Muzaffarnagar Ramleela

Muzaffarnagar और आसपास से प्रमुख खबरें

विजयदशमी पर धूं-धूं कर जल गया अहंकारी रावण, रामलीला के मंचन से Muzaffarnagar शहर में छाया उत्सव

Muzaffarnagar दुकानदारों ने बताया कि रामलीला के दौरान उनकी बिक्री दोगुनी हो जाती है, और यह छोटे व्यापारियों के लिए लाभकारी साबित होता है। रामायण के पात्रों से प्रेरित खिलौने और मुखौटे बच्चों के बीच बेहद लोकप्रिय थे। इसके अलावा, महिलाओं ने धार्मिक कैलेंडर और गृहसज्जा से जुड़ी छोटी वस्तुएं भी खरीदीं, जो इस मेले का हिस्सा बनीं।

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Muzaffarnagar रामलीला महोत्सव में शक्ति बाण ने लिया लक्ष्मण के प्राण, संजीवनी से लौटी जीवन की आस

Muzaffarnagar र्शकों ने कलाकारों के प्रदर्शन की सराहना की और इस आयोजन को अपने जीवन का एक अविस्मरणीय अनुभव बताया। यह मंचन न केवल एक धार्मिक उत्सव था, बल्कि यह सामाजिक और सांस्कृतिक चेतना को जागरूक करने वाला एक महत्वपूर्ण आयोजन बन गया।

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Muzaffarnagar में स्वर्ण जयंती रामलीला महोत्सव: राजा दशरथ की मृत्यु और श्रवण कुमार की कथा ने दर्शकों को भावविभोर किया

Muzaffarnagar Ramleela: 50वें स्वर्ण जयंती रामलीला महोत्सव में राजा दशरथ का मोक्ष और श्रवण कुमार प्रसंग ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। पूरी जानकारी पढ़ें।

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Muzaffarnagar में 50वें श्री रामलीला महोत्सव में धनुष यज्ञ और लक्ष्मण-परशुराम संवाद ने किया दर्शकों का मन मोह

Muzaffarnagar रामलीला महोत्सव ने दर्शकों के हृदय में धार्मिक भावनाओं को जागृत किया। स्थानीय कलाकारों का प्रदर्शन दर्शकों के लिए प्रेरणादायक रहा। इस महोत्सव ने न केवल सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित किया बल्कि युवाओं और बच्चों में धार्मिक और सांस्कृतिक जागरूकता भी बढ़ाई।

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Muzaffarnagar की रामलीला: मर्यादा पुरुषोत्तम राम की अनंत गाथाओं का जीवंत मंचन

Muzaffarnagar रामलीला के तीसरे दिन की शुरुआत महाराज दशरथ के दरबार से होती है। मंचन में महाराज दशरथ को मुनि वशिष्ठ के आश्रम की ओर जाते हुए दिखाया गया, जहां वह अपने राज्य की चिंताओं का समाधान खोजने के लिए पहुंचे थे। दशरथ जी ने मुनि वशिष्ठ से अपने राज्य के उत्तराधिकारी के अभाव में उत्पन्न हो रही समस्याओं पर चर्चा की। मुनि वशिष्ठ ने उन्हें श्रंगी ऋषि का सुझाव दिया, जो पुत्रेष्टि यज्ञ के माध्यम से दशरथ जी को संतान प्राप्ति का आशीर्वाद दिला सकते थे।

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