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Kachchatheevu Island को श्रीलंका से ‘‘वापस लेने’’ के बयानों का कोई ‘‘आधार नहीं-Douglas Devananda

Kachchatheevu Island, जिसे कच्चटिवु भी कहा जाता है, एक छोटा सा द्वीप है जो इंडियन ओशन के बाहर, सैंट जॉर्ज चैनल के मध्य में स्थित है। यह द्वीप भारत और श्रीलंका के बीच एक दिवसीय सीमा विवाद का केंद्र रहा है।

कच्छतीवु द्वीप का महत्व इतिहास, धर्म, और संस्कृति से जुड़ा हुआ है। इस द्वीप पर एक चर्च भी है, जो ब्रिटिश काल में बनाई गई थी। लेकिन, भारतीय स्वतंत्रता के बाद, इस द्वीप का स्वामित्व विवादित हो गया।

भारत और श्रीलंका के बीच कच्छतीवु द्वीप पर विवाद का कारण है कि दोनों देशों ने इसे अपना स्वामित्व बताया है। भारत कहता है कि यह द्वीप उसका है, क्योंकि इसका इतिहास भारत से जुड़ा हुआ है, जबकि श्रीलंका कहता है कि यह उनका है, क्योंकि इसका नामांकन उन्होंने किया था।

इस विवाद के चलते, दोनों देशों के बीच कच्छतीवु द्वीप पर सीमा समझौता हुआ था, जिसमें दोनों देशों के नाविकों को इस द्वीप के आसपास मात्र 500 मीटर तक ही जा सकने की अनुमति थी। इसके बावजूद, यह सीमा समझौता भारतीय नाविकों के लिए विवादित है, क्योंकि वे मानते हैं कि कच्छतीवु उनका है।

भारतीय सरकार ने कच्छतीवु द्वीप पर अपना स्वामित्व स्थायी करने के लिए कई बार श्रीलंका सरकार से अपील की है, लेकिन इस समस्या का कोई स्थायी समाधान अभी तक नहीं निकला है।

कच्छतीवु द्वीप का विवाद भारत और श्रीलंका के बीच चल रहा है। यह द्वीप भारतीय समुद्री सीमा से कुछ किलोमीटर दूर है। इस द्वीप के स्वामित्व पर विवाद है क्योंकि इसका महत्व इतिहास, धर्म, और संस्कृति से जुड़ा हुआ है।

भारत के अनुसार, कच्छतीवु उनका है क्योंकि इसका इतिहास भारत से जुड़ा हुआ है। वहाँ पर भारतीय मंदिर और छात्रावास है जो इस बात का संकेत देते हैं कि यह द्वीप भारत का है।

श्रीलंका के अनुसार, कच्छतीवु उनका है क्योंकि इसका नामांकन उन्होंने किया था। उनका कहना है कि इसे उन्होंने अपनी संविधानिक सीमा में शामिल किया है और इसे अपना राज्य मानते हैं।

इस विवाद के बीच, भारत और श्रीलंका ने समझौता किया था जिसमें दोनों देशों के नाविकों को कच्छतीवु के आसपास विचार के लिए अनुमति थी। यह समझौता अभी भी स्थिर नहीं है और दोनों देश इस मुद्दे पर विचार कर रहे हैं।

श्रीलंका के मत्स्य पालन मंत्री Douglas Devananda ने कहा है कि Kachchatheevu Island को श्रीलंका से ‘‘वापस लेने’’ संबंधी भारत से आ रहे बयानों का कोई आधार नहीं है. श्रीलंका के वरिष्ठ तमिल नेता देवानंद की यह टिप्पणी नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा तमिलनाडु में कांग्रेस पार्टी और उसकी सहयोगी द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) पर निशाना साधे जाने के कुछ दिन बाद आयी है. मोदी ने दोनों दलों पर 1974 में कच्चातिवु द्वीप श्रीलंका को सौंपने में राष्ट्रीय हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया गया था.

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) कच्चातिवु द्वीप के आसपास के जलक्षेत्र में मछली पकड़ने के इच्छुक मछुआरों के अधिकारों को सुनिश्चित नहीं करने के लिए भी दोनों दलों पर निशाना साधती रही है. देवानंद ने गुरुवार को जाफना में संवाददाताओं से कहा, यह भारत में चुनाव का समय है, कच्चातिवू के बारे में दावों और प्रतिदावे सुनना असामान्य नहीं है. देवानंद ने कहा, मुझे लगता है कि भारत अपने हितों को देखते हुए इस जगह को हासिल करने पर काम कर रहा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि श्रीलंकाई मछुआरों की उस क्षेत्र तक कोई पहुंच न हो और श्रीलंका संसाधन से युक्त इस क्षेत्र पर कोई अधिकार का दावा नहीं करे.

Douglas Devananda ने कहा है कि कच्चातिवु को श्रीलंका से ‘‘वापस लेने’’ के बयानों का कोई ‘‘आधार नहीं है.’’ श्रीलंकाई मंत्री ने कहा कि 1974 के समझौते के अनुसार दोनों पक्षों के मछुआरे दोनों देशों के क्षेत्रीय जल में मछली पकड़ सकते हैं लेकिन बाद में इसकी समीक्षा की गई और 1976 में इसमें संशोधन किया गया. तदनुसार, दोनों देशों के मछुआरों को पड़ोसी जलक्षेत्र में मछली पकड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया गया. देवानंद ने कहा, वेस्ट बैंक नामक एक जगह होने का दावा किया जाता है जो कन्याकुमारी के नीचे स्थित है – यह व्यापक समुद्री संसाधनों के साथ एक बहुत बड़ा क्षेत्र है – यह कच्चातिवु से 80 गुना बड़ा है, भारत ने इसे 1976 के समीक्षा समझौते में सुरक्षित किया था.

मत्स्य पालन मंत्री के रूप में Douglas Devananda को हाल के महीनों में स्थानीय मछुआरों के दबाव का सामना करना पड़ा है. स्थानीय मछुआरों ने भारतीय मछुआरों द्वारा श्रीलंकाई जलक्षेत्र में अवैध तरीके से मछली पकड़ने पर रोक के लिए व्यापक विरोध प्रदर्शन किया है. उनका कहना है कि भारतीयों द्वारा तलहटी में मछली पकड़ना श्रीलंकाई मछुआरों के हितों के खिलाफ है.

इस साल अब तक कम से कम 178 भारतीय मछुआरों को श्रीलंकाई नौसेना ने गिरफ्तार किया है और उनके 23 ट्रॉलर जब्त किये हैं. देवानंद एक पूर्व-तमिल उग्रवादी हैं, जो अब ईलम पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी का नेतृत्व करते हैं. देवानंद को चेन्नई की एक अदालत ने 1994 में आदतन अपराधी करार दिया था. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कच्चातिवू मुद्दे पर विभिन्न सवालों को लेकर इस मामले पर विदेश मंत्री एस जयशंकर की हालिया टिप्पणी का उल्लेख किया.

उन्होंने कहा, मैं आपको बताना चाहूंगा कि जो मुद्दे उठाए गए हैं, विदेश मंत्री उन पर यहां दिल्ली में और गुजरात में भी प्रेस वार्ता में बोल चुके हैं. जायसवाल ने नयी दिल्ली में कहा, मैं कहूंगा कि आप कृपया उनकी प्रेस वार्ता को देखें. आपको अपने जवाब वहां मिल जाएंगे.

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