दिल सेवैश्विक

रूस में हुआ बवाल! चर्च के सामने ‘अश्लील’ डांस करने वाली तीन नाबालिग Russian girls को सुनाई गई 11 महीने की सजा, यूनिवर्सिटी से भी हुआ बाहर

Russian girls dance video ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर वायरल होने की कीमत और सख्त कानूनों के बीच की खतरनाक दूरी को उजागर कर दिया है। मॉस्को के एक प्रतिष्ठित धार्मिक स्थल के सामने की गई एक मासूम सी शरारत ने तीन युवती छात्राओं की जिंदगी बदल कर रख दी है, जहाँ उन्हें न सिर्फ अपनी पढ़ाई से हाथ धोना पड़ा बल्कि जेल की सलाखों के पीछे भी जाना पड़ सकता है।

मॉस्को के प्रतिष्ठित कैथेड्रल के सामने डांस और फिर पुलिस की गिरफ्त

यह घटना रूस की राजधानी मॉस्को के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के स्थल कैथेड्रल ऑफ क्राइस्ट द सेवियर की है। बताया जा रहा है कि तीनों छात्राएं, जिनकी उम्र महज 18 वर्ष के आसपास है, टिकटॉक पर एक वीडियो बनाने के लिए इस चर्च के सामने पहुंची थीं। वीडियो में उन्हें कुछ अजीबोगरीब डांस मूव्स करते हुए देखा गया, जिसे बाद में ‘अश्लील’ और ‘धार्मिक भावनाओं के अपमान’ जैसे आरोपों का आधार बनाया गया। वीडियो के वायरल होते ही यह मामला रूस की सख्त मोरल पुलिसिंग करने वाली इकाइयों की नजर में आ गया और जल्द ही तीनों लड़कियों को गिरफ्तार कर लिया गया।

कोर्ट ने सुनाई 11 महीने की सजा, यूनिवर्सिटी ने भी निकाला बाहर

इस मामले की सुनवाई करते हुए रूसी अदालत ने अपना फैसला सुनाया। कोर्ट ने तीनों युवतियों – ए. दिमित्रियेवा, ए. कालिनकिना और आई. पचेलिंत्सेवा – को सार्वजनिक व्यवस्था भंग करने और नागरिकों की धार्मिक भावनाओं का अपमान करने का दोषी पाया। इसके चलते उन्हें 11 महीने के ‘करेक्टिव लेबर’ की सजा सुनाई गई है, जिसका मतलब है कि उन्हें अगले 11 महीने जेल में रहकर सुधारात्मक श्रम करना होगा।

वहीं, इन तीनों की शैक्षणिक संस्था स्ट्रोगनोव रशियन स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ आर्ट एंड इंडस्ट्री ने भी त्वरित कार्रवाई करते हुए तीनों छात्राओं को तुरंत निष्कासित करने का आदेश जारी कर दिया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस घटना को ‘उकसावे वाले कपड़ों में एक पवित्र धार्मिक स्थल की पृष्ठभूमि में किया गया अनुचित नृत्य’ बताया और इसे संस्थान की प्रतिष्ठा के खिलाफ बताते हुए यह कड़ा कदम उठाया।

पुतिन के रूस में पारंपरिक मूल्यों पर जोर और सख्त कार्रवाई

विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के नेतृत्व वाले रूस में चल रहे उस व्यापक अभियान का एक हिस्सा है, जहाँ ‘पारंपरिक रूसी मूल्यों’ को बहुत ऊपर रखा जा रहा है और इनका उल्लंघन करने वालों के खिलाफ बेहद सख्त कार्रवाई की जा रही है। पुतिन का शासन पश्चिमी देशों की ‘उदार’ सोच और ‘अराजक’ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफ एक सांस्कृतिक युद्ध लड़ रहा है, जिसमें ऐसे कृत्यों को सहन नहीं किया जाता।

यह भी गौरतलब है कि यह वही कैथेड्रल ऑफ क्राइस्ट द सेवियर है जहाँ राष्ट्रपति पुतिन अक्सर धार्मिक और राष्ट्रीय समारोहों में शामिल होते हैं। इसलिए, इस स्थान की सुरक्षा और गरिमा को लेकर अधिकारियों की चिंता और भी ज्यादा है।

