Muzaffarnagar में फर्जी RC और इंजन-चेसिस नंबर बदलने वाला अंतर्राज्यीय वाहन गिरोह बेनकाब: 1.15 करोड़ की संपत्ति, ट्रक और फर्जी आधार बरामद
Muzaffarnagar vehicle fraud gang का पर्दाफाश जिले में अपराध के एक बड़े और संगठित नेटवर्क की ओर इशारा करता है, जो वर्षों से चोरी और फाइनेंस पर खरीदे गए वाहनों को फर्जी दस्तावेजों के जरिए “कानूनी” बनाकर बेचने का धंधा चला रहा था। बुढ़ाना क्षेत्र में हुई इस सनसनीखेज कार्रवाई ने न केवल आम जनता को ठगी से बचाया, बल्कि पुलिस की सतर्कता और रणनीतिक कार्रवाई का भी उदाहरण पेश किया है।
🔴 कैसे खुला फर्जीवाड़े का जाल
01 फरवरी को बुढ़ाना थाना पुलिस को एक विश्वसनीय मुखबिर से सूचना मिली कि जनपद में एक अंतर्राज्यीय गिरोह सक्रिय है, जो चोरी किए गए, फाइनेंस पर खरीदे गए और पुराने वाहनों को अपने नेटवर्क के जरिए “नया” बनाकर बाजार में उतार रहा है। इस गिरोह का तरीका बेहद चालाक और तकनीकी था—वाहनों के इंजन नंबर और चेसिस नंबर को बदलकर, फर्जी आधार कार्ड और जाली आरसी तैयार कर, इन्हें अलग-अलग राज्यों से रजिस्ट्रेशन कराकर बेचना।
सूचना के मुताबिक, गिरोह के सदस्य एक ट्रक को लेकर मुजफ्फरनगर की ओर से दिल्ली जाने वाले थे। इस इनपुट को गंभीरता से लेते हुए बुढ़ाना पुलिस ने तुरंत घेराबंदी की योजना बनाई।
🔴 खतौली तिराहे पर फिल्मी अंदाज में पीछा
पुलिस टीम ने खतौली तिराहे पर सघन वाहन चेकिंग शुरू की। कुछ ही देर में एक संदिग्ध ट्रक आता दिखाई दिया। पुलिस ने टॉर्च की रोशनी से रुकने का इशारा किया, लेकिन ट्रक चालक ने रफ्तार बढ़ा दी और भागने की कोशिश की। यह दृश्य किसी फिल्मी सीन से कम नहीं था—तेज रफ्तार ट्रक, पीछे पुलिस की गाड़ियां और सड़क पर बढ़ता तनाव।
आगे जाकर एक गन्ने से लदा ट्रक रास्ते में आ गया, जिससे आरोपी का ट्रक रुक गया। चालक और उसके साथी मौके से भागने लगे, लेकिन पुलिस टीम ने घेराबंदी कर दोनों को दबोच लिया।
🔴 दो शातिर गिरफ्तार, भारी बरामदगी
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मेहरबान अली उर्फ कारी पुत्र यासीन अली और अफजाल पुत्र रोशन के रूप में हुई, जो थाना झिंझाना, जनपद शामली के निवासी बताए गए हैं। पुलिस ने उनके कब्जे और निशानदेही पर चौंकाने वाली बरामदगी की—
₹1 करोड़ 15 लाख रुपये की संपत्ति का खुलासा
04 ट्रक
02 मोटरसाइकिल
01 मोबाइल फोन
08 फर्जी आधार कार्ड
06 फर्जी आरसी
01 फर्जी नंबर प्लेट
Muzaffarnagar vehicle fraud gang की यह बरामदगी जिले के इतिहास में बड़ी आपराधिक कार्रवाइयों में गिनी जा रही है।
🔴 फर्जी आधार से लेकर अरुणाचल तक का नेटवर्क
पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि वे पहले फर्जी आधार कार्ड तैयार करते थे। इन्हीं दस्तावेजों के जरिए बैंक खाते खुलवाए जाते और लोन भी करवाया जाता था। इसके बाद फाइनेंस पर वाहन खरीदे जाते या चोरी के वाहन नेटवर्क के जरिए हासिल किए जाते।
इसके बाद असली खेल शुरू होता—वाहन के इंजन और चेसिस नंबर को बदलकर फर्जी आरसी के मुताबिक ढाल दिया जाता। कई मामलों में इन वाहनों का रजिस्ट्रेशन अरुणाचल प्रदेश और अन्य दूरस्थ राज्यों से कराया जाता, ताकि जांच एजेंसियों के लिए ट्रैक करना मुश्किल हो जाए।
इस तरह तैयार किए गए वाहन फिर “असली और कानूनी” बताकर भोली-भाली जनता को बेचे जाते, जिससे गिरोह को लाखों-करोड़ों का अवैध मुनाफा होता।
🔴 पुलिस का रणनीतिक नेतृत्व और कार्रवाई
यह पूरी कार्रवाई अपर पुलिस महानिदेशक, मेरठ जोन के निर्देशन और पुलिस उपमहानिरीक्षक, सहारनपुर परिक्षेत्र के मार्गदर्शन में की गई। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा के पर्यवेक्षण और पुलिस अधीक्षक ग्रामीण आदित्य बंसल, क्षेत्राधिकारी बुढ़ाना गजेन्द्र पाल सिंह तथा थानाप्रभारी सुभाष बाबू अत्री के नेतृत्व में टीम ने इस ऑपरेशन को अंजाम दिया।
पुलिस टीम में उपनिरीक्षक ललित कुमार, सिपाही संदीप कुमार, आशीष कुमार, हेड कांस्टेबल नीरज त्यागी, अमरदीप, कांस्टेबल संजय कुमार, विजय कुमार और नकुल सांगवान शामिल रहे।
🔴 20 हजार का नकद इनाम, पुलिस टीम सम्मानित
इस सराहनीय और साहसिक कार्रवाई के लिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक द्वारा बुढ़ाना पुलिस टीम को ₹20,000 का नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। यह न केवल टीम के मनोबल को बढ़ाने वाला कदम है, बल्कि जिले में अपराध के खिलाफ सख्त संदेश भी देता है।
🔴 आम जनता के लिए चेतावनी और सीख
Muzaffarnagar vehicle fraud gang के इस खुलासे के बाद पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि वाहन खरीदते समय दस्तावेजों की पूरी तरह जांच करें। आरसी, इंजन नंबर, चेसिस नंबर और आधार से जुड़े विवरणों का सत्यापन कराना बेहद जरूरी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि फर्जी आरसी और बदले हुए इंजन नंबर वाले वाहन न केवल आर्थिक नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि भविष्य में कानूनी पचड़े और आपराधिक मामलों में भी फंसा सकते हैं।
🔴 अंतर्राज्यीय अपराध पर बड़ा प्रहार
यह कार्रवाई सिर्फ दो आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने का संकेत देती है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह से और कौन-कौन लोग जुड़े हुए हैं, किन राज्यों में इनके संपर्क हैं और कितने वाहन अब तक बाजार में उतारे जा चुके हैं।
Muzaffarnagar vehicle fraud gang के खिलाफ यह अभियान आने वाले समय में और तेज होने की संभावना है।

