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Tonga में भूकंप का कहर! 7.1 तीव्रता के झटके के बाद सुनामी की दहशत, निवासियों को ऊंचाई पर जाने की हुई चेतावनी

Tonga द्वीपसमूह में रविवार को 7.1 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने हड़कंप मचा दिया। यह भूकंप इतना तेज था कि इसके झटके न केवल टोंगा बल्कि नीयू द्वीप तक महसूस किए गए। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार, भूकंप का केंद्र पांगाई गांव के दक्षिण-पूर्व में लगभग 90 किलोमीटर की दूरी पर स्थित था। भूकंप की गहराई कम होने के कारण इससे सुनामी की आशंका बढ़ गई, जिसके बाद अमेरिकी सुनामी चेतावनी केंद्र ने अलर्ट जारी कर दिया।

सुनामी की चेतावनी, निवासियों को ऊंचाई पर जाने की सलाह

चेतावनी में कहा गया कि नीयू और टोंगा के तटीय इलाकों में 0.3 से 1 मीटर ऊंची सुनामी लहरें आ सकती हैं। इसके बाद टोंगा नेशनल डिजास्टर रिस्क मैनेजमेंट ऑफिस ने तुरंत निवासियों को समुद्र तटों से दूर रहने और ऊंचे स्थानों पर जाने की सलाह दी। सोशल मीडिया पर जारी एक बयान में कहा गया, “निचले इलाकों में रहने वाले लोग तुरंत सुरक्षित ऊंचाई पर चले जाएं। समुद्र से दूर रहें और स्थानीय अधिकारियों के निर्देशों का पालन करें।”

फिलहाल, किसी बड़े नुकसान या हताहत की खबर नहीं है, लेकिन अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

क्यों आते हैं टोंगा में इतने भूकंप?

टोंगा प्रशांत महासागर के “रिंग ऑफ फायर” पर स्थित है, जहां दुनिया के सबसे अधिक भूकंप आते हैं। यह क्षेत्र टेक्टोनिक प्लेटों की गतिविधि के लिए जाना जाता है, जहां अक्सर ज्वालामुखी विस्फोट और भूकंप की घटनाएं होती हैं। टोंगा में करीब 100,000 की आबादी वाले इस द्वीपसमूह पर प्राकृतिक आपदाएं एक बड़ा खतरा बनी हुई हैं।

हाल ही में म्यांमार में भी आया था भीषण भूकंप

यह भूकंप ऐसे समय आया है जब दक्षिण-पूर्व एशिया और प्रशांत क्षेत्र में भूकंपीय गतिविधियां बढ़ी हुई हैं। 28 मार्च को म्यांमार में 7.7 तीव्रता का भूकंप आया था, जिससे कई इमारतें ढह गईं और बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ था। विशेषज्ञों का मानना है कि ये घटनाएं पृथ्वी की टेक्टोनिक प्लेटों में बढ़ती हलचल का संकेत देती हैं।

नेपाल और भूकंप: एक डरावना इतिहास

जब भी भूकंप की बात होती है, नेपाल का नाम जरूर आता है। 2015 में आए 7.8 तीव्रता के विनाशकारी भूकंप में नेपाल में 9,000 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी और लाखों बेघर हो गए थे। नेपाल हिमालयन बेल्ट पर स्थित है, जहां भारतीय और यूरेशियन प्लेटों की टक्कर के कारण अक्सर भूकंप आते हैं।

राजशाही और प्राकृतिक आपदाएं: टोंगा का संदर्भ

टोंगा एक ऐसा देश है जहां आज भी राजशाही व्यवस्था है। यहां के राजा और स्थानीय प्रशासन को प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए अक्सर चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। 2022 में हुंगा टोंगा-हुंगा हापाई ज्वालामुखी विस्फोट के बाद से यह क्षेत्र और भी संवेदनशील हो गया है। उस विस्फोट ने इतनी ऊर्जा छोड़ी थी कि पूरे प्रशांत क्षेत्र में सुनामी की लहरें उठ गई थीं।

क्या होगा अब?

वैज्ञानिकों का कहना है कि टोंगा और आसपास के द्वीपों में भूकंप की गतिविधियां जारी रह सकती हैं। स्थानीय प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। अंतरराष्ट्रीय संगठन भी मदद के लिए तैयार हैं, लेकिन फिलहाल राहत कार्यों की जरूरत नहीं पड़ी है।

टोंगा में आया यह भूकंप एक बार फिर प्रकृति की ताकत की याद दिलाता है। जबकि अभी तक कोई बड़ी क्षति की खबर नहीं है, लेकिन सुनामी की चेतावनी ने लोगों में दहशत फैला दी है। इस घटना के बाद एक बार फिर यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि क्या प्रशांत द्वीपों को भूकंपरोधी ढांचे की जरूरत है? क्या इन देशों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और सहायता मिलनी चाहिए?

जैसे-जैसे समय बीत रहा है, निगरानी जारी है। दुनिया की नजरें अब टोंगा पर टिकी हुई हैं।


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