Yogi Adityanath
Feature

विश्व हिन्दू महासंघ राष्ट्रीय अध्यक्ष हिन्दू सम्राट मान्य महंत योगी आदित्यनाथ का 50 वे वर्ष में 5 जून को प्रवेश…

देवभूमि उत्तराखंड की जनपद पौड़ी गढ़वाल के ग्राम पंचूर में 5 जून सन 1972 को देवत्व व सिंहत्व का एक प्रकाश पुंज अजय सिंह बिष्ट के नाम से उत्पन्न हुआ। गोरखनाथ मंदिर गोरखपुर के श्री महंत अवेद्यनाथ जी ने 22 वर्षीय अजय सिंह बिष्ट को 15 फरवरी सन 1994 को दीक्षाभिषेक कर उत्तराधिकारी के रूप में अजय सिंह बिष्ट से योगी आदित्यनाथ बना दिया ।

12 सितंबर 2014 को गुरुदेव अवेद्यनाथ के ब्रह्मलीन होने पर 14 सितंबर 2014 को उत्तराधिकारी योगी आदित्यनाथ गोरक्षपीठाधीश्वर के पद पर महिमामंडित हो गए। गोरक्ष पीठाधीश्वर बनने के बाद प्रथम साक्षात्कार में योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मैं माननीय अशोक सिंघल के सान्न्ध्यि में राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़ा रहा।

सिंघल जी का गोरखनाथ मंदिर प्रायः आना जाना लगा रहता था। गुरुदेव की वजह से गोरखनाथ मंदिर आंदोलन का केंद्र बन गया। मैं विद्यार्थी जीवन में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का सदस्य रहा। विज्ञान का छात्र होने के नाते सोचा था कि वैज्ञानिक बन कर जीवन समाज सेवा में लगाऊंगा, किंतु गुरुदेव के सम्मोहन ने सन्यासी बना दिया, और क्षण भर में पूरी की पूरी जीवन धारा ही पलट गई। अब योग और अध्यात्म के गूढ़ रहस्यों को जानना ही मेरे जीवन का अभीष्ट बन गया ।

मात्र 26 वर्ष की आयु में योगी आदित्यनाथ सन 1998 में गोरखपुर से पहली बार सांसद बने। पांचवी बार सांसद रहते हुए 45 वर्षीय योगी उत्तर प्रदेश के 32 वें मुख्यमंत्री के रूप में 19 मार्च सन 2017 को शपथ ग्रहण किए।

हिंदू उत्पीड़न की व्यथा कथा से व्यथित योगी ने सन 2002 में हिंदू युवा वाहिनी का गठन किया। वाहिनी के संरक्षक के रूप में नेपाल बॉर्डर पर माओवादियों के बढ़ते प्रभाव को रोका। विश्व हिंदू महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष योगी आदित्यनाथ अंतर्राष्ट्रीय हिंदू संगठन विश्व हिंदू महासंघ के अंतर्राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी हैं

इस नाते अंतर्राष्ट्रीय विराट हिंदू सम्मेलनों, सन 2006 गोरखपुर, सन 2010 हरिद्वार तथा सन 2016 काठमांडू नेपाल में योगी गुलामी के चिन्हों को हटाने तथा नेपाल को संवैधानिक हिंदू राष्ट्र घोषित करने का प्रस्ताव रखा। हिंदुत्व पुनर्जागरण अभियान के महानायक योगी जहां खड़े हो जाते हैं वहीं से सभा शुरू हो हो जाती है।

वह स्थान जनाकर्षण का केंद्र बन जाता है। गेरुआ वस्त्र धारी सन्यासी की एक झलक पाने के लिए जनसमूह उमड़ पड़ता है, भारत में रहना है योगी योगी कहना है, योगी नहीं अंगारा है हिंदुस्तान का तारा है , योगी नहीं योगेश्वर है परमपिता परमेश्वर है, जैसे गगनभेदी नारों से उनका स्वागत करती है।

कुछ ऐसे हैं जो योगी को सुनने आते हैं, कुछ देखने आते हैं पर अधिकाधिक लोग उनमें स्वामी विवेकानंद, नेताजी सुभाष चंद्र बोस या छत्रपति शिवाजी महाराज की छवि ढूंढने आते हैं ।

