
दो दिवसीय आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया।
नगर के विभिन्न क्षेत्रों से लोग श्रीरामदरबार पहुंचे और अखंड पाठ, हवन, भजनांजलि तथा पूर्णाहुति में शामिल हुए।
कार्यक्रम के अंतिम चरण में आयोजित भंडारे में भी बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।
धार्मिक आयोजन बना सामूहिक आस्था का केंद्र
अखंड श्रीरामचरितमानस पाठ का आयोजन केवल मंदिर परिसर तक सीमित नहीं रहा।
नगर की विभिन्न कीर्तन मंडलियों और धर्मप्रेमी नागरिकों की सहभागिता ने इसे सामूहिक धार्मिक आयोजन का रूप दिया।
अलग-अलग परिवारों और सामाजिक वर्गों के लोगों ने कार्यक्रम में भाग लेकर अपनी आस्था व्यक्त की।
पीढ़ियों से जुड़ी है श्रीरामचरितमानस की परंपरा
श्रीरामदरबार में छह दशकों से अधिक समय से जारी अखंड पाठ की परंपरा अपने आप में विशेष महत्व रखती है।
इस तरह की धार्मिक परंपराएं नई पीढ़ी को भी अपने सांस्कृतिक और आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने का माध्यम बनती हैं।
61वें वर्ष का आयोजन भी इसी निरंतरता का प्रतीक रहा।
अमिता शर्मा समेत कई लोगों का विशेष सहयोग
कार्यक्रम को सफल बनाने में अमिता शर्मा, शिवांगी भारद्वाज, अनुज भारद्वाज, वैदेही विशिष्ट, अंकित वाशिष्ठ और गोविंद शर्मा सहित अनेक श्रद्धालुओं और धर्मप्रेमी नागरिकों का विशेष सहयोग रहा।
आयोजकों ने सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
धार्मिक आयोजन में जनप्रतिनिधि और सामाजिक प्रतिनिधि भी पहुंचे
कार्यक्रम में विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्रों से जुड़े लोग भी शामिल हुए।
पूर्व अध्यक्ष एवं जिला उपाध्यक्ष भाजपा डॉ. सुभाष चंद्र शर्मा, विनीत कात्यान, सर्व ब्राह्मण महासभा के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. संदीप शर्मा, राष्ट्रीय सलाहकार ब्रह्म प्रकाश शर्मा सहित कई प्रमुख लोगों ने कार्यक्रम में सहभागिता की।
उनकी मौजूदगी ने आयोजन में सामाजिक भागीदारी को और व्यापक बनाया।
सर्व ब्राह्मण महासभा से जुड़े पदाधिकारियों की मौजूदगी
कार्यक्रम में सर्व ब्राह्मण महासभा से जुड़े पदाधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ता भी उपस्थित रहे।
राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. संदीप शर्मा और राष्ट्रीय सलाहकार ब्रह्म प्रकाश शर्मा की मौजूदगी रही।
साथ ही जिला स्तर के पदाधिकारियों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।
जिला और नगर स्तर के पदाधिकारी भी हुए शामिल
कार्यक्रम में जिला संरक्षक राकेश शर्मा, जिला अध्यक्ष हरीश गौतम और जिला महामंत्री संजय गौतम भी मौजूद रहे।
प्रदेश उपाध्यक्ष नीरज गौतम ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की।
मातृशक्ति अध्यक्ष पूजा द्विवेदी और महिला जिला अध्यक्ष अमित शर्मा सहित अन्य पदाधिकारी भी आयोजन में शामिल हुए।
युवा और महिला वर्ग की भी भागीदारी
धार्मिक आयोजन में महिलाओं और युवाओं की भागीदारी भी रही।
युवा जिला उपाध्यक्ष विशाल शर्मा, जिला मंत्री महिला ममता कात्यान, नगर कोषाध्यक्ष महादेव जी, मीनाक्षी जी और रजनी गोयल सहित अनेक लोगों ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
इससे आयोजन में विभिन्न आयु वर्गों की भागीदारी देखने को मिली।
रामचरितमानस के पाठ के साथ सामाजिक एकजुटता का संदेश
ऐसे धार्मिक आयोजन लोगों को एक साथ जोड़ने का माध्यम भी बनते हैं।
श्रीरामचरितमानस का सामूहिक पाठ, भजन, हवन और भंडारा लोगों को एक साझा आध्यात्मिक वातावरण में लेकर आया।
आयोजकों ने धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक सद्भाव और सेवा की भावना को भी महत्व दिया।
यज्ञ-हवन में श्रद्धालुओं ने की सहभागिता
20 अगस्त की सुबह आयोजित यज्ञ-हवन में श्रद्धालुओं ने धार्मिक विधि के अनुसार भाग लिया।
हवन के दौरान मंत्रोच्चार और आहुति के बीच वातावरण भक्तिमय बना रहा।
श्रद्धालुओं ने परिवार और समाज की सुख-शांति की कामना करते हुए धार्मिक अनुष्ठान में सहभागिता की।
भजनांजलि ने बढ़ाया भक्तिभाव
पूर्णाहुति से पहले आयोजित भजनांजलि में श्रद्धालुओं ने भक्तिगीतों का आनंद लिया।
धार्मिक संगीत और रामभक्ति से जुड़ी प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को भावपूर्ण बना दिया।
श्रीरामदरबार परिसर में पूरे आयोजन के दौरान भक्ति और आस्था का माहौल बना रहा।
रामकथा से मिला जीवन मूल्यों का संदेश
श्रीरामकथा और श्रीरामचरितमानस के माध्यम से श्रद्धालुओं को जीवन मूल्यों से जुड़े संदेश दिए गए।
मर्यादा, कर्तव्य, परिवार, सेवा और सत्य जैसे मूल्यों को जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी गई।
आयोजकों ने श्रद्धालुओं से इन आदर्शों को व्यवहारिक जीवन का हिस्सा बनाने का आग्रह किया।
धर्म के साथ सेवा का भाव भी दिखा
भंडारे और प्रसाद वितरण के माध्यम से धार्मिक आयोजन में सेवा की भावना भी देखने को मिली।
बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
ऐसे आयोजनों में सामूहिक सेवा और सहयोग की परंपरा लोगों को एक-दूसरे से जोड़ती है।
श्रीरामदरबार की पुरानी परंपरा को मिला नया विस्तार
61वें वर्ष का आयोजन श्रीरामदरबार की धार्मिक परंपरा की निरंतरता को दर्शाता है।
छह दशक से अधिक समय से लगातार श्रीरामचरितमानस पाठ का आयोजन होना स्थानीय धार्मिक जीवन की महत्वपूर्ण परंपराओं में से एक माना जा सकता है।
इस वर्ष भी परंपरा को श्रद्धा और उत्साह के साथ आगे बढ़ाया गया।
श्रद्धालुओं के लिए यादगार रहा दो दिवसीय आयोजन
19 और 20 अगस्त को आयोजित कार्यक्रम में धार्मिक पाठ से लेकर हवन, भजन, संतों के आशीर्वचन और भंडारे तक कई कार्यक्रम हुए।
श्रद्धालुओं को दो दिनों तक विभिन्न धार्मिक गतिविधियों में भाग लेने का अवसर मिला।
समापन के बाद भी श्रीरामचरितमानस और प्रभु श्रीराम के आदर्शों को जीवन में अपनाने का संदेश प्रमुख रहा।
आयोजन में सहयोग देने वालों का सम्मान और आभार
पं. रामदेव शर्मा ने कार्यक्रम की सफलता में सहयोग करने वाले सभी लोगों का आभार जताया।
उन्होंने कीर्तन मंडलियों, संत-महात्माओं, श्रद्धालुओं और धर्मप्रेमी नागरिकों को विशेष रूप से धन्यवाद दिया।
आयोजकों के अनुसार सामूहिक सहयोग के कारण ही वर्षों पुरानी परंपरा निरंतर आगे बढ़ रही है।
भक्ति और परंपरा का संगम बना श्रीरामदरबार
मुजफ्फरनगर के द्वारिकापुरी स्थित श्रीरामदरबार में 61वें वर्ष का यह आयोजन धार्मिक परंपरा और सामूहिक आस्था का बड़ा उदाहरण रहा।
अखंड रामचरितमानस पाठ से लेकर पूर्णाहुति तक हर चरण में श्रद्धालुओं की सहभागिता बनी रही।
कार्यक्रम का समापन भंडारे और प्रसाद वितरण के साथ हुआ।
61वें वर्ष के आयोजन के साथ फिर दोहराया गया श्रीराम का संदेश
दो दिवसीय आयोजन के समापन पर श्रीरामदरबार की ओर से श्रद्धालुओं से प्रभु श्रीराम के आदर्शों पर चलने का आह्वान किया गया।
आयोजकों ने श्रीरामचरितमानस के संदेश को केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित न रखते हुए दैनिक जीवन में उतारने की प्रेरणा दी।
इस तरह 61वें वर्ष का अखंड पाठ केवल परंपरा की निरंतरता नहीं, बल्कि आस्था, सेवा और जीवन मूल्यों से जुड़ा सामूहिक संदेश भी बनकर सामने आया।

