वैश्विक

केवल स्कूली शिक्षा प्रभावी नहीं हो सकती,दलितों-वंचितों को मुख्य धारा से जोड़ने की पहल-Dr. Mohan Bhagwat

सरसंघचालक Dr. Mohan Bhagwat ने कहा कि हिन्दू समाज खड़ा हो, संगठित हो यह समय की आवश्यकता है. यह किसी के विरुद्ध नहीं है, न ही इससे किसी को खतरा है. संघ को लेकर तर्कहीन बयानबाजी करने वालों पर कड़ा प्रहार करते हुए आरएसएस प्रमुख ने कहा अब संघ की हिन्दू राष्ट्र की बात को लोग गम्भीरता पूर्वक सुनते हैं.

हालांकि तथाकथित अल्पसंख्यकों में बिना कारण एक भय पैदा किया जाता है कि उन्हें संघ अथवा संगठित हिन्दू से खतरा है. ऐसा न कभी हुआ है, न होगा. न यह हिन्दू का, न ही संघ का स्वभाव या इतिहास रहा है.

Dr. Mohan Bhagwat ने कहा कि अन्याय, अत्याचार, द्वेष का सहारा लेकर गुंडागर्दी करने वाले समाज के शत्रु हैं तो आत्मरक्षा सभी का कर्तव्य बन जाता है. “ना भय देत काहू को, ना भय जानत आप”, ऐसा हिन्दू समाज खड़ा हो यह समय की आवश्यकता है. यह किसी के विरुद्ध नहीं है.
Dr. Mohan Bhagwat ने जहां एक तरफ अल्पसंख्यकों को भरोसा में लिया

वहीं दूसरी तरफ संघ और हिन्दू राष्ट्र की अवधारणा को लेकर भय और भ्रम फैलाने के लिए तथाकथित बुद्धिजीवियों तथा अल्पसंख्यक संगठनों को बेनकाब करते हुए कहा इनका प्रोपगेंडा विफल हो रहा है.

Dr. Mohan Bhagwat ने सामाजिक समता का उल्लेख करते हुए कहा कि संविधान के कारण राजनीतिक और आर्थिक समता का पथ प्रशस्त हो गया, लेकिन सामाजिक समता के बिना यह परिवर्तन लंबे समय तक नहीं टिक सकता है, ऐसी चेतावनी डॉ. बाबासाहब आंबेडकर जी ने सबको दी थी. सामाजिक स्तर पर मंदिर, पानी, शमशान सब हिन्दुओं के लिए खुले नहीं होते, तब तक समता की बातें केवल स्वप्नों की बातें रह जाएंगी. आरएसएस प्रमुख का बयान महत्वपूर्ण है क्योंकि संगठित हिन्दू और हिन्दू राष्ट्र की अवधारणा समाज के पिछड़े, शोषित, वंचित समाज के बिना अपूर्व है.

Dr. Mohan Bhagwat ने जनसंख्या नीति पर खुलकर अपने विचार रखे. उन्होंने कहा कि देश की विशाल जनसंख्या एक वास्तविकता है। संतान संख्या का विषय माताओं के स्वास्थ्य, आर्थिक क्षमता, शिक्षा, इच्छा से जुड़ा है। प्रत्येक परिवार की आवश्यकता से भी जुड़ा है. अत: जनसंख्या नीति ‌इन बातों पर विचार करके बने, सभी पर समान रूप से लागू हो,तभी जनसंख्या नियंत्रण के नियम परिणाम ला सकेंगे. जब-जब किसी देश में जनसांख्यिकी असंतुलन होता है, तब-तब उस देश की भौगोलिक सीमाओं में भी परिवर्तन आता है.

जबरदस्ती से चलने वाला मतांतरण व देश में हुई घुसपैठ भी बड़े कारण हैं.देश में मातृशक्ति के स्वावलंबन एवं आधी आबादी के सशक्तिकरण का संदेश संघ ने भी इस बार अपने मंच से देने का प्रयास किया है. संघ दशकों से विजयादशमी के दिन अपना स्थापना दिवस मनाता चला आ रहा है, लेकिन यह कार्यक्रम इस बार बेहद खास इसलिए था क्योंकि कार्यक्रम की मुख्य अतिथि के रूप में श्रीमती संतोष यादव मंच पर मौजूद थीं. हरियाणा में जन्मीं पद्मश्री से सम्मानित श्रीमती संतोष यादव एक मशहूर पर्वतारोही हैं। वो ऐसी पहली महिला हैं, जिन्होंने दो बार माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई की है.

सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने मातृशक्ति को नमन करते हुए कहा है कि संघ के कार्यक्रमों में प्रबुद्ध व कर्तृत्व संपन्न महिलाओं की उपस्थिति की परम्परा पुरानी है. हमारे महापुरुषों ने भी मातृशक्ति को देवता स्वरूप मानकर पूजाघर में बंद करना या फिर रसोईघर में मर्यादित कर देना, इन दोनों ही स्थितियों से बचते हुए उनके सशक्तिकरण और निर्णय प्रक्रिया सहित बराबरी की सहभागिता पर ही जोर दिया है.

Dr. Mohan Bhagwat ने अपने संबोधन में आत्मनिर्भर भारत का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि अब सामान्य व्यक्ति भी राष्ट्रीय नवोत्थान की प्रक्रिया को अनुभव कर रहा है। विश्व में अब भारत का महत्व तथा विश्वसनीयता बढ़ गयी है. सुरक्षा के क्षेत्र में हम स्वावलंबी हो रहे हैं. कोरोना कालखंड के बाद उभरते हुए हमारी अर्थव्यवस्था फिर से अपनी पूर्व स्थिति को तेजी से प्राप्त कर रही है.

 

Courtesy: This article is extracted with thanks & zero benefits from: डॉ महेंद्र कुमार सिंह
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डॉ. महेंद्र कुमार सिंह राजनीतिक विश्लेषक एवं दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान के प्राध्यापक है.

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