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South Africa की सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला – अब पति भी पत्नी का सरनेम अपना सकेंगे, खत्म हुई सदियों पुरानी परंपरा🔥

South Africa की संवैधानिक अदालत ने ऐसा फैसला सुनाया है, जिसने न सिर्फ वहां की कानूनी व्यवस्था बल्कि समाजिक सोच को भी नई दिशा दे दी है। South Africa Supreme Court Surname Verdict के तहत अब पति भी अपनी पत्नी का उपनाम (सरनेम) अपना सकते हैं। इससे पहले यह अधिकार केवल पत्नी को था कि वह शादी के बाद पति का सरनेम अपनाए। अदालत ने इसे लैंगिक भेदभाव और औपनिवेशिक मानसिकता का अवशेष बताते हुए कानून को ही पलट दिया।


कोर्ट का सख्त रुख – खत्म हुआ औपनिवेशिक कानून

कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि यह प्रथा यूरोपीय उपनिवेशवाद और ईसाई मिशनरियों के प्रभाव में आई थी। अफ्रीकी परंपराओं में महिला शादी के बाद भी अपना नाम रखती थी और बच्चे अक्सर मां के क्लैन नाम से पहचाने जाते थे। अदालत ने कहा –
“यह पितृसत्तात्मक सोच अब पुरानी पड़ चुकी है। समय आ गया है कि पुरुषों को भी वही अधिकार मिले, जो महिलाओं को मिले हैं।”


दो कपल्स की बहादुर कानूनी लड़ाई

यह मामला दो साहसी कपल्स के संघर्ष से शुरू हुआ।

  • Henry van der Merwe अपनी पत्नी Jana Jordaan का सरनेम अपनाना चाहते थे लेकिन उन्हें रोका गया।

  • Andreas Nicolas Bornman अपने नाम के साथ पत्नी का सरनेम जोड़कर Bornman-Donnelly बनाना चाहते थे, लेकिन कानून ने रोक दिया।

दोनों कपल्स ने इस कानून को निचली अदालत में चुनौती दी और वहां जीत हासिल की। बाद में मामला संवैधानिक अदालत तक पहुंचा और आखिरकार उनकी जीत ऐतिहासिक बन गई।


अब संसद करेगी संशोधन

इस फैसले के बाद संसद को Births and Deaths Registration Act में संशोधन करना होगा। तभी यह अधिकार पूरी तरह से कानूनी रूप से लागू होगा। अदालत ने संसद को निर्देश दिया है कि यह बदलाव जल्द से जल्द हो ताकि नागरिक बिना किसी कानूनी अड़चन के यह विकल्प चुन सकें।


सरकार और कानूनी संस्थाओं का समर्थन

इस केस में खास बात यह रही कि सरकार के मंत्री भी पुराने कानून के खिलाफ खड़े हुए।

  • गृह मंत्री Leon Schreiber

  • न्याय मंत्री Mamoloko Kubayi

दोनों ने अदालत में माना कि यह कानून लैंगिक समानता के खिलाफ है और इसे खत्म करना जरूरी है। इसके अलावा Free State Society of Advocates ने भी कपल्स के पक्ष में दलीलें दीं।


वैश्विक बहस को मिली नई दिशा

इस फैसले के बाद पूरी दुनिया में जेंडर इक्विटी पर चर्चा तेज हो गई है। कई देशों में अभी भी यह परंपरा चल रही है कि महिला ही पति का नाम अपनाए। दक्षिण अफ्रीका का यह फैसला एक मिसाल बन सकता है।


भारत में क्या स्थिति है?

भारत में शादी के बाद महिलाओं का पति का उपनाम अपनाना आम है। हालांकि कई परिवारों में महिलाएं अपना नाम बरकरार रखती हैं या दोनों के नाम हाइफ़नेट कर लेती हैं। लेकिन पति द्वारा पत्नी का नाम अपनाने के मामले बेहद दुर्लभ हैं। यह फैसला भारत में भी नई बहस को जन्म दे सकता है कि क्या पुरुषों को भी यह विकल्प मिलना चाहिए।


महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने सराहा फैसला

महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने इस फैसले को एक मील का पत्थर बताया है। उनका कहना है कि यह सिर्फ नाम बदलने का मुद्दा नहीं है बल्कि यह लैंगिक समानता की ओर एक बड़ा कदम है।


समाज में आएगा बड़ा बदलाव

दक्षिण अफ्रीका की यह पहल दुनिया के कई देशों के लिए उदाहरण बन सकती है। यह सिर्फ कानूनी अधिकार का मामला नहीं बल्कि सामाजिक सोच में क्रांति लाने वाला कदम है। अब पति-पत्नी दोनों को बराबरी से यह विकल्प मिलेगा कि शादी के बाद किसका नाम अपनाना है। यह फैसला आने वाली पीढ़ियों के लिए एक संदेश है कि रिश्ते बराबरी के होने चाहिए, परंपरा के नाम पर भेदभाव नहीं।

News-Desk

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