खेल जगत

मैट पर लौटीं Vinesh Phogat: सुप्रीम कोर्ट से राहत के बाद एशियन गेम्स ट्रायल में एंट्री, विवादों के बीच बढ़ी निगाहें

भारतीय कुश्ती जगत की सबसे चर्चित खिलाड़ियों में से एक Vinesh Phogat ने आखिरकार एशियन गेम्स 2026 के चयन ट्रायल में हिस्सा लेने के लिए मैट पर वापसी कर ली है। पिछले कई दिनों से चल रहे कानूनी और प्रशासनिक विवादों के बीच शनिवार को वह दिल्ली स्थित Indira Gandhi Indoor Stadium पहुंचीं, जहां एशियन गेम्स के लिए चयन प्रक्रिया आयोजित की जा रही है।

ट्रायल स्थल से सामने आई तस्वीरों में विनेश अपने कोच और सपोर्ट स्टाफ के साथ रणनीति बनाती और मुकाबले से पहले वॉर्म-अप करती नजर आईं। उनकी वापसी ने न केवल कुश्ती प्रेमियों का ध्यान खींचा है, बल्कि पूरे खेल जगत की निगाहें भी अब इस ट्रायल पर टिक गई हैं।


वजन परीक्षण पास करने के बाद बढ़ा आत्मविश्वास

ट्रायल से पहले सबसे ज्यादा चर्चा विनेश फोगाट के वजन परीक्षण को लेकर थी। मीडिया से बातचीत में उन्होंने बताया कि उनका आधिकारिक वजन निर्धारित समय के अनुसार हुआ और उन्होंने 53 किलोग्राम वर्ग के लिए आवश्यक मानक पूरा कर लिया।

पेरिस ओलंपिक के दौरान वजन से जुड़ा विवाद झेल चुकी विनेश के लिए यह चरण बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा था। वजन परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा होने के बाद उनके समर्थकों और खेल विशेषज्ञों ने इसे सकारात्मक संकेत माना है।


सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद खुला ट्रायल का रास्ता

विनेश फोगाट की ट्रायल में भागीदारी आखिरी समय तक अनिश्चित बनी हुई थी। मामला अदालत तक पहुंच गया था और इस पर पूरे देश की नजर थी।

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में सुनवाई के दौरान विनेश को एशियन गेम्स चयन ट्रायल में भाग लेने की अनुमति दे दी। इससे पहले कुश्ती महासंघ की ओर से ट्रायल में उनकी भागीदारी पर आपत्ति जताई गई थी, लेकिन अदालत ने तत्काल राहत देते हुए उनके ट्रायल में शामिल होने का रास्ता साफ कर दिया।

खेल जगत में इस फैसले को महिला खिलाड़ियों के अधिकारों और निष्पक्ष चयन प्रक्रिया के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


गोंडा प्रतियोगिता से शुरू हुआ पूरा विवाद

वर्तमान विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब विनेश फोगाट गोंडा में आयोजित राष्ट्रीय रैंकिंग कुश्ती प्रतियोगिता में भाग लेने पहुंची थीं। उस दौरान उन्हें प्रतियोगिता में शामिल होने की अनुमति नहीं मिली थी।

इसके बाद कुश्ती महासंघ और विनेश फोगाट के बीच मतभेद सार्वजनिक रूप से सामने आए। मामला धीरे-धीरे खेल प्रशासन, चयन प्रक्रिया और नियमों की व्याख्या से जुड़ी बड़ी बहस में बदल गया।

खेल विशेषज्ञों का कहना है कि यह विवाद केवल एक खिलाड़ी की भागीदारी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने भारतीय खेल प्रशासन की प्रक्रियाओं पर भी सवाल खड़े किए।


WFI ने क्यों लगाया था प्रतिबंध?