योगी का हिंदुत्व व विकास मात्र दो शब्द नहीं अपितु अखंड शक्तिशाली भारत के निर्माण का एक सारगर्भित मंत्र है। हिंदुत्व जहां राष्ट्रीयता का पर्याय है वहीं विकास खुशहाली का सोपान। आज देश दुनिया में कहीं भी हिंदू उत्पीड़न की घटनाएं होती हैं बरबस ही लोगों की निगाहें गोरक्ष पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ की ओर जाती हैं ।

हिंदुत्व के मान सम्मान हेतु योगी को जेल की यात्रा भी करनी पड़ी। संकटों से जूझना व खतरों से खेलना योगी की आदत है। कोरोना जैसी महामारी के समय जहां अन्य राजनेता डर के मारे घरों में दुबके हैं, वहीं एक कर्मयोगी पीड़ितों के पास पहुंचकर उनका कुशलक्षेम जान रहा है। यही एक सन्यासी का राजधर्म है ।

बड़े से बड़े संकट को सुअवसर में बदल देना उनके बाएं हाथ का खेल है। अत्यंत संवेदनशील, नाथपंथ के सर्वोच्च धर्माध्यक्ष, योगी का खानपान, भोजन प्रसाद, रहन-सहन एक सामान्य व्यक्ति की तरह ही है।सोशल साइट्स पर बेहद लोकप्रिय योगी की हर बात को लोग पोस्ट, लाइक, कमेंट, शेयर करते रहते हैं।

जब किसी प्रदेश की कानून व्यवस्था खराब होने लगती है तो लोग लिखते हैं यदि मुख्यमंत्री का ट्रांसफर हो सके तो योगी को यहां भेज दीजिए।अर्थात, योगी आदित्यनाथ व कानून व्यवस्था एक-दूसरे के पर्याय बन चुके हैं। शासक के रूप में कोर्ट ने भी प्रशंसा की है। फेम इंडिया के सर्वे में योगी को सीएम नंबर वन चुना गया।

संपूर्ण भारत में हुए जनमत के आधार पर न्यूज़ चैनल आज तक द्वारा योगी को सबसे तेज मुख्यमंत्री घोषित किया गया। कश्मीर में चुनाव हो तो योगी आदित्यनाथ, बंगाल, महाराष्ट्र में चुनाव हो तो योगी आदित्यनाथ , राजस्थान केरल , तमिलनाडु , आंध्रप्रदेश, उड़ीसा में चुनाव हो तो योगी आदित्यनाथ ।

अर्थात आज की तारीख में पूरब पश्चिम उत्तर दक्षिण चारों तरफ जिस मुख्यमंत्री क्रांतिकारी योद्धा के जनाधार का डंका बजता है उसका नाम है योगी आदित्यनाथ। बहुभाषी भारत में हिंदी भाषी योगी आदित्यनाथ प्रत्याशियों के विजय प्रतीक बन गए हैं । अमेरिका,रूस, मलेशिया, नेपाल, कंबोडिया ,थाईलैंड, सिंगापुर इत्यादि देशों की यात्रा करने वाले योगी दर्जनो़ं शैक्षिक संस्थाओं के अध्यक्ष, प्रबंधक, संरक्षक, पुस्तकों के लेखक ,पत्र पत्रिकाओं के संपादक तथा अवधूत भेष बारह पंथ योगी महासभा के सर्वोच्च जिम्मेदार व्यक्ति हैं ।

धर्म और राजनीति को परस्पर पूरक मानने वाले योगी का मत है कि मजहब नहीं संस्कृति होती है राष्ट्र का आधार। एक योगी के लिए क्या सत्ता और क्या संन्यास ,लोक कल्याण ही उसके जीवन का उद्देश्य होना चाहिए । कथनी करनी में अभेद स्थापित करने वाले योगी जी इसे कदम कदम पर चरितार्थ करते हैं।

20 अप्रैल 2020 को योगी लखनऊ में कोरोना वायरस से निपटने के लिए टीम 11 की बैठक ले रहे थे, मीटिंग के मध्य एक दुखद समाचार मिला। अविचलित योगी अपना कार्य करते रहे। बैठक के बाद अपने पूर्व गृहस्थ आश्रम के कैलासवासी पिताजी को श्रद्धांजलि देकर लोकहित के कार्य में जुट गए।