धार्मिक समूहों ने छात्राओं को ‘मूर्ख’ बताया, कहा- ‘पॉपुलरिटी का भूत’Putin'S Morality Police 'Send Students To Gulag' For Twerking On Cam In Front Of Cathedral

इस पूरे मामले में रूस के रूढ़िवादी और धार्मिक समूह भी सामने आए हैं। एक प्रमुख परंपरावादी समूह सोरोक सोरोकोव ने इन छात्राओं की जमकर आलोचना की है और उन्हें ‘मूर्ख लड़कियां’ तक कहा है। समूह का कहना है कि ये लड़कियां सोशल मीडिया पर पॉपुलर होने के ‘भूत’ के चलते ऐसा ‘अपराध’ कर बैठीं और अब उसकी कीमत चुका रही हैं। उन्होंने इस वीडियो को ‘आपत्तिजनक’ और ‘धर्म के प्रति अनादर’ का प्रतीक बताया।

दुनिया भर में सोशल मीडिया ट्रेंड्स और स्थानीय कानूनों का टकराव

यह घटना एक बड़े सवाल को भी जन्म देती है कि सोशल मीडिया पर वायरल होने के लोभ में लोग कहाँ तक जा सकते हैं और दुनिया के अलग-अलग देशों में अभिव्यक्ति की सीमाएँ कितनी भिन्न हैं। जहाँ कुछ देशों में ऐसे डांस वीडियो को मनोरंजन माना जाता है, वहीं रूस जैसे देशों में इसे सार्वजनिक नैतिकता और धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ एक गंभीर अपराध माना गया है। इससे यह सबक भी मिलता है कि किसी देश की सांस्कृतिक और कानूनी संवेदनशीलताओं को नजरअंदाज करने की कीमत बहुत भारी पड़ सकती है।

निष्कासन और जेल की सजा से युवाओं के भविष्य पर सवाल

तीन युवा छात्राओं के लिए यह फैसला उनके भविष्य के लिए एक गंभीर झटका है। एक पल के गलत फैसले ने न सिर्फ उनकी शिक्षा बाधित कर दी है, बल्कि उनके जीवन में एक आपराधिक रिकॉर्ड भी जोड़ दिया है। यह मामला दुनिया भर के युवाओं के लिए एक चेतावनी के रूप में भी सामने आया है कि सोशल मीडिया की दुनिया में ‘ट्रेंड’ के पीछे भागते हुए वास्तविक दुनिया के कानूनों और सामाजिक मर्यादाओं को कभी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

यह घटना सिर्फ तीन लड़कियों की नासमझी की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस सांस्कृतिक और राजनीतिक संदर्भ की एक झलक है जिसमें आधुनिकता और पारंपरिकता के बीच की लड़ाई तेज होती जा रही है। रूस जैसे देश में, जहाँ राष्ट्रीय पहचान और धार्मिक मूल्यों को सर्वोपरि रखा जाता है, ऐसे कृत्यों को सिर्फ एक मजाक नहीं समझा जाता। इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं, जैसा कि इन तीन युवतियों के सामने आए हैं। यह मामला एक गंभीर चेतावनी के साथ-साथ एक सामाजिक विमर्श को भी जन्म दे रहा है कि व्यक्तिगत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सीमाएँ आखिरकार कहाँ तक होनी चाहिए।

 

Anchal Agarwal (Advocate)

Anchal Agarwal कानूनी मामलों पर परामर्श देती हैं और एक वरिष्ठ सिविल वकील और कानून की प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने जिला सिविल बार एसोसिएशन के सचिव (पुस्तकालय) के रूप में निर्वाचित होकर अपनी नेतृत्व क्षमता का प्रदर्शन किया है।उनके मार्गदर्शन में, कई छात्र और युवा वकील अपने करियर में सफलता प्राप्त कर रहे हैं। उनकी विद्वता और अनुभव कानूनी समुदाय में बहुत सम्मानित हैं, और उनकी नेतृत्व क्षमता और कानूनी मामलों में उनकी गहरी समझ ने उन्हें एक प्रतिष्ठित कानूनी पेशेवर के रूप में मान्यता दिलाई है।

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