Muzaffarnagar News: शुकतीर्थ की पावन धरा पर श्रीकृष्ण बाललीलाओं को सुन भाव विभोर हुए श्रद्धालु
मुजफ्फरनगर।(Muzaffarnagar News) शुकतीर्थ की पावन धरा पर १५ मई से प्रारंभ अष्टोत्तर शत् श्रीमद्भागवत मूल पाठ के साथ श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ एवं श्रीमद्भागवत कथा का चौथे दिन ललिताम्बा पीठाधीश्वर आचार्य जयराम महाराज के सानिध्य में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया गया।
इस बीच जन्मोत्सव की झांकी निकलते ही श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा करते हुए महोत्सव में सोहर भजन पर श्रोता खूब झूमे। इस बीच शुकतीर्थ श्रीकृष्ण के जयकारों तथा नन्द के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की जय घोष से वातावरण गूंज उठा। महाराज श्री ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन कर धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष की महत्ता पर विस्तार पूर्वक प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जब-जब धरा पर अत्याचार, दुराचार, पापाचार बढ़ता है, तब-तब प्रभु अवतार लेते हैं।
अखिल भारतीय ललिताम्बा शक्ति समिति द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन आचार्य जयराम जी महाराज ने कहा कि जीवन में भागवत कथा सुनने का सौभाग्य मिलना बड़ा दुर्लभ है। ऐसे में जब भी हमें यह अवसर मिले, इसका सदुपयोग करना चाहिए। कथा का सुनना तभी सार्थक होगा, जब उसके बताए मार्ग पर चलकर परमार्थ का काम करेंगे। महराज श्री ने श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन ज्ञानमयी अमृत वर्षा करते हुए श्रीकृष्ण के अलावा हिरण्य कश्यपु व भक्त प्रह्लाद के प्रसंग पर विस्तार से कथा सुनाई।
साथ ही उन्होंने बामन अवतार, ध्रुव चरित्र, अजामिल के प्रसंग सुना कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने कहा कि प्रायरू पाप आंखों के रास्ते ही मन में पहुंचता है, ऐसे में आपके मन में जैसे भी विचार होंगे, आपका मन उसी दिशा में आगे बढने की ओर ही प्रेरित करेंगा, यदि विचार पवित्र हैं, तो ही धर्म के प्रति रूचि बढ़ सकती है।
उन्होंने कहा कि श्री मद्भागवत कथा पुराण में सभी ग्रन्थों का सार है और यही ऐसा ग्रन्थ है जिसमें भगवान की सभी लीलाओं का वर्णन किया गया है। यह बातें हम सभी जानते हैं और कथाओं में सुनने को मिलती है मगर कथा श्रवण के बाद उस पर अमल करने से ही पुण्य प्राप्त होता है।
महाराज श्री ने कहा कि भगवान श्री नारायण ने अनेक लीलाएं की और अनेक अवतारों में मनुष्य को सामान्य रूप से जीने की शिक्षा देते हुए कथा का सारांश रूप से भक्तों को बताया। इस दौरान मुख्य रूप से बिजेंद्र शर्मा, ब्रजमोहन शर्मा, सुरेन्द्र शर्मा, विकास शर्मा, राकेश शर्मा, आनंद प्रकाश शर्मा, जय प्रकाश गोयल, सुभाष गोयल, अशोक शर्मा आदि मौजूद रहे।

