भारत में Ukrainian नागरिकों की गिरफ्तारी पर कूटनीतिक तनाव: ‘राजनीति से प्रेरित’ बताकर यूक्रेन ने जताई आपत्ति
News-Desk
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diplomatic tension, Foreign Nationals Arrest, india myanmar border, international news, Mizoram news, Russia-Ukraine Conflict, Ukraine India Relations, UkrainianUkrainian Citizens Arrest India मामले ने अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नया कूटनीतिक मोड़ ले लिया है। भारत में छह यूक्रेनी नागरिकों की गिरफ्तारी के बाद यूक्रेन सरकार और भारत के बीच संवाद का विषय बन गया है। यह मामला सिर्फ कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब इसमें वैश्विक राजनीति और द्विपक्षीय संबंधों की झलक भी दिखाई देने लगी है।
नई दिल्ली से सामने आई जानकारी के अनुसार, इन यूक्रेनी नागरिकों को कथित तौर पर म्यांमार में आतंकी प्रशिक्षण देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। हालांकि, यूक्रेन ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे ‘राजनीति से प्रेरित’ कार्रवाई बताया है।
मिजोरम में अवैध उपस्थिति और विशेष परमिट का मुद्दा
यूक्रेन के विदेश मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि यह मामला मिजोरम में यूक्रेनी नागरिकों की अनधिकृत उपस्थिति से जुड़ा हुआ है। भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में विदेशी नागरिकों के प्रवेश के लिए विशेष परमिट की आवश्यकता होती है।
बयान के अनुसार, संबंधित नागरिकों के पास यह आवश्यक अनुमति नहीं थी, जिससे मामला और गंभीर हो गया। साथ ही, यह भी आरोप है कि भारत और म्यांमार की सीमा के बीच कथित तौर पर अवैध आवाजाही की गई।
यह पहलू जांच एजेंसियों के लिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा को लेकर पहले से ही सख्ती बरती जाती रही है।
यूक्रेन दूतावास को नहीं दी गई आधिकारिक जानकारी
यूक्रेन के विदेश मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय परंपराओं के अनुसार किसी भी विदेशी नागरिक की गिरफ्तारी की सूचना संबंधित देश के दूतावास को दी जानी चाहिए।
लेकिन इस मामले में भारत में स्थित यूक्रेन दूतावास को भारतीय अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक सूचना नहीं दी गई। इस पर यूक्रेन ने चिंता व्यक्त करते हुए पारदर्शिता की मांग की है।
दूतावास ने बताया ‘राजनीति से प्रेरित’ मामला
भारत स्थित यूक्रेन के दूतावास ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। दूतावास का कहना है कि यह कार्रवाई कथित तौर पर ‘रूसी पक्ष’ की सूचना पर आधारित है, जिससे यह मामला राजनीतिक रंग लेता नजर आ रहा है।
यूक्रेन ने स्पष्ट किया है कि उसका किसी भी प्रकार की आतंकी गतिविधियों से कोई संबंध नहीं है और उसने ‘स्टेट स्पॉन्सरशिप’ यानी सरकारी स्तर पर आतंकवाद के समर्थन के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।
रूस पर गंभीर आरोप, रिश्ते बिगाड़ने की कोशिश का दावा
Ukrainian Citizens Arrest India मामले में यूक्रेन ने रूस पर सीधे तौर पर आरोप लगाया है। यूक्रेन का मानना है कि रूस भारत और यूक्रेन जैसे मित्र देशों के बीच अविश्वास पैदा करने की कोशिश कर रहा है।
यूक्रेन ने कहा कि एक आक्रामक देश के रूप में रूस इस तरह की सूचनाओं के जरिए कूटनीतिक संबंधों को प्रभावित करने का प्रयास कर रहा है।
यूक्रेन ने याद दिलाया अपना रुख
यूक्रेन ने अपने बयान में यह भी कहा कि वह खुद लंबे समय से ‘रूसी आतंकवाद’ का शिकार रहा है और वह किसी भी रूप में आतंकवाद का समर्थन नहीं करता।
इसके साथ ही, 23 अगस्त 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यूक्रेन यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा गया कि दोनों देशों ने आतंकवाद के खिलाफ मिलकर काम करने का संकल्प लिया था।
भारत से निष्पक्ष जांच और पारदर्शिता की अपील
यूक्रेन ने भारतीय एजेंसियों से इस मामले में निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की अपील की है। साथ ही यह भी कहा है कि जांच तथ्यों के आधार पर होनी चाहिए, न कि किसी बाहरी सूचना या दबाव के आधार पर।
यूक्रेन ने यह भी भरोसा जताया कि भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में कानून के तहत उचित प्रक्रिया का पालन किया जाएगा।
मानवाधिकारों के सम्मान की मांग
यूक्रेन ने अपने नागरिकों के मानवाधिकारों को लेकर भी चिंता जताई है। उसने उम्मीद जताई है कि हिरासत में लिए गए नागरिकों के साथ अंतरराष्ट्रीय कानूनों और मानवाधिकार मानकों के अनुसार व्यवहार किया जाएगा।
भारत के साथ सहयोग का प्रस्ताव
यूक्रेन ने इस पूरे मामले में भारत सरकार के साथ सहयोग करने की पेशकश भी की है। ‘आपराधिक मामलों में पारस्परिक कानूनी सहायता संधि’ के तहत दोनों देशों के बीच सहयोग की बात कही गई है।
यह संकेत देता है कि यूक्रेन इस मामले को टकराव की बजाय सहयोग के जरिए सुलझाना चाहता है।
कूटनीतिक संतुलन की परीक्षा
Ukrainian Citizens Arrest India मामला भारत-यूक्रेन संबंधों के लिए एक संवेदनशील परीक्षा बनकर सामने आया है। एक ओर जहां सुरक्षा एजेंसियां जांच में जुटी हैं, वहीं दूसरी ओर कूटनीतिक स्तर पर संतुलन बनाए रखना भी महत्वपूर्ण हो गया है।
इस मामले का अंतिम निष्कर्ष आने वाले समय में दोनों देशों के संबंधों पर असर डाल सकता है।

