Yemen में फिर छिड़ सकती है बड़ी जंग! हूतियों को खदेड़ने के लिए सेना उतरी, बाब अल-मंदेब पर बढ़ा कब्जा; सऊदी अरब भी तैयार
Yemen में करीब 12 साल से चले आ रहे संघर्ष ने एक बार फिर खतरनाक मोड़ ले लिया है। यमन की सऊदी समर्थित सरकार ने हूती विद्रोहियों के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू करने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। राष्ट्रपति राशद अल-अलीमी ने रविवार को ऐलान किया कि सरकारी सेना देशभर में राज्य का नियंत्रण फिर से बहाल करेगी और कब्जे वाले इलाकों को वापस लेने के लिए सैन्य कार्रवाई की जाएगी।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब हूतियों ने पिछले 48 घंटों में यमन के पश्चिमी तट पर कई रणनीतिक पहाड़ियों पर अपना कब्जा मजबूत किया है। इसके साथ ही उन्होंने ताइज के आसपास भी दबाव बढ़ाया है।
मामला केवल यमन के अंदर की जमीन की लड़ाई तक सीमित नहीं है। हूतियों की गतिविधियां बाब अल-मंदेब स्ट्रेट के आसपास भी बढ़ी हैं। यह समुद्री रास्ता लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और यूरोप तथा एशिया के बीच होने वाले अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
अगर इस इलाके में हूतियों का नियंत्रण और बढ़ता है, तो इसका असर यमन की लड़ाई से कहीं आगे जाकर अंतरराष्ट्रीय शिपिंग और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है।
यमन में हूतियों का क्षेत्रफल कम, लेकिन आबादी पर बड़ा नियंत्रण
यमन में हूतियों का नियंत्रण पूरे देश पर नहीं है। उनके पास करीब एक-तिहाई यमन का इलाका है। लेकिन इस सीमित क्षेत्र की रणनीतिक अहमियत बहुत ज्यादा है।
हूतियों के नियंत्रण वाले इलाकों में देश की करीब 80 फीसदी आबादी रहती है। इसका मतलब यह है कि नक्शे पर उनका कब्जा भले ही कम दिखाई देता हो, लेकिन देश की बड़ी आबादी और कई महत्वपूर्ण शहरी इलाकों पर उनका प्रभाव काफी बड़ा है।
यही वजह है कि यमन की सरकार के लिए हूतियों से कब्जा वापस लेना केवल जमीन हासिल करने का मामला नहीं है। इसके पीछे देश के राजनीतिक और प्रशासनिक नियंत्रण को फिर से स्थापित करने की बड़ी चुनौती भी है।
सरकारी सेना के सामने सबसे बड़ी मुश्किल यह होगी कि हूतियों ने वर्षों के संघर्ष के दौरान कई इलाकों में मजबूत सैन्य स्थिति विकसित कर ली है।
पश्चिमी तट पर हूतियों की तेजी से बढ़ती पकड़
पिछले 48 घंटों में हूतियों ने यमन के पश्चिमी तट पर कई रणनीतिक पहाड़ियों पर कब्जा किया है।
इन पहाड़ियों का महत्व इसलिए ज्यादा है क्योंकि ऊंचाई वाले इलाकों से आसपास के बड़े क्षेत्र पर निगरानी और सैन्य नियंत्रण आसान हो जाता है।
अगर हूती इन इलाकों के जरिए पश्चिमी तट के हिस्सों को सरकारी नियंत्रण वाले क्षेत्रों से काटने में सफल होते हैं, तो यमन की सरकार के लिए इस पूरे इलाके पर दोबारा नियंत्रण स्थापित करना और मुश्किल हो सकता है।
यमनी पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक मोहम्मद अल-कादी के मुताबिक, आसपास की पहाड़ियों पर कब्जा हूतियों को मजबूत रक्षात्मक स्थिति देता है। इससे तट की ओर से होने वाली संभावित सैन्य कार्रवाई का सामना करना उनके लिए आसान हो सकता है।
यानी सरकार अगर अब पश्चिमी तट पर सैन्य अभियान शुरू करती है तो उसे केवल जमीन पर मौजूद लड़ाकों से नहीं, बल्कि भौगोलिक रूप से मजबूत मोर्चों से भी मुकाबला करना पड़ सकता है।
ताइज पर भी बढ़ा दबाव, शहर के आसपास बड़ी संख्या में लड़ाके
हूतियों की हालिया बढ़त का असर ताइज पर भी दिखाई दे रहा है।
ताइज यमन का तीसरा सबसे बड़ा शहर है। यहां बड़ी संख्या में आम लोग रहते हैं और हजारों सरकारी समर्थक लड़ाके भी तैनात हैं।
शहर के आसपास हूतियों का दबाव बढ़ने से लड़ाई का खतरा सीधे रिहायशी इलाकों तक पहुंच सकता है।
ताइज पहले भी यमन के लंबे संघर्ष में महत्वपूर्ण युद्धक्षेत्र रहा है। अगर यहां फिर बड़े पैमाने पर लड़ाई शुरू होती है, तो आम नागरिकों के लिए स्थिति बेहद मुश्किल हो सकती है।