विपक्षी कहते हैं योगी पूजा-पाठ पर ज्यादा ध्यान देते हैं, जनता के काम पर कम। ऐसे लोग इस बात को भूल जाते हैं चाहे जनसमस्याओं का निस्तारण हो या बाढ़ की विभीषिका , इंसेफेलाइटिस का कहर हो या कोरोना जैसी महामारी, राहत कार्य हो या विकास की गति , योगी लय , प्रलय व महाप्रलय मे चट्टान की तरह अडिग रहते हैं।योगी की कार्यशैली योगी मॉडल के रूप में देश विदेश में चर्चित है। स्वयं में योगी पर सबका सहयोगी, स्वयं मे विरागी पर सबका सहभागी, कार्य से आसक्ति संसार से विरक्ति यही उनकी नीति और नियति है।

गोरक्षपीठ सामाजिक समरसता की प्रख्यात पीठ है। यहां छुआछूत, जाति पाति, अगडा़ पिछड़ा, दीन दलित जैसे शब्दों का कोई स्थान नहीं। योगी लोकहित के लिए विषपान करने वाले भगवान शिव के अवतार महायोगी गुरु गोरखनाथ के अंश हैं। विषय कोई हो ,मंच कोई हो, समरसता ही उनके भाषण का मुख्य बिंदु होती है। योगी का हिंदुत्व व विकास, सबका साथ सबका विकास तुष्टीकरण किसी का नहीं, का पर्याय बन चुका है।

अंधाधुंध विकास नहीं, बल्कि संस्कृति प्रकृति युक्त विकास के पक्षधर,कथनी करनी में अभेद स्थापित करने तथा क्षण प्रतिक्षण का हिसाब रखने वाले योगी कभी कच्ची गोली नहीं खेलते, इसीलिए बिना किसी लाग लपेट के सीधे कहते हैं मैं दंगाइयों की आरती नहीं उतारूंगा, मेरे एक हाथ में माला है तो दूसरे में भाला, जो जिस भाषा में समझेगा उसे उसी भाषा में समझाऊंगा। गुंडे सुधर जाएं या यूपी छोड़ दें।

अन्यथा राम नाम सत्य भीषण संकट में योगी सारथी वह महारथी दोनों होते हैं। वे खुद तय करते हैं कि केवल पाञ्चजन्य के उद्घोष से ही काम हो जाएगा या फिर गांडीव भी उठाना पड़ेगा । अत्याचारियों, व्यभिचारियों व भ्रष्टाचारियों के लिए योगी महाकाल हैं। आपदा प्रबंधन के गुर यदि किसी को सीखना है तो वह योगी जी से सीखे, योगी के जीवन के दो प्रमुख पक्ष है धर्म और राजनीति समाचार जगत ने अभी तक उनसे सिर्फ राजनीति पर ही चर्चा की है यदि अध्यात्म के बिंदु पर चर्चा करें तो आश्चर्य होगा कि योगी गूढ़ से गूढ़ विषयों को भी सरलता से बता देते हैं।

\दुनिया का सबसे बड़ा दहशतगर्द कालियानाग द्वापर युग में कालीदह में रहता था उसके आतंक से ब्रज क्षेत्र के कालीदह के आसपास के जल,थल, वायु सभी मार्ग बंद थे। भगवान श्री कृष्ण गेंद निकालने के बहाने कालीदह में कूद जाते हैं और आतंक व दहशत का पर्याय बने कालियानाग को पकड़कर उसकी नाक में नकेल डाल कर पीठ पर चार लात मारकर कालीदह से बाहर खदेड़ने का काम करते हैं। जिस दिन सनातनधर्मी लोक सन्यासी योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में एकजुट हो जाएंगे, उस दिन आज के योग योगेश्वर योगी आदित्यनाथ दहशतगर्दों को पकड़कर उनकी नाक में नकेल डाल कर पीठ पर चार लात मार कर देश दुनिया से बाहर खदेड़ने का काम करेंगे ।

सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के प्रबल पक्षधर योगी जी को गुलामी का एहसास कराने वाली चीजें कतई पसंद नहीं है। गोरखपुर का सांसद बनते ही उन्होंने मियां बाजार को माया बाजार, उर्दू बाजार को हिंदी बाजार तथा अलीनगर को आर्य नगर बना दिया। मुख्यमंत्री बनते ही लगभग 400 साल पुराना इलाहाबाद प्रयागराज बन गया, फैजाबाद अपने मूल रूप अयोध्या में समाहित हो गया और मौका मिला तो हैदराबाद भी भाग्यनगर बन जाएगा। अयोध्या ,काशी, वृंदावन, बरसाना पवित्र तीर्थ स्थल घोषित हो गए। गौवध करने वालों को सीधे जेल का रास्ता दिखा दिया गया।

हिंदू मान बिंदुओं को पुनः प्रतिष्ठित करने के लिए ही योगी जी का अवतार हुआ है।नंगे पांव दौड़ने वाले योगी के जीवन का सबसे अलौकिक सुखद क्षण वह रहा है जब वे अस्थायी मंदिर से प्रभु श्री राम को अपनी गोद में उठाकर स्थायी मंदिर में स्थापित किए।इसी तरह के और भी दैवीय कार्य उन्हीं के हाथों होने हैं। आकर्षक व्यक्तित्व के धनी, अलौकिक आभामंडल से पूर्ण योगी जी आज मुख्यमंत्री हैं ,कल प्रधानमंत्री और परसों देश दुनिया के बहुचर्चित राजनेता होंगे। आज लोग उन्हें गुरु,योगी,सन्यासी, महाराज जी कह रहे हैं ।

कल राजर्षि, महर्षि ,योगेश्वर भी कहेंगे। श्री राम जन्मभूमि अयोध्या को विश्व फलक पर चमकाने को संकल्पित नित नूतन विश्व रिकॉर्ड बनाने वाले योगी जी का न कोई अपना है न पराया,राग द्वेष से परे ऐसे लोक सन्यासी के चरण जहां-जहां पड़ेंगे वहां वहाँ के लोग अपने को धन्य मानेंगे ।

मानव शरीर क्षिति,जल, पावक, गगन, समीर इन पांच तत्वों से निर्मित है। महाराज जी के सानिन्ध्य में रहने के नाते मुझे ऐसा लगता है कि उनकी शारीरिक संरचना में अग्नि व गगन तत्व की अधिकता है । जहां अग्नि तत्व उन्हें ऊर्जस्वी बनाता है, वहीं गगन तत्व उन्हें शिखर से सर्वोच्च शिखर की ओर ले जाता है ।

क्षिति जैसी क्षमाशीलता , जल जैसी गंभीरता व समीर जैसा वैचारिक प्रवाह उन्हें औरों से अलग करता है। योगी जी के विराट व्यक्तित्व में जहां पूर्व गृहस्थ आश्रम की मां सावित्री देवी ,पिता आनंद सिंह बिष्ट की कर्मठता समाई है वही दादा गुरु दिग्विजयनाथ जी का सत्साहस गुरुदेव अवेद्यनाथ जी की समरसता उनके रोम रोम में व्याप्त है। योगी किसी के प्रतियोगी नहीं अपितु सर्वोपयोगी हैं। ऐसे लोक सन्यासी , अनाथों के नाथ योगी आदित्यनाथ का चरण छूने नहीं बल्कि चूमने लायक है।

प्रस्तुति:-   

pramod min 1 |

प्रमोद त्यागी उत्तर प्रदेश मंत्री विश्व हिंदू महासंघ

Editorial Desk

संपादकीय टीम अनुभवी पेशेवरों का एक विविध समूह है, जो मीडिया उत्कृष्टता और सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति प्रतिबद्ध है। अकादमिक, पत्रकारिता, कानून और स्वास्थ्य सेवा सहित विभिन्न क्षेत्रों में विशेषज्ञता के साथ, प्रत्येक सदस्य अद्वितीय दृष्टिकोण और उच्च गुणवत्ता वाली सामग्री प्रदान करने के प्रति जुनून लाता है। टीम में वरिष्ठ संपादक, लेखक और विषय विशेषज्ञ शामिल हैं, जो व्यापक, समयबद्ध और आकर्षक लेख सुनिश्चित करते हैं। सार्थक वार्तालापों को बढ़ावा देने और सामाजिक जागरूकता को बढ़ाने के लिए समर्पित, टीम समाज को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण मुद्दों पर पाठकों को अच्छी तरह से सूचित रखती है।

Editorial Desk has 430 posts and counting. See all posts by Editorial Desk

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *