उत्तर प्रदेश

बारिश में भी उबाल! Muzaffarnagar में स्कूल विलय के खिलाफ शिक्षक उतरे सड़कों पर, बीएसए ऑफिस का घेराव

Muzaffarnagar में उस समय माहौल गरमा गया जब भारी बारिश के बावजूद भारतीय किसान यूनियन शिक्षक प्रकोष्ठ के सैकड़ों शिक्षक बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय का घेराव करने पहुंच गए। यह विरोध प्रदर्शन जिला अध्यक्ष राम रतन बालियांन और महामंत्री अमित शर्मा के नेतृत्व में आयोजित हुआ, जिसमें शिक्षकों ने सरकार के स्कूल मर्जर के फैसले को वापस लेने की मांग को लेकर जमकर नारेबाजी की।


स्कूल मर्जर पर बवाल: शिक्षकों ने बताया ‘शिक्षा पर हमला’

उत्तर प्रदेश सरकार के निर्णय के तहत जिले में लगभग 250 प्राथमिक विद्यालयों को बंद कर उन्हें अन्य स्कूलों में मर्ज किया जा रहा है। इस आदेश के विरोध में शिक्षकों ने दोपहर 2 बजे, तेज बारिश के बीच, बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय का घेराव किया।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह कदम आरटीई अधिनियम और सामुदायिक संरचना के विपरीत है और इससे ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा जाएगी।


‘बच्चों का भविष्य तबाह कर रही सरकार’: राम रतन बालियांन

भारतीय किसान यूनियन शिक्षक प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष राम रतन बालियांन ने चेतावनी दी कि यदि सरकार इस निर्णय को वापस नहीं लेती तो शिक्षक सड़कों पर उतर कर राज्यव्यापी आंदोलन करेंगे।

उन्होंने कहा,

“यह फैसला सिर्फ एक प्रशासनिक आदेश नहीं, बल्कि ग्रामीण बच्चों के भविष्य पर सीधा हमला है। स्कूलों का मर्जर तानाशाही है, जो शिक्षा के बुनियादी अधिकारों का हनन करता है।”


अमित शर्मा बोले – ‘शिक्षक अब चुप नहीं रहेंगे’

महामंत्री अमित शर्मा ने मंच से साफ कहा कि यह निर्णय व्यावहारिक नहीं है और शिक्षकों की चेतावनी को सरकार को गंभीरता से लेना चाहिए। उन्होंने कहा,

शिक्षक अब चुप नहीं बैठने वाले हैं, अगर सरकार नहीं मानी तो यह आंदोलन राज्यव्यापी हो जाएगा। एक-एक स्कूल की रक्षा के लिए हर शिक्षक तैयार है।”


‘हर ब्लॉक, हर गांव में उबाल’: विरोध की लहर

हर ब्लॉक से शिक्षकों ने विरोध में भाग लिया। पुरकाजी से शिक्षक नेता महाराज खालिद, चरथावल से अमित, भोपा से मंजू चौधरी, और पुरकाजी से संदीप तोमर सहित कई नेताओं ने विरोध प्रदर्शन में भाग लेकर समर्थन दिया।

महाराज खालिद ने कहा:

“शिक्षक किसी भी हद तक जा सकते हैं। यह सिर्फ स्कूल बचाने का आंदोलन नहीं है, बल्कि यह बच्चों के भविष्य की लड़ाई है।”


प्रदेश नेतृत्व भी आया समर्थन में: मनीष गोयल और अमित तोमर का ऐलान

प्रदर्शन को समर्थन देने प्रदेश नेतृत्व से मनीष गोयल और अमित तोमर भी पहुंचे। उन्होंने कहा,

“यह निर्णय उत्तर प्रदेश के करीब 27,000 विद्यालयों को प्रभावित कर रहा है। यह एक काला कानून है, जिसे हर हाल में वापस लिया जाएगा। सरकार चाहे जितना दबाव बनाए, शिक्षक नहीं झुकेंगे।”


धरना स्थल पर गूंजे नारे, एकता का संदेश

धरने में शामिल हजारों शिक्षक-शिक्षिकाओं ने एक सुर में नारे लगाए –
“स्कूल बचाओ, बच्चों को पढ़ाओ!”, “मर्जर नहीं चलेगा!”, “शिक्षक एकता जिंदाबाद!”

