PoK में बवाल के बीच पाक रक्षा मंत्री Khawaja Asif का बड़ा बयान: ‘सरकार विरोधी प्रदर्शनकारी भी भारत जैसे दुश्मन’, फायरिंग में 32 मौतों से बढ़ा तनाव
PoK Protests को लेकर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। सरकार विरोधी प्रदर्शनों और सुरक्षा बलों के साथ हिंसक झड़पों के बीच पाकिस्तान के रक्षा मंत्री Khawaja Asif ने विवादित बयान देते हुए कहा है कि सरकार के खिलाफ आंदोलन कर रहे लोगों को वह “भारत की तरह पाकिस्तान का दुश्मन” मानते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे लोगों से किसी प्रकार की बातचीत नहीं की जाएगी।
ख्वाजा आसिफ का यह बयान ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में चुनावी व्यवस्था के विरोध में चल रहे प्रदर्शनों के दौरान पुलिस फायरिंग और हिंसा में पिछले दो दिनों में 32 लोगों की मौत और 50 से अधिक लोगों के घायल होने की खबरें सामने आई हैं। इन आंकड़ों और घटनाओं की स्वतंत्र पुष्टि अलग-अलग स्रोतों से अलग हो सकती है, जबकि घटनाक्रम को लेकर विभिन्न पक्षों के दावे भी सामने आए हैं।
सरकार विरोधी आंदोलन के बीच आया रक्षा मंत्री का बयान
एक टीवी इंटरव्यू में ख्वाजा आसिफ ने कहा कि पाकिस्तान विरोधी गतिविधियों में शामिल लोगों के साथ किसी भी प्रकार की बातचीत की आवश्यकता नहीं है।
उन्होंने प्रदर्शनकारियों की तुलना भारत से करते हुए कहा कि जो लोग राज्य के खिलाफ खड़े हैं, उन्हें पाकिस्तान का विरोधी माना जाना चाहिए।
इस बयान के बाद राजनीतिक और सुरक्षा हालात को लेकर चर्चा और तेज हो गई है।
चुनाव के विरोध में निकला था बड़ा मार्च
जानकारी के अनुसार, जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के बैनर तले हजारों लोग चुनावी व्यवस्था के विरोध में रावलाकोट से मुजफ्फराबाद की ओर मार्च निकाल रहे थे।
रिपोर्टों के मुताबिक लगभग 5,000 प्रदर्शनकारी इस मार्च में शामिल थे।
इसी दौरान सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ, जिसके बाद हिंसा भड़क गई।
फायरिंग को लेकर दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे
JAAC का आरोप है कि सुरक्षा बलों ने बिना किसी उकसावे के प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की, जिससे बड़ी संख्या में लोग हताहत हुए।
दूसरी ओर पाकिस्तान सरकार ने इन आरोपों से इनकार किया है।
सरकारी पक्ष का दावा है कि प्रदर्शनकारी कथित तौर पर आधुनिक हथियारों से लैस थे और उन्होंने पहले सुरक्षा बलों पर हमला किया, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई की गई।
इन परस्पर विरोधी दावों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।
पूरे PoK में बढ़ाई गई सुरक्षा
हिंसा के बाद पाकिस्तान प्रशासन ने पूरे पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है।
रिपोर्टों के अनुसार—
- अतिरिक्त सेना की तैनाती की गई है।
- अर्धसैनिक बल (पैरा मिलिट्री) भेजे गए हैं।
- आर्म्ड कॉन्स्टेबुलरी को भी तैनात किया गया है।
- कई क्षेत्रों में धारा 144 लागू की गई है।
- इंटरनेट सेवाओं पर भी प्रतिबंध लगाए गए हैं।
प्रशासन का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य कानून-व्यवस्था बनाए रखना है।
क्या है PoK की 12 शरणार्थी सीटों का पूरा विवाद?