कुश्ती महासंघ का कहना था कि संन्यास से वापसी करने वाले खिलाड़ियों के लिए कुछ प्रक्रियाओं का पालन अनिवार्य होता है। इसी आधार पर महासंघ ने विनेश की पात्रता को लेकर सवाल उठाए थे।

इसके साथ ही अनुशासन और नियमों से जुड़े कुछ मुद्दों पर भी उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया था। महासंघ ने कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब भी तलब किया था।

हालांकि विनेश और उनके समर्थकों का कहना था कि नियमों की व्याख्या और उनका लागू होना निष्पक्ष तरीके से होना चाहिए तथा किसी खिलाड़ी को अनुचित रूप से अवसर से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।


दिल्ली हाईकोर्ट से मिली थी पहली बड़ी राहत

सुप्रीम कोर्ट से पहले विनेश फोगाट को दिल्ली हाईकोर्ट से भी राहत मिली थी। अदालत ने कहा था कि चयन प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए।

इसके साथ ही ट्रायल की वीडियो रिकॉर्डिंग कराने और स्वतंत्र निगरानी में चयन प्रक्रिया संपन्न कराने के निर्देश भी दिए गए थे। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि महिला खिलाड़ियों से जुड़े विशेष परिस्थितियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

यह फैसला बाद में पूरे विवाद का महत्वपूर्ण आधार बन गया।


पेरिस ओलंपिक की यादें फिर हुईं ताजा

विनेश फोगाट का नाम आते ही खेल प्रेमियों को पेरिस ओलंपिक का वह भावुक अध्याय याद आता है, जब उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल तक का सफर तय किया था।

हालांकि फाइनल से पहले वजन जांच में मामूली अंतर पाए जाने के बाद उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया था। यह घटना भारतीय खेल इतिहास की सबसे चर्चित और भावनात्मक घटनाओं में से एक मानी जाती है।

इसके बाद उन्होंने कुश्ती से संन्यास लेने का ऐलान किया था, लेकिन बाद में वापसी का फैसला लेकर उन्होंने एक बार फिर अपने संघर्ष और जज्बे का परिचय दिया।


सुरक्षा के कड़े इंतजाम, हर गतिविधि पर नजर

विवादों और कानूनी प्रक्रिया को देखते हुए ट्रायल स्थल पर सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं। स्टेडियम परिसर और ट्रायल एरिया के आसपास सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं।

आयोजकों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि चयन प्रक्रिया पूरी तरह शांतिपूर्ण, पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से संपन्न हो। खिलाड़ियों और अधिकारियों की गतिविधियों पर भी निगरानी रखी जा रही है।


एशियन गेम्स 2026 के लिए क्यों अहम हैं ये ट्रायल?

एशियन गेम्स 2026 भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण खेल आयोजन माना जा रहा है। कुश्ती उन खेलों में शामिल है जिनसे भारत को हमेशा पदक की उम्मीद रहती है।

ऐसे में चयन ट्रायल केवल एक प्रतियोगिता नहीं बल्कि देश का प्रतिनिधित्व करने वाले खिलाड़ियों को चुनने की प्रक्रिया है। विनेश फोगाट जैसी अनुभवी खिलाड़ी की भागीदारी से प्रतिस्पर्धा और अधिक रोचक हो गई है।

खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वह अपनी पुरानी लय हासिल कर लेती हैं तो एशियाई स्तर पर भारत के लिए एक बार फिर बड़ी उम्मीद बन सकती हैं।


अब प्रदर्शन पर टिकी नजरें

कई महीनों से विवादों, कानूनी लड़ाई और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के बीच रहने के बाद अब फोकस पूरी तरह मैट पर है। खेल प्रेमी यह देखना चाहते हैं कि विनेश फोगाट ट्रायल में कैसा प्रदर्शन करती हैं और क्या वह एशियन गेम्स के लिए भारतीय टीम में अपनी जगह बना पाती हैं।

उनकी वापसी केवल एक खिलाड़ी की वापसी नहीं बल्कि संघर्ष, धैर्य और खेल भावना की भी कहानी मानी जा रही है।


एशियन गेम्स 2026 चयन ट्रायल में विनेश फोगाट की वापसी भारतीय खेल जगत की सबसे चर्चित घटनाओं में शामिल हो गई है। अदालतों से मिली राहत, कुश्ती महासंघ के साथ विवाद और पेरिस ओलंपिक के बाद की परिस्थितियों के बीच अब सबकी नजर उनके प्रदर्शन पर है। आने वाले मुकाबले तय करेंगे कि यह वापसी केवल चर्चा तक सीमित रहती है या फिर भारतीय कुश्ती में एक नए अध्याय की शुरुआत बनती है।

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