धरना स्थल पर दिखाई दी अद्भुत एकता और जोश। बुजुर्ग शिक्षक, युवा शिक्षक, महिला शिक्षिकाएं – सभी ने इस आंदोलन में बढ़-चढ़ कर भाग लिया।


बीएसए कार्यालय में सौंपा गया ज्ञापन

धरने के समापन पर बेसिक शिक्षा अधिकारी संदीप कुमार सिंह को ज्ञापन सौंपा गया जिसमें प्रमुख रूप से यह मांग की गई:

  • स्कूलों का मर्जर आदेश तुरंत वापस लिया जाए

  • ग्रामीण बच्चों की शिक्षा संरचना से छेड़छाड़ न की जाए

  • शिक्षकों की राय लिए बिना ऐसे फैसले लागू न किए जाएं


वरिष्ठ शिक्षक नेताओं की उपस्थिति से मिला संबल

धरने में वरिष्ठ शिक्षक नेता सुधीर पोरिया, रवि कुमार, मेराज खालिद, अखलाक अहमद, विनेश कुमार, मोहित, पूजा शर्मा, संध्या चौधरी, मंजू चौधरी, अमित चरथावल, संदीप तोमर जैसे दर्जनों नेता शामिल रहे, जिनकी उपस्थिति ने पूरे धरने को एक नई शक्ति दी।


क्या है मर्जर योजना?

सरकार द्वारा प्रस्तावित योजना के तहत, जहां छात्र संख्या कम है वहां के प्राथमिक विद्यालयों को पास के अन्य स्कूलों में मर्ज किया जा रहा है। इसके पीछे तर्क है कि संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सके। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में यह योजना शिक्षा की पहुँच को कमजोर कर रही है


शिक्षकों की 5 प्रमुख आपत्तियाँ

  1. बच्चों की दूरी बढ़ेगी, स्कूल दूर होने से ड्रॉपआउट बढ़ेगा

  2. शिक्षकों की जिम्मेदारी और कार्यभार बढ़ेगा, गुणवत्ता घटेगी

  3. ग्रामीण विद्यालयों का अस्तित्व समाप्त होगा

  4. माता-पिता की भागीदारी कम होगी

  5. आरटीई कानून की सीधी अवहेलना


क्या बोले अभिभावक और स्थानीय लोग?

स्थानीय अभिभावकों और ग्रामीणों ने भी शिक्षकों के साथ एकजुटता दिखाई। कई अभिभावकों ने कहा कि उनके गांवों के स्कूल बंद हुए तो वे अपने बच्चों को पढ़ाना बंद कर देंगे क्योंकि पास के स्कूलों तक आना-जाना मुमकिन नहीं होगा।


अब आगे क्या? क्या सरकार मानेगी?

प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा कि अगर उनकी मांगों पर सुनवाई नहीं हुई, तो यह सिर्फ शुरुआत है। आंदोलन को और तेज किया जाएगा, प्रदेश स्तर पर बीएसए कार्यालयों का घेराव, लखनऊ कूच जैसे कदम उठाए जाएंगे।


इस समय शिक्षकों का यह आंदोलन सिर्फ सरकारी आदेश के खिलाफ नहीं, बल्कि **शिक्षा के मौलिक अधिकारों की रक्षा** का प्रतीक बन गया है। अगर सरकार ने जल्द ही कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया, तो उत्तर प्रदेश में **एक बड़ा शैक्षिक भूचाल** आ सकता है।

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