इस बार स्वदेशी गुलाल की रहेगी भरमार: मेड इन चाइना से मोह भंग
मुजफ्फरनगर। बीते तीन-चार वर्षों से आयात शुल्क में बढ़ोतरी और अब कोरोना वायरस के खौफ ने जिले के कारोबारियों का मेड इन चाइना से मोह भंग कर दिया है। कभी होली के बाजार पर बुरी तरह कसा चीन का शिकंजा अब ढीला पड़ चुका है। जिले के व्यापारी अब स्वदेशी सामान की बिक्री को तरजीह देने लगे हैं।
मुजफ्फरनगर जिले में होली पर रंग और पिचकारी आदि का करीब ३० से ३५ करोड़ का कारोबार होता है। कभी इस कारोबार पर चीन का आधिपत्य था। थोक कारोबारी बताते हैं कि बीते करीब चार वर्षों से आयात शुल्क में बढ़ोतरी हो जाने से चीन निर्मित सामान का आना लगभग बंद हो गया है।
जिले के थोक व्यापारी मेड इन इंडिया प्रोडक्ट ही मंगाते हैं। दाल मंडी में होली के सामान के थोक विक्रेता अंशुल गुप्ता बताते हैं कि चीन से आने वाला सामान महंगा पड़ता है। इसके साथ ही अब कोरोना का खौफ भी है। इसलिए वहां से तो सामान आने का मतलब ही नहीं बनता। जिला मुख्यालय पर रंग एवं पिचकारी के आठ-दस थोक कारोबारी हैं। सभी हिंदुस्तान की फैक्टरियों से ही सामान मंगाते हैं।
जिले में रंग और गुलाल हाथरस की फैक्टरियों से आता है। पिचकारियां दिल्ली, फरीदाबाद, गुरुग्राम और मेरठ से आ रही हैं, जबकि टोपियां अमरोहा में बनती हैं। गुब्बारे भी मेरठ से ही आते हैं। स्थानीय कारोबारी बताते हैं कि सब कुछ सस्ते दामों पर भारत में ही मिल रहा है तो फिर चीन का महंगा माल क्यों मंगाएं।
होली पर प्रयोग होने वाले प्लास्टिक एवं रबड़ के मुखौटों की सप्लाई चीन से होती है। थोक विक्रेता ललित गोयल बताते हैं कि इनकी मांग पहले ही कम रहती है। कपड़े के मुखौटे हिंदुस्तान में ही तैयार होते हैं।
इसलिए बाजार पर कोई असर नहीं होने वाला। व्यापारियों का कहना है कि चीन से सामान मंगाने की आवश्यकता नहीं है। होली का सामान हिंदुस्तान की फैक्टरियों में ही तैयार हो रहा है।
रंग-गुलाल एवं पिचकारी आदि सब कुछ स्वेदशी ही है जिले के व्यापारियों ने तीन-चार सालों से चीन का सामान बेचना बंद कर दिया है। होली के लिए मेड इन इंडिया का सामान सस्ता एवं बढ़िया है। हर तरह की पिचकारी अब अपने ही देश में तैयार हो रही है।