वर्तमान विवाद का केंद्र PoK विधानसभा की 12 शरणार्थी सीटें हैं।
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर की विधानसभा में कुल 53 सीटें हैं।
इनमें—
- 8 सीटें आरक्षित श्रेणियों के लिए हैं।
- 45 सीटें प्रत्यक्ष चुनाव के माध्यम से भरी जाती हैं।
इन्हीं सीटों में 12 सीटें उन कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं, जो 1947 और उसके बाद जम्मू-कश्मीर से पाकिस्तान के विभिन्न हिस्सों में जाकर बसे थे।
इन सीटों के मतदाता पाकिस्तान के पंजाब, खैबर पख्तूनख्वा और अन्य क्षेत्रों में रहते हैं, जबकि संबंधित सीटें PoK विधानसभा का हिस्सा हैं।
JAAC की मुख्य मांग क्या है?
जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी का आरोप है कि इन 12 सीटों के माध्यम से इस्लामाबाद की राजनीतिक पार्टियां PoK की राजनीति और सरकार गठन को प्रभावित करती हैं।
संगठन का कहना है कि कई बार इन्हीं सीटों के परिणाम विधानसभा में बहुमत का समीकरण बदल देते हैं।
इसी कारण JAAC मांग कर रहा है कि—
- विधानसभा चुनने का अधिकार केवल PoK में रहने वाले मतदाताओं को मिले।
- 12 शरणार्थी सीटों की वर्तमान व्यवस्था समाप्त की जाए।
विपक्षी दलों ने भी उठाए सवाल
रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान के कुछ विपक्षी दलों ने भी चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाए हैं।
विशेष रूप से पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) सहित कुछ दलों ने आरोप लगाया है कि शरणार्थी सीटों का इस्तेमाल चुनावी परिणामों को प्रभावित करने के लिए किया जाता है।
हालांकि चुनावी प्रक्रिया की वैधता को लेकर अलग-अलग पक्षों के अपने-अपने तर्क हैं।
क्या है जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC)?
जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के विभिन्न राजनीतिक दलों, ट्रेड यूनियनों और सामाजिक संगठनों का एक गठबंधन है।
यह संगठन पिछले कुछ वर्षों से कई स्थानीय मुद्दों को लेकर आंदोलन करता रहा है।
वर्ष 2024 में भी इस संगठन ने—
- महंगाई,
- बिजली बिल,
- कर व्यवस्था,
जैसे मुद्दों पर बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन किए थे।
भारत ने चुनाव प्रक्रिया को बताया ‘दिखावटी कवायद’
भारत सरकार ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में हो रहे चुनावों को स्वीकार नहीं किया है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया एक “दिखावटी कवायद” है।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान इस प्रक्रिया के माध्यम से अपने अवैध कब्जे और मानवाधिकार संबंधी चिंताओं से ध्यान हटाने की कोशिश कर रहा है।
पाकिस्तान इन आरोपों को स्वीकार नहीं करता और PoK को लेकर उसका आधिकारिक रुख भारत से अलग है।
PoK क्यों बना हुआ है संवेदनशील मुद्दा?
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर लंबे समय से भारत और पाकिस्तान के बीच सबसे संवेदनशील विवादित क्षेत्रों में शामिल रहा है।
यह क्षेत्र केवल राजनीतिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि सुरक्षा, सीमा प्रबंधन और क्षेत्रीय स्थिरता के लिहाज से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
ऐसे में चुनावी विवाद, स्थानीय विरोध प्रदर्शन और सुरक्षा बलों की कार्रवाई जैसे घटनाक्रम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान आकर्षित करते हैं।
आगे क्या हो सकता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रदर्शन जारी रहते हैं और राजनीतिक समाधान नहीं निकलता, तो क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है।
फिलहाल प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने में जुटा है, जबकि प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर कायम हैं। दूसरी ओर पाकिस्तान सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में स्थिति किस दिशा में जाएगी, यह राजनीतिक निर्णयों, सुरक्षा हालात और स्थानीय घटनाक्रम पर निर्भर करेगा।

