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भगवान शिव (Lord Shiva) का प्रिय माह है श्रावण माह: पश्चिम उत्तर प्रदेश का बड़ा पर्व कावड़ यात्रा

भगवान शिव (Lord Shiva) के प्रिय एवं पवित्र मास श्रावण मास में शिव भक्त बड़ी श्रद्धा के साथ गोमुख, श्री केदारनाथ, श्री अमरनाथ, हरिद्वार, नीलकंठ एवं श्री गंगा आदि तीर्थों से गंगाजल के कलश भर कर भगवान शिव की प्रसन्नता हेतु श्रावण मास पर्यंत भगवान शिव के प्रतिष्ठित मंदिरों, ज्योतिर्लिंगों, विग्रहो, स्वरूपों एवं अपनी आस्था के केंद्र शिव मंदिरों में गंगा जल से अभिषेक करने की बहुत ही पवित्र परंपरा है।

श्रावण मास में कावड़ यात्रा पश्चिम उत्तर प्रदेश का बड़ा पर्व है,इस वर्ष यह पवित्र मास १४ जुलाई गुरुवार से प्रारंभ हो गया है,वैसे तो श्रावण मास में जलाभिषेक के लिए शिवरात्रि महत्वपूर्ण मानी गई है परंतु इस माह के सोमवार भी अति महत्वपूर्ण माने गए हैं,चार सोमवार वाले श्रवण मास से वर्षभर सोमवार व्रत रखने का शुभारंभ किया जाता है

उत्तम विवाह योग( कन्याओं के लिए सोलह सोमवार मीठे व्रत), मनोकामना सिद्धि, विपरीत ग्रह स्थितियों में या मृत्यु तुल्य कष्ट होने पर भगवान शिव की शरण में जाना एक श्रेष्ठ एवं सरल साधन है इसके लिए सोमवार व्रत सर्वाधिक लाभकारी हैं।

Lord Shivaशिवरात्रि २६ जुलाई दिन मंगलवार को

श्रावण मास की शिवरात्रि २६ जुलाई दिन मंगलवार को है त्रयोदशी तिथि २५ जुलाई शाम ४रू१६ पर आ जाएगी परंतु सूर्योदय के समय २६ को रहेगी अतः बिना किसी संशय के २६ जुलाई को शिवरात्रि व्रत श्रेष्ठ है। शास्त्रों के अनुसार कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि शिवरात्रि कहलाती है और यह चतुर्दशी तिथि प्रदोष व्यापिनी होनी चाहिए अतः २६ जुलाई को यही विशेष योग है।

शिवपुराण की विश्वेश्वर संहिता के अनुसार भगवान शिव (Lord Shiva) जल के साथ-साथ पुष्प और पत्रों (पुष्पंपत्रं समर्पयामि) से प्रसन्न होने वाले देवता है भगवान शिव को कनेर, आंखें, धतूरा, भांग,बेला,अलसी,मदार, कनेर, हार सिंगार जूही,चमेली इत्यादि के पुष्प विभिन्न विभिन्न मनोकामना ओं के लिए बताए गए हैं वहीं रूप से बिल्वपत्र,शमी पत्र, पीपल के पत्र, अपामार्गा के पत्ते, दूर्वा, बांस इत्यादि को शिव पूजन के लिए मुख्य बताया गया है।

रुद्राभिषेक का फल

साधारण रूप से रुद्र मंत्र द्वारा किसी भी द्रव्य से किया गया अभिषेक श्रुद्राभिषेकश् कहलाता है वही गुरु से प्राप्त भगवान शिव (Lord Shiva) मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र, मृत संजीवनी मंत्र, अथवा घ्नमः शिवाय मंत्र कहते हुए शिवलिंग पर जल चढ़ाने से रुद्राभिषेक का ही फल प्राप्त होता है.

खाटू श्याम श्री महाकाल अखाड़े के महामंडलेश्वर संजीव शंकर जी महाराज ने बताया कलयुग केवल नाम आधारा पंक्ति प्रेरणा देती है कि संपूर्ण श्रावण मास शिव-भगवान शिव (Lord Shiva) नाम उच्चारण से भी व्यक्ति का कल्याण निश्चित है, मस्तक पर त्रिपुंड, कंठ में रुद्राक्ष और मुख्य में शिव नाम शिव उपासना की त्रिवेणी है।

Dr. S.K. Agarwal

डॉ. एस.के. अग्रवाल न्यूज नेटवर्क के मैनेजिंग एडिटर हैं। वह मीडिया योजना, समाचार प्रचार और समन्वय सहित समग्र प्रबंधन के लिए जिम्मेदार है। उन्हें मीडिया, पत्रकारिता और इवेंट-मीडिया प्रबंधन के क्षेत्र में लगभग 3.5 दशकों से अधिक का व्यापक अनुभव है। वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई प्रतिष्ठित समाचार पत्रों, चैनलों और पत्रिकाओं से जुड़े हुए हैं। संपर्क ई.मेल- [email protected]

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