शहर की रणनीतिक स्थिति को देखते हुए ताइज पर नियंत्रण दोनों पक्षों के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए आने वाले दिनों में यहां सैन्य गतिविधियां बढ़ने की संभावना पर नजर रहेगी।
बाब अल-मंदेब पर हूतियों की नजर, यहां से गुजरता है बड़ा समुद्री व्यापार
यमन के पश्चिमी तट पर लड़ाई का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय पहलू बाब अल-मंदेब स्ट्रेट है।
यह जलडमरूमध्य लाल सागर और अदन की खाड़ी को जोड़ता है। यूरोप और एशिया के बीच आने-जाने वाले जहाजों के लिए यह प्रमुख समुद्री रास्तों में से एक है।
दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, दुनिया के करीब 12 फीसदी तेल इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है। इसके अलावा बड़ी मात्रा में कंटेनर और दूसरे व्यापारिक जहाज भी इस रास्ते का इस्तेमाल करते हैं।
यही वजह है कि बाब अल-मंदेब में सैन्य तनाव केवल यमन या आसपास के देशों की समस्या नहीं रहता। यहां किसी भी तरह का गंभीर व्यवधान वैश्विक व्यापार पर असर डाल सकता है।
हूतियों की इस इलाके में बढ़ती गतिविधियां इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि लाल सागर पहले ही कई सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर चुका है।
ग्रेटर हनीश और लेसर हनीश द्वीपों पर भी बढ़ा नियंत्रण
हालिया घटनाक्रम में हूतियों की नजर केवल तटीय इलाकों पर नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने दक्षिणी लाल सागर में स्थित ग्रेटर हनीश और लेसर हनीश नाम के दो अहम द्वीपों पर भी कब्जा कर लिया है।
ये दोनों द्वीप बाब अल-मंदेब स्ट्रेट से करीब 160 किलोमीटर उत्तर में स्थित हैं।
इन द्वीपों पर नियंत्रण से लाल सागर में हूतियों की रणनीतिक स्थिति और मजबूत हो सकती है। समुद्री मार्गों के करीब स्थित इन इलाकों का सैन्य महत्व इसलिए भी है क्योंकि यहां से समुद्री गतिविधियों पर नजर रखना आसान हो सकता है।
अगर हूती इन इलाकों में अपनी स्थिति लंबे समय तक बनाए रखते हैं, तो बाब अल-मंदेब के आसपास उनका प्रभाव बढ़ने की आशंका है।
यही वह बिंदु है जहां यमन का गृहयुद्ध अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा से सीधे जुड़ जाता है।
होर्मुज स्ट्रेट में तनाव के बीच बाब अल-मंदेब और अहम
मध्य पूर्व में पहले से ही समुद्री रास्तों को लेकर तनाव बना हुआ है। ऐसे समय में बाब अल-मंदेब की रणनीतिक अहमियत और बढ़ गई है।
एक तरफ होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े तनाव ने ऊर्जा आपूर्ति और तेल व्यापार को लेकर चिंता बढ़ाई है, वहीं दूसरी तरफ बाब अल-मंदेब में अस्थिरता यूरोप-एशिया समुद्री व्यापार के लिए नई चुनौती पैदा कर सकती है।
अगर दोनों महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग एक ही समय में गंभीर सुरक्षा जोखिमों का सामना करते हैं, तो जहाजों को लंबे वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करना पड़ सकता है। इससे परिवहन लागत, बीमा और डिलीवरी समय बढ़ सकता है।
यही वजह है कि यमन में हूतियों और सरकारी सेना के बीच बढ़ता संघर्ष अब केवल घरेलू राजनीतिक संकट नहीं रह गया है।
12 साल से जारी लड़ाई ने यमन को तबाह कर दिया
यमन में सरकार और हूतियों के बीच संघर्ष करीब 12 साल से जारी है।
इस संघर्ष में सऊदी अरब यमन की सरकार का समर्थन करता है, जबकि हूतियों को ईरान का समर्थन मिलता है। इस वजह से यमन का संघर्ष लंबे समय से क्षेत्रीय शक्तियों के बीच बड़े टकराव का हिस्सा भी माना जाता रहा है।
2022 में दोनों पक्षों के बीच सीजफायर हुआ था। इसके बाद बड़े पैमाने पर लड़ाई में काफी कमी आई थी और ऐसा लगने लगा था कि यमन धीरे-धीरे लंबे युद्ध से बाहर निकलने की दिशा में बढ़ सकता है।
लेकिन हालिया सैन्य गतिविधियों ने उस उम्मीद को झटका दिया है।
अगर सरकारी सेना और हूतियों के बीच फिर से बड़े पैमाने पर युद्ध शुरू होता है, तो यह वर्षों से चल रहे संघर्ष को एक नए और ज्यादा खतरनाक चरण में ले जा सकता है।
सबसे बड़ा खतरा आम यमनी नागरिकों के लिए
यमन पहले से ही दुनिया के गंभीर मानवीय संकटों में शामिल है। वर्षों की लड़ाई ने देश के बुनियादी ढांचे को बुरी तरह प्रभावित किया है।
अस्पताल, स्कूल, सड़कें, बिजली और दूसरी आवश्यक सेवाएं लंबे समय तक संघर्ष से प्रभावित रही हैं।
वर्ल्ड फूड प्रोग्राम के मुताबिक, कुछ इलाकों में हर चार में से तीन परिवारों को पर्याप्त खाना नहीं मिल रहा।
ऐसे हालात में अगर नई लड़ाई लंबी चलती है तो खाद्य संकट और गहरा सकता है।
नई सैन्य गतिविधियों के कारण हजारों लोग पहले ही विस्थापित हो चुके हैं। अगर लड़ाई पश्चिमी तट, ताइज और दूसरे घनी आबादी वाले क्षेत्रों तक फैलती है, तो विस्थापन की संख्या तेजी से बढ़ सकती है।
यमन के लिए यह केवल सैन्य संघर्ष नहीं होगा। यह लाखों लोगों के लिए भोजन, पानी, स्वास्थ्य और सुरक्षित घर का सवाल बन सकता है।
सऊदी अरब भी उतार सकता है बड़ी सैन्य ताकत
अब इस पूरे घटनाक्रम में सऊदी अरब की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण हो सकती है।
रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब हूतियों के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू करने की तैयारी कर रहा है। रॉयटर्स की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सऊदी अरब एक लाख से ज्यादा सैनिकों को उतार सकता है।
इस संभावित सैन्य कार्रवाई का प्रमुख उद्देश्य बाब अल-मंदेब स्ट्रेट को हूतियों के नियंत्रण से मुक्त कराना और समुद्री व्यापार मार्ग को सुरक्षित करना बताया जा रहा है।
हालांकि इसे फिलहाल संभावित सैन्य विकल्प के रूप में ही देखा जाना चाहिए। बड़े पैमाने पर सऊदी सैन्य अभियान शुरू होने की स्थिति अलग होगी और इसके क्षेत्रीय प्रभाव भी काफी बड़े हो सकते हैं।
सऊदी अरब के सामने सैन्य कार्रवाई के दो विकल्प
रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब के सामने सैन्य कार्रवाई के दो प्रमुख विकल्प हो सकते हैं।
पहले विकल्प में यमन की सरकारी सेना अभियान का नेतृत्व करेगी, जबकि सऊदी अरब उसे सैन्य, खुफिया और दूसरे स्तर का समर्थन देगा।
इसका फायदा यह होगा कि लड़ाई को यमन की अपनी सरकारी सेना के अभियान के रूप में पेश किया जा सकेगा और सऊदी सेना की सीधी भागीदारी सीमित रखी जा सकती है।
दूसरे विकल्प में जरूरत पड़ने पर सऊदी अरब हवाई हमले कर सकता है।
अगर ऐसा होता है तो संघर्ष का स्तर तेजी से बढ़ सकता है। हूती पहले भी सऊदी और दूसरे क्षेत्रीय ठिकानों के खिलाफ हमले करने की क्षमता दिखा चुके हैं। इसलिए सऊदी सैन्य हस्तक्षेप की स्थिति में जवाबी कार्रवाई का खतरा भी रहेगा।
ईरान की भूमिका से बढ़ सकता है क्षेत्रीय तनाव
यमन का संघर्ष पहले से ही सऊदी अरब और ईरान के बीच क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्विता से जुड़ा रहा है।
सऊदी अरब यमन की सरकार का समर्थन करता है, जबकि हूतियों को ईरान का समर्थन मिलता है। ऐसे में अगर सऊदी अरब बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान शुरू करता है, तो ईरान की प्रतिक्रिया पर भी पूरी दुनिया की नजर होगी।
हालांकि किसी संभावित प्रतिक्रिया के बारे में अभी निश्चित दावा करना जल्दबाजी होगी।
लेकिन यह साफ है कि यमन में संघर्ष का नया दौर शुरू होने पर इसका असर केवल यमन तक सीमित रहने की संभावना नहीं है।
अब सबसे बड़ा सवाल- क्या यमन फिर पूर्ण गृहयुद्ध की तरफ बढ़ रहा है?
यमन के सामने इस समय सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या हालिया हूती बढ़त और सरकारी सेना की सैन्य तैयारी देश को फिर उसी बड़े गृहयुद्ध की ओर ले जाएगी, जिससे निकलने में उसे वर्षों लगे हैं।
सरकार अगर पश्चिमी तट और ताइज में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए बड़ा अभियान शुरू करती है और सऊदी अरब उसे व्यापक समर्थन देता है, तो हूती भी अपने कब्जे वाले क्षेत्रों को बचाने के लिए पूरी ताकत लगा सकते हैं।
ऐसे में लड़ाई कई मोर्चों पर फैल सकती है।
और अगर संघर्ष बाब अल-मंदेब तक पहुंचता है, तो इसका असर यमन की सीमाओं से बहुत आगे तक जाएगा। लाल सागर से गुजरने वाले जहाज, यूरोप-एशिया व्यापार और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति सभी पर इसका दबाव पड़ सकता है।

