यमन युद्ध

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Yemen में फिर छिड़ सकती है बड़ी जंग! हूतियों को खदेड़ने के लिए सेना उतरी, बाब अल-मंदेब पर बढ़ा कब्जा; सऊदी अरब भी तैयार

Yemen में हूतियों की हालिया सैन्य बढ़त और सरकार की जवाबी कार्रवाई की तैयारी ने करीब 12 साल पुराने संघर्ष को फिर खतरनाक मोड़ पर ला दिया है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि लड़ाई अगर पश्चिमी तट से आगे बढ़कर बाब अल-मंदेब तक पहुंचती है, तो इसका असर केवल यमन की राजनीति या गृहयुद्ध तक सीमित नहीं रहेगा। लाल सागर के महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग, यूरोप-एशिया व्यापार और पहले से गंभीर मानवीय संकट के बीच लाखों आम नागरिकों का भविष्य इस टकराव से प्रभावित हो सकता है। अब असली सवाल यही है कि सऊदी समर्थित सरकारी सेना हूतियों के खिलाफ कितनी बड़ी कार्रवाई करती है और क्या दोनों पक्ष फिर से किसी राजनीतिक समझौते की ओर लौटते हैं या यमन एक और लंबे युद्ध में फंस जाता है।

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Yemen में बाजार पर एयरस्ट्राइक से मची तबाही, 7 की मौत और 40 घायल; बच्चों के भी मारे जाने का दावा, सऊदी-हूती तनाव से फिर बढ़ा युद्ध का खतरा

Yemen में ताजा एयरस्ट्राइक ने एक बार फिर देश के लंबे संघर्ष और उससे जुड़ी मानवीय त्रासदी को सामने ला दिया है। ताइज प्रांत के बाजार में हुए हमले को लेकर हूती स्वास्थ्य मंत्रालय ने 7 लोगों की मौत और करीब 40 लोगों के घायल होने का दावा किया है, जबकि यमनी सरकार का कहना है कि उसकी सेना ने हूती सैन्य कैंप और वाहनों को निशाना बनाया था। इस घटनाक्रम की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से अलग से नहीं की गई है। इसी बीच ड्रोन और मिसाइल हमलों के दावों तथा सऊदी अरब की जवाबी सैन्य कार्रवाई से क्षेत्रीय तनाव बढ़ने की चिंता बनी हुई है। यमन में 2014 से जारी संघर्ष, लाल सागर और बाब अल-मंदेब की रणनीतिक स्थिति तथा हाल के विस्थापन के आंकड़े बताते हैं कि इस संकट का असर केवल युद्धक्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी सबसे बड़ी कीमत आम नागरिकों को चुकानी पड़ रही है।

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मिडिल ईस्ट में नई जंग की आहट: Yemen हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के खिलाफ खोला मोर्चा, रेड सी में बढ़े हमले से क्षेत्रीय तनाव चरम पर

Yemen में हूती विद्रोहियों और सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के बीच हालिया तनाव ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। रेड सी में बढ़ते हमले, समुद्री नाकेबंदी की घोषणाएं और जवाबी सैन्य कार्रवाई से स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। आगे के घटनाक्रम कूटनीतिक प्रयासों, सैन्य गतिविधियों और संबंधित पक्षों के निर्णयों पर निर्भर करेंगे।